7-7-7 Parenting Rule: बच्चे की अपब्रिंगिंग यानी लालन-पालन में माता-पिता की भूमिका अहम होती है। बच्चे का व्यवहार, खाने और रहने के सलीके से उनकी परवरिश का पता लगाया जाता है। हालांकि पेरेंटिंग किसी भी पेरेंट्स के लिए आसान नहीं होती लेकिन बच्चे में अच्छे संस्कार और आदतें डालने के लिए पेरेंट्स नए-नए तरीके आजमाते रहते हैं। इनदिनों पेरेंटिंग का 7-7-7 रूल काफी प्रचलित हो रहा है। ये रूल बच्चे और पेरेंट्स के बीच शारीरिक और भावनात्मक रिश्ता मजबूत करने में मदद करता है। पेरेंटिंग का 7-7-7 रूल है और ये बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में कैसे काम करता है चलिए जानते हैं इसके बारे में।
क्या है 7-7-7 रूल

बच्चे के लिए शुरुआती 7 साल बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसमें बच्चे की शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है। इन वर्षों में यदि पेरेंट्स बच्चे की परवरिश 7-7-7 रूल के अनुसार करते हैं जो उनके गणित कौशल, भाषा विकास, कार्य और मस्तिष्क संरचना में बेहतरीन विकास देखा जा सकता है। ये नियम बच्चे की सामाजिक क्षमता और शैक्षणिक उपलब्धि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। 7-7-7 रूल के अनुसार माता-पिता को प्रतिदिन अपने बच्चे के साथ लगभग 7 मिनट सुबह, 7 मिनट शाम और 7 मिनट रात बिताने हैं। बच्चे के साथ बिताया गया ये समय बच्चे के लिए काफी खास होता है। इससे बच्चों और पेरेंट्स का भावनात्मक जुड़ाव होता है। साथ ही बच्चा नई चीजें सीखकर अपनी मोटर स्किल का विकास कर सकता है। बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने से उसमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भता बढ़ सकती है।
7-7-7 रूल में क्या है खास
बच्चों की परवरिश को आसान बनाने के लिए उनके साथ उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताना बेहद जरूरी है। 7-7-7 रूल के तहत पेरेंट्स को बच्चों की भावनाओं को समझने का मौका मिलता है साथ ही बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है। इस दौरान बच्चे माता-पिता की बातों को गौर से सुनते हैं और उसका पालन करने का प्रयास करते हैं। साथ ही बच्चे की मोटर स्किल का विकास होता है। दिन के ये 21 मिनट पेरेंट्स और बच्चे के बीच बेहतर बॉन्डिंग के लिए भी लाभदायक हो सकते हैं।
कैसे फॉलो करें पेरेंटिंग के 7-7-7 रूल

सुबह की शुरुआत हो ऐसी: 7-7-7 रूल को फॉलो करने के लिए सुबह से शुरुआत की जा सकती है। बच्चे की सुबह को खूबसूरत और ऊर्जावान बनाने के लिए परेंट्स बच्चे के साथ 7 मिनट बिताएं। इस दौरान वह बच्चे को स्कूल एक्टिविटीज के लिए मोटिवेट कर सकते हैं, बच्चा दिन में क्या नया करे या सीखे इसकी योजना बना सकते हैं या अपने साथ ब्रेकफास्ट करा सकते हैं। इससे बच्चे पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और बच्चा नई चीजों में अपना इंट्रेस्ट दिखाएगा। बच्चे के साथ बिताए गए ये 7 मिनट उसे दिनभर पॉजेटिव एनर्जी दे सकता है।शाम को बनाएं खास: शाम का समय हर बच्चे के लिए बेहद खास होता है। इस समय बच्चे पेरेंट्स से अपनी दिनभर की गतिविधियसं और एक्सपीरियंस शेयर करने के लिए उत्साहित होते हैं। इन 7 मिनट में पेरेंट्स अपनी सभी चिंताओं को छोड़कर बच्चे से बात करें, उसके साथ खेले, उसकी हर छोटी बात को गौर से सुनें और समस्या का हल निकालने का प्रयास करें। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता और उसे मौरल सपोर्ट भी मिल सकता है।
सोने से पहले बिताएं कुछ पल: हर बच्चा खास होता है और वह चाहता है कि पेरेंट्स भी उसकी भावनाओं को समझें। इसलिए रात में सोने से पहले यदि 7 मिनट बच्चे के साथ बिताए जाएं तो बच्चा अपने आप को स्पेशल समझता है और दोनों के बीच अच्छी बॉन्डिंग का भी विकास हो सकता है। इन सात मिनट में आप बच्चे को बैड टाइम स्टोरी, जोक्स और अपनी दिनभर की गतिविधियों के बारे में बता सकते हैं। इससे बच्चे के दिमाग को शांत करने में मदद मिल सकती है। साथ ही बच्चे की नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
