Overview:डेंटिस्ट ने समझाया क्यों ग्लूकोज बिस्कुट दांतों में कैविटी और सड़न का सबसे बड़ा कारण बनते हैं
शाहरुख खान और ऋतिक रोशन के डेंटिस्ट डॉ. संदेश मयेकअर ने खुलासा किया कि दांतों के लिए चॉकलेट नहीं, बल्कि ग्लूकोज बिस्कुट सबसे खतरनाक हैं। ये बिस्कुट चिपककर लंबे समय तक दांतों में फंसे रहते हैं और बैक्टीरिया द्वारा अम्ल बनाकर कैविटी का कारण बनते हैं। वहीं चॉकलेट जल्दी पिघलकर लार से साफ हो जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, सीमित सेवन और सही दंत स्वच्छता ही सुरक्षा का उपाय है।
Biscuits vs Chocolates: आपने अक्सर सुना होगा कि मिठाई और चॉकलेट दांतों को नुकसान पहुँचाते हैं। मगर यह सुचना चौंका देने वाली है: बॉलीवुड के दिग्गज शाहरुख खान और ऋतिक रोशन के डेंटिस्ट ने बताया है कि वास्तव में ग्लूकोज बिस्कुट चॉकलेट से भी ज़्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं।
डॉ. संदेग मयेकअर ने एक पोडकास्ट में कहा कि ग्लूकोज बिस्कुट चिपचिपे होते हैं, दांतों में चिपक जाते हैं और वहाँ पर बैक्टीरिया को बढ़ने का उत्तम वातावरण देते हैं। ये बैक्टीरिया acidic medium बनाते हैं, जिससे दांतों की ऊपरी लेयर कमजोर होकर खोखले (cavity) बन सकती है।
थाने की क्लिनिक में एस्थेटिक डेंटिस्ट डॉ. होलिका देविकार ने भी यही बात दोहराई — चॉकलेट अक्सर जल्दी पिघल जाती है और लार उसे धुलने में मदद करती है। मगर बिस्कुट दातों के हिस्सों में लंबे समय तक रुकते हैं, जिससे अम्ल बनना और क्षय का खतरा बढ़ जाता है।
तो इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि क्यों ग्लूकोज बिस्कुट चॉकलेट से अधिक दांतों के लिए खतरनाक माने जाते हैं, और कैसे हम इस स्नैक से अपने दांतों की रक्षा कर सकते हैं।
ग्लूकोज बिस्कुट

ग्लूकोज बिस्कुट अन्य सामान्य बिस्कुटों की तरह नहीं होते — वे थोडे सी नमी के साथ चिपचिपे बन जाते हैं। जब हम उन्हें खाते हैं, तो ये दांतों की नजदीकी सतहों, दांतों के बीचों और मसूड़ों के किनारे अटक जाते हैं। इस चिपचिपेपन की वजह से उन्हें तुरंत साफ करना मुश्किल हो जाता है, और ये लंबे समय तक मुंह में रहते हैं।
इतने समय तक जब ये चीनी और स्टार्चयुक्त मिक्स्चर दांतों के संपर्क में रहते हैं, तब हमारे मुंह में मौजूद बैक्टीरिया उन पर हमला करके अम्ल (acid) बनाते हैं। यह अम्ल दांतों की एनेमल (ऊपरी परत) को धीरे-धीरे खा जाता है और cavity यानी दांतों में छेद बनने का कारण बनता है।
डॉ. मयेकअर की टिप्पणी के मुताबिक — “most dangerous for cavities are glucose biscuits rather than chocolates” — इसीलिए ग्लूकोज बिस्कुट दांतों के लिए बेहद खतरनाक हैं।
चॉकलेट
चॉकलेट, विशेष रूप से मिल्क या डार्क चॉकलेट, अक्सर जल्दी पिघल जाती है और लार (saliva) उससे मिल जाती है। इसका मतलब है कि चॉकलेट का दांतों पर अवशेष कम समय तक रहता है , जिससे बैक्टीरिया को ऐसिड का निर्माण करने का अवसर नहीं मिलता ।
कुछ डार्क चॉकलेट में नैचुरल कम्पाउन्ड होते हैं जो बैक्टीरिया को लड़ने में मदद कर सकते हैं। इस वजह से, चॉकलेट पूरी तरह सेफ नही है, मगर अपने फॉर्म और पिघलने की नेचर के कारण, वह ग्लूकोज बिस्कुट जितने समय तक दांतों से संपर्क में नहीं रहती।
डॉ. देविकार के अनुसार — चॉकलेट की तुलना में बिस्कुट लंबे समय तक मुंह में “अटकने” की प्रवृत्ति दिखाते हैं, और यही उन्हें अधिक हानिकारक बनाती है।
दांतों के दुश्मन: ऐसिड और बैक्टीरिया
मुंह में मौजूद बैक्टीरिया जब चीनी और स्टार्च को ब्रेक डाउन करते हैं, तो प्लाक बनती है। यह प्लाक ऐसिड बनाती है जो दांतों की एनेमल पर हमला करती है। लगातार acidic वातावरण से एनेमल कमजोर हो जाती है, और धीरे-धीरे दांतों में छेद (cavities) बनते हैं।
चूंकि ग्लूकोज बिस्कुट लंबे समय तक दांतों के संपर्क में रहते हैं, इसलिए बैक्टीरिया अधिक ऐक्टिव हो पाते हैं। इस प्रकार ऐसिड की मात्रा बढ़ती है और नुकसान अधिक होता है।
डॉक्टरों का कहना है कि यह प्रक्रिया धीमी होती है पर निरंतर होने पर दांतों को बहुत प्रभावित करती है। इसलिए हर दिन ऐसे स्नैक्स को सोच समझकर चूज़ करना चाहिए।
सेफ ऑप्शन और सीमित सेवन
सेफ ऑप्शन चुनने में हम बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। यदि आपको मिठाई खानी है, तो चॉकलेट (खासकर कम चीनी व डार्क चॉकलेट) चुनी जाए। लेकिन उसे भी अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए।
वैसे भी बिस्कुट के बजाय नट्स, दूध, फल जैसे ऑप्शन को प्राथमिकता दें। यदि बिस्कुट या चॉकलेट खाने ही हों, तो तुरंत बाद मुँह धोना या ब्रश करना लाभदायक होगा।
डॉ. देविकार का सुझाव है कि मिठाई के साथ पानी, दूध या गीले फूड आइटम्स को भी लें जिससे वह जल्दी घुल जाए और दांतों पर ज्यादा देर न टिके।
खाना खाने के बाद मुँह धोने की आदत
मिठाई चाहे बिस्कुट हो या चॉकलेट, उसे नियमित रूप से खाते समय मुँह साफ रखना ज़रूरी है। खाना खाने के बाद कम से कम मिनटों में मुँह धोना, या बेहतर हो तो ब्रश करना, दांतों को अम्ल से होने वाले नुकसान से बचाता है।
इसके अलावा फ्लॉसिंग और मसूड़ों की देखभाल भी महत्वपूर्ण हैं ताकि दांतों के बीच फँसे अवशेष हट जाएँ। हर 6 महीने में दंत चिकित्सक से चेकअप कराना चाहिए, ताकि यदि प्रारंभिक समस्या हो, तो समय रहते उसका समाधान हो सके।
डॉ. मयेकअर और डॉ. देविकार दोनों ही इस बात पर ज़ोर देते हैं कि उचित दंत स्वच्छता और संयमित मिठाई सेवन ही आपके दांतों की सुरक्षा की कुंजी है।
