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 एक 4 साल के बच्चे की मां के तौर पर मैं कुछ हद तक सफल रही हूं तो कुछ मायनों में असफल भी। खासतौर पर जब मेरा बेटा दूध पीने में एक घंटे और खाने में पौन घंटा लगाता है। तिस पर लोगों का यह कहना कि तुमने इसे खाने की आदत नहीं लगाई है, लगता है इसका खाना भी तुम ही खा जाती हो, फलाना- ढिमकाना…। नए स्कूल में जाने के बाद उसका हाथ भी मारने के लिए उठने लगा है। उसकी इन सारी गलतियों में मुझे खुद में कमी नजर आने लगती है। अफसोस होने लगता है कि मेरी परवरिश में ही कोई कमी रह गई होगी।

सोचती हूं न जाने मुझसे कहां गलती हो गई, शायद मुझे अपने बच्चे को दूसरी तरह से हैंडिल करना था। ऐसे कई विचार रोजाना आते रहते हैं। ऐसा होता है, मेरी सहेली का कहना है। खासतौर पर जब आप एक मां हैं, तो इस तरह की अपराध भावना का मन में आना लाजमी है। लगता है कि गलती ऐसी हो गई है, जिसे सुधारना मुश्किल है।

पीछा नहीं छोड़ते कुछ सवाल

कुछ लोगों के लिए तो यह सवाल पीछा ही नहीं छोड़ते हैं। लगता है जब बच्चा 1 साल का था, तभी उसे पौष्टिक खाने की आदत लगानी चाहिए थी। उसे पति-पत्नी की नोंक-झोंक से बचाकर रखा जा सकता था। खुद के लिए समय निकालने के लिए उसे वीडियो देखने के लिए फोन नहीं देना चाहिए था। लगातार पांच दिनों तक एक ही कहानी सुनाने की बजाय अलग-अलग कहानियां सुनानी चाहिए थी। अपराध भाव की यह सूची खत्म नहीं होती क्या पैरेंटिंग पर क्लासेज अटेंड करके आप इस अपराध भावना से मुक्ति पा सकती हैं? क्या आपको लगता है कि आपकी मां भी आपकी तरह ही महसूस करती होगी? यदि हां तो क्या इसके लिए वह खुद को ही पीछे करने में लगी रहती थी? सच तो यह है कि अधिकांश माता-पिता को अफसोस होते हैं। लेकिन यह भी सच है कि हमें उन अफसोस को खुद पर नियंत्रण नहीं करने देना चाहिए। इन अपराध भावनाओं को पनपने देना सही नहीं है। हालांकि शोध बताते हैं कि अपराध भावना से ग्रस्त पैरेंट्स बेहतरीन ग्रैंड पैरेंट्स बनते हैं क्योंकि वह इस उम्र तक आते-आते काफी कुछ सीख जाते हैं

क्या है अपराध भावना

सच तो यह है कि अपराध भावना में बहुत अधिक जीना या बहुत कम जीना दोनों पैरेंट्स और बच्चे दोनों के लिए समस्या खड़ी कर सकता है। हमें बस बतौर पैरेंट अपनी भूमिका निभाना जरूरी है। अपराध महसूस करना एक भावना है न कि एक सच या मृत्यु। अपराध बोध तभी होता है, जब हम सब कुछ परफेक्ट नहीं कर पाते हैं। यह आता है औैर उसी तरह चला भी जाता है। यह बोध हमें बताने की कोशिश करता है कि कुछ तो गलत है और इसे ठीक करने की आवश्यकता है। यदि हमने इसका सामना नहीं किया तो यह शर्म में बदल जाएगा, स्वयं के लिए नाकाबिल औैर नाकरात्मक भावना आ जाएगी। इस भावना से मुक्ति पाई जा सकती है और समय के साथ हल भी किया जा सकता है। यदि खुले में समझदारी के साथ इसे हैंडिल किया गया तो यह पाठ या सबब भी बन सकता है। यह गलतियां करने के बारे में नहीं है। यह एक गलती होने के बारे में हैं।

 
 
साइकोलॉजिस्ट एन. स्मिथ ने पैरेंटल गिल्ट को लेकर 20 कारणों की सूची बनाई है-
  •  मैं उस समय उपलब्ध नहीं था/थी।
  •  मैंने सुना ही नहीं।
  •  मैं काम में कुछ ज्यादा ही व्यस्त था/थी।
  •  मैं स्नेही नहीं था/थी।
  •  मैं चिल्लाई, मारा औैर दोष दिया।
  •  मैं बुरी रोल मॉडल था/थी।
  •  बच्चों को समझने के लिए समय नहीं दिया।
  •  मैं संगत में नहीं था/थी।
  •  मैंने कुछ ज्यादा ही दबाव बनाया था।
  •  मैंने दबाव नहीं बनाया।
  •  मैंने थप्पड़ मारा।
  •  मैं नशे / तनाव में था/थी।
  •  हमारा रोज आपस में झगड़ा होता था।
  • मेरा तलाक हो गया था।
  • मैंने दुख पहुंचाने वाली बातें बोली।
  • मैं स्वार्थी हो गया था/थी।
  • मैंने अपने बच्चे को नजरअंदाज किया।
  • मैंने अपने बच्चे की सुरक्षा नहीं की।
अधिकतर पैरेंट्स यह नहीं समझ पाते हैं कि जब वे अपने बच्चे के विकास औैर प्रदर्शन को लेकर दुखी होते हैं तो बच्चा भी यह महसूस करता है कि मैं सही नहीं हूं, मैंने अपने माता-पिता को दुख पहुंचाया है। चूंकि बच्चों का हाल-चाल उनके औैर पैरेंट्स के आपसी रिश्ते पर निर्भर करता है, वे हमारी नजर में अच्छे बनने की कोशिश करते हैं, भले ही वह उनके लिए बेस्ट न हो। कुछ भावनात्मक तौर पर पैरेंट्स से दूर हो जाते हैं, पैरेंट्स की मदद नहीं लेना चाहते। जब अपराध बोध से ग्रसित एक मां या पिता अपने बच्चे को परफेक्शन की ओर धकेलता है तो बच्चा सामने से भले ही सामान्य दिखता है लेकिन अंदर से उसका संघर्ष चालू रहता है।
 
करें अपराध भावना का प्रबंधन
यदि आप भी पैरेंटिंग के इस चक्रव्यूह में फंसे हैं तो अपनी अपराध भावना के प्रबंधन के लिए एक स्वस्थ रास्ता चुन सकते हैं। यह याद रखें कि पैरेंटिंग का मतलब परफेक्ट होना नहीं है। हमारे बच्चे अपने जीवन के अनुभवों से भी सीखते हैं औैर गलतियों से भी। यदि आपका बचपन दुख और दर्द में बीता है तो संभव है कि आप अपने बच्चों को उसी दर्द के चश्मे से देखते हों। आप अपन सामथ्र्य और जरूरत के अनुसार अपने बच्चों को दर्द और कष्ट रहित बचपन देना चाहते हैं। अपने और अपने दर्द भरे अनुभवों के लिए संवेदना बनाए रखें। लेकिन अपने पुराने अनुभवों को नए अप्रोच से दूर रखें, जो आप अपने बच्चों के लिए प्रदान करना चाहते हैं। आपका लक्ष्य परफेक्शन नहीं बल्कि बढिय़ा होना चाहिए। बच्चों को कुछ चैलेंज औैर फ्रस्ट्रेशन भी चाहिए ताकि वे बड़े होकर स्वस्थ एडल्ट बन सकें। यह याद रखें कि हमें अपने बच्चों के पीछे खड़े रहकर उन्हें औैर स्वयं दोनों को देखना है क्योंकि हम सब जटिल इंसान हैं। जाहिर है कि हम सब इमपरफेक्ट, अप्रत्याशित, असंगत होने के साथ ही बदलाव के लिए तैयार रहते हैं। 
 
1. याद रखें यह है सामान्य
याद रखें कि कभी न कभी हर मां या पिता ऐसा महसूस करता है कि वह इस दुनिया का सबसे खराब पैरेंट है। इसलिए खुद को यह याद दिलाते रहें कि कोई भी परफेक्ट नहीं होता, न आप, न आपके बच्चे।
 
2. परफेक्शन को जाने दें
हमेशा असलियत का सामना करें और असल जीवन में ही जिएं, जहां गलतियां होना आम है। दिन के अंत में एक बच्चे को सुलाने के लिए बिस्तर पर ले जाना आसान काम नहीं है। बिना तनाव के हर समस्या को सुलझाने की कोशिश करें।
 
3. विचारों और भावनाओं पर अमल करें
गिल्ट खतरनाक हो सकता है, लेकिन इसे सकारात्मक विचारों से भी जोड़कर देखा जा सकता है। आप इससे प्रेरणा लेकर सही दिशा में कदम भी उठा सकते हैं।
 
4. सही पैरेंटिंग सलाह
ऑनलाइन सलाह लेना चाहते हैं या समूह में या एकांत में? यह आपको सोचना होगा। यह भी ध्यान रखें कि सलाह लेने के लिए ऐसे व्यक्ति के पास जाएं, जो सकारात्मक सोच रखता हो।
 
5. अन्य पैरेंट्स के साथ बनाएं नेटवर्क
अन्य पैरेंट्स के साथ नेटवर्क बनाएं, वहां न केवल अपने बारे में अच्छी बातें बल्कि बुरी बातें भी शेयर करें। दूसरों को हमेशा सकारात्मक फीडबैक ही दें। हमेशा खुद को और दूसरे पैरेंट्स को यही सलाह दें कि अपराध बोध एक आम भावना है।
 
 
 
पैरेंटल गिल्ट से बचने के लिए 5 टिप्स
1. याद रखें यह है सामान्य 
याद रखें कि कभी न कभी हर मां या पिता ऐसा महसूस करता है कि वह इस दुनिया का सबसे खराब पैरेंट है। इसलिए खुद को यह याद दिलाते रहें कि कोई भी परफेक्ट नहीं होता, न आप, न आपके बच्चे।
 
2. परफेक्शन को जाने दें
हमेशा असलियत का सामना करें और असल जीवन में ही जिएं, जहां गलतियां होना आम है। दिन के अंत में एक बच्चे को सुलाने के लिए बिस्तर पर ले जाना आसान काम नहीं है। बिना तनाव के हर समस्या को सुलझाने की कोशिश करें।
 
3. विचारों और भावनाओं पर अमल करें
गिल्ट खतरनाक हो सकता है, लेकिन इसे सकारात्मक विचारों से भी जोड़कर देखा जा सकता है। आप इससे प्रेरणा लेकर सही दिशा में कदम भी उठा सकते हैं।
 
4. सही पैरेंटिंग सलाह
ऑनलाइन सलाह लेना चाहते हैं या समूह में या एकांत में? यह आपको सोचना होगा। यह भी ध्यान रखें कि सलाह लेने के लिए ऐसे व्यक्ति के पास जाएं, जो सकारात्मक सोच रखता हो।
 
5. अन्य पैरेंट्स के साथ बनाएं नेटवर्क
अन्य पैरेंट्स के साथ नेटवर्क बनाएं, वहां न केवल अपने बारे में अच्छी बातें बल्कि बुरी बातें भी शेयर करें। दूसरों को हमेशा सकारात्मक फीडबैक ही दें। हमेशा खुद को और दूसरे पैरेंट्स को यही सलाह दें कि अपराध बोध एक आम भावना है।