Milk Bottle Cavities: अधिकांश पेरेंट्स का मानना है कि बच्चा जितना दूध पिएगा उसका शारीरिक विकास उतना ही बेहतर होगा। दूध बच्चे के शारीरिक, मानसिक और फिजिकल हेल्थ के लिए बेहद जरूरी होता है। पर्याप्त मात्रा में दूध का सेवन करने से न केवल दिमाग तेज होता है बल्कि शरीर को मजबूती भी मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं अधिक मात्रा में दूध का सेवन करना बच्चे के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। जी हां, बार-बार बच्चे को दूध पिलाना मिल्क बॉटल कैविटी को बढ़ावा दे सकता है। कैविटी लगने पर बच्चे के दांत में दर्द, खून का स्त्राव और दांत के खोखला होने की समस्या हो सकती है। आखिर ये समस्या क्या है जो दूध से उत्पन्न होती है चलिए जानते हैं इसके बारे में।
क्या है मिल्क बॉटल कैविटी

मिल्क बॉटल कैविटी जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है कि ये समस्या लंबे समय तक बोतल का उपयोग करने के कारण होती है। एक साल की उम्र में बच्चे के कुछ दूध के दांत आ जाते हैं। ऐसे में जब बच्चा रात के समय दूध पीकर सोता है तो उसके दांतों में दूध की एक लेयर जमा होने लगती है। जो एक प्रकार की कैविटी होती है। ये कैविटी काफी हार्ड होती है जो आसानी से रिमूव नहीं होती। मिल्क बॉटल कैविटी से पीडि़त बच्चों के दांत काले या पीले नजर आते हैं। कई बार कैविटी की वजह से दांत टूटे और टेढ़े भी हो जाते हैं।
मिल्क बॉटल कैविटी के कारण
मिल्क बॉटल कैविटी की समस्या दांतों की सड़न के कारण होती है। बच्चे के दांतों में मीठे तरल पदार्थों जैसे फॉर्मूला दूध, फलों का रस, चीनी या शहद के लंबे समय तक लगा रहने के कारण मुंह में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। ये बैक्टीरिया दांतों पर हमला करके एसिड का उत्पादन करते हैं जो दांतों में जमने लगता है। जिसके परिणामस्वरूप कैविटी बनने लगती है।
मिल्क बॉटल कैविटी के लक्षण
– ये बच्चे के ऊपर और नीचे किसी भी दांत को प्रभावित कर सकती है।
– बच्चे की दांतों की सतह पर सफेद धब्बे दिखाई दे सकते हैं।
– दांतों की कैविटी या दांतों में छेद हो सकते हैं।
– दांतों में लगातार दर्द की समस्या
– मसूड़ों में सूजन या रक्तस्त्राव
– मसूड़ों में सूजन के कारण बुखार
मिल्क बॉटल कैविटी का उपचार

– बच्चे में शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर ही चिकित्सक से संपर्क करें।
– कैविटी के पनपने से पहले यदि दांतों में मिल्क बॉटल कैविटी के लक्षण दिखाई देते हैं तो बच्चे के दांतों पर फ्लोराइड लगा सकते हैं।
– बच्चे के दांतों पर फिर से मिनरल फॉर्म करने के लिए मिनिरलयुक्त डाइट का सेवन कराएं।
– टूटे और छेद वाले दांतों को ठीक करने के लिए क्राउन और फिलिंग करवा सकते हैं।
– इसके अलावा पल्प थेरेपी भी काम आ सकती है।
बच्चों को मिल्क बॉटल कैविटी से कैसे बचाएं
– बच्चे को रात के समय जल्दी दूध की बॉटल दें ताकि दांतों को सोने से पहले साफ किया जा सके।
– बच्चे को बॉटल की बजाय कप से दूध पीने के लिए प्रोत्साहित करें।
– बच्चे के दांत निकलने से पहले मसूड़ों की मसाज कर सफाई करें।
– बच्चे के दांत निकलने के बाद से ही नरम ब्रिसल वाले टूटब्रेश से ब्रश करना शुरू करें।
– रात के बजाय दिन के समय दूध पिलाएं।
