Summary: बहस का बच्चों पर असर
हर रोज की पेरेंट्स की बहस बच्चों की सोच, आत्मविश्वास और मानसिक विकास को गहराई से प्रभावित करती है।
Parents fights impact children: एक बच्चे के सीखने की प्रक्रिया उसके दुनिया में आने के साथ ही शुरू हो जाता है और उसके पहले शिक्षक उसके माता-पिता होते हैं तथा उसका पहला स्कूल उसका घर। ऐसे में जब बच्चे के पहले स्कूल का माहौल या पहले शिक्षक का बर्ताव अच्छा ना होने का खामियाजा बच्चों को जीवन भर भुगतना पड़ता है। अगर बच्चे के घर का माहौल लड़ाई झगड़े वाला हो या बच्चों के माता-पिता के बीच हर रोज झगड़े होते हो तो इसका बच्चों के मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है। आइए इस लेख में जानते हैं माता-पिता के झगड़े का बच्चे पर किस तरह नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
बहस का बच्चे पर मनोवैज्ञानिक का असर

जब बच्चा हर रोज अपने माता-पिता को झगड़ते या बहस करते देखाता है तो वह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पता है। उसे डर रहता है कहीं माता-पिता के झगड़े के कारण उसे उनसे दूर ना होना पड़े। पेरेंट्स के लगातार झगड़े बच्चों में असुरक्षा और डर की भावना को बढ़ाते हैं जो कि बच्चों में आत्मविश्वास की कमी का कारण बनता है।
कई बार बच्चा घर में होने वाले लगातार बहस और झगड़े का जिम्मेदार खुद को समझने लगता है। वह खुद में गिल्ट से भर जाता है। इस तरह का गिल्ट बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को खराब करता है जिसका असर बच्चों के नींद और पढ़ाई दोनों पर पड़ता है।
नकारात्मक सोच का विकास
जब बच्चा लगातार तनाव की स्थिति में बना रहता है तो इसका उसके सोचने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। बच्चे की कंसंट्रेशन पावर कम होती है। बच्चा किसी भी समस्या को नकारात्मकता के साथ देखाता है। बच्चा समस्या को सुलझा पाने में खुद को असमर्थ पाता है। बच्चे के दिमाग में हर चीज के प्रति नकारात्मक धारणा का विकास होता है। वह परिवार को संबंधों को अपना सपोर्ट सिस्टम समझने की बजाय उन्हें बंधन समझने लगता है।
आत्मविश्वास में कमी
घर के झगड़ों का असर बच्चों पर घर तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसका असर उसके पूरे व्यक्तित्व पर होता है। बच्चों में आत्मविश्वास की कमी होती है जिस कारण बच्चा हर वक्त खुद को कमजोर महसूस करता है, खुद को भीड़ में छुपाने की कोशिश करता है। अपने स्कूल में, समाज में, दोस्तों के बीच खुद को कमतर समझ कर पीछे रहना पसंद करता है। बच्चा किसी भी बदलाव से डरता है, वह चुनौतियों का सामना करने की बजाय उनसे भागना चाहता है।
भविष्य पर इसका असर
बच्चा जो कुछ भी बचपन में देखाता है, सीखता है, उसका प्रभाव सिर्फ उसके वर्तमान पर नहीं पड़ता बल्कि, उससे उसका भविष्य भी प्रभावित होता है। माता-पिता के बीच लगातार झगड़ों के कारण बच्चे का रिश्तों पर से विश्वास उठ जाता है। वह बड़े होकर किसी पर भरोसा या विश्वास नहीं कर पाता, हर किसी को संदेह भरी दृष्टि से देखाता है, जिस वजह से वह हमेशा अपने जीवन में प्यार की कमी महसूस करता है। बड़े होकर तनाव और चिंता जैसे मानसिक परेशानियों के होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
बच्चों के खातिर पेरेंट्स के लिए सुझाव
अगर आप अपने बच्चों को एक अच्छा वर्तमान और भविष्य देना चाहते हैं, आप अपने बच्चों को तनाव मुक्त जीवन, जीवन के प्रति स्वास्थ्य अनुभव देना चाहते हैं तो आपके लिए कुछ सुझाव है उन्हें अपने जीवन में अपनाएं।
यह सुझाव हैं:
अपने बच्चों के सामने बहस ना करें। मतभेद होने पर भी अपने साथी से अपशब्द ना कहें। अपने बीच के मतभेदों को बच्चों से दूर, बंद कमरे में शांति से बात करके सुलझाएं। अपने बच्चों के साथ माता-पिता मिलकर सकारात्मक समय बिताए। यह कुछ छोटे-छोटे टिप्स हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने बच्चों का तनाव मुक्त वर्तमान और भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
