Chronic stress and heart health
Chronic stress and heart health

Overview:क्रोनिक स्ट्रेस दिल को बना देती है बीमार, हार्वर्ड ने बताया कैसे करें खुद को Destress, बड़े काम के 5 टिप्स

हार्वर्ड की रिसर्च में पाया गया कि क्रोनिक स्ट्रेस दिल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। लगातार बना रहने वाला तनाव हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर और सूजन बढ़ाता है, जिससे हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है। इस स्टडी में 5 आसान उपाय बताए गए हैं—वॉक करना, डीप ब्रीदिंग, हर्बल चाय पीना, नींद पूरी करना और सोशल कनेक्शन बनाए रखना—जो दिल को स्ट्रेस से बचाते हैं और हेल्दी रखते हैं।

Chronic Stress and Heart Health: आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में स्ट्रेस लेना आम बात हो गई है। लेकिन जब ये तनाव रोज़-रोज़ बना रहे और लंबे समय तक चले, तो इसे क्रोनिक स्ट्रेस कहा जाता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च बताती है कि क्रोनिक स्ट्रेस सिर्फ मानसिक नहीं, बल्कि शारीरिक रूप से भी नुकसान पहुंचाता है, खासकर दिल यानी हार्ट को

रिसर्च के मुताबिक, लंबे समय तक बना रहने वाला स्ट्रेस हमारे शरीर में कॉर्टिसोल नाम के हॉर्मोन को लगातार बढ़ाता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है, दिल की धड़कन तेज होती है और शरीर में सूजन (इंफ्लेमेशन) भी बढ़ जाती है। ये सब मिलकर हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।

लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग ने 5 आसान और असरदार टिप्स बताए हैं, जिन्हें अपनाकर आप खुद को डेस्ट्रेस कर सकते हैं और दिल को हेल्दी रख सकते हैं। आइए जानते हैं वे कौन-से 5 ज़रूरी उपाय हैं जो हमारे दिल को स्ट्रेस से बचा सकते हैं।

रोजाना 30 मिनट की वॉक

रिसर्च में पाया गया है कि रोजाना सिर्फ 30 मिनट की तेज चाल की वॉक आपके स्ट्रेस लेवल को काफी हद तक कम कर सकती है। वॉक करने से ब्रेन में एंडॉर्फिन नाम का हार्मोन रिलीज होता है, जो नेचुरल स्ट्रेस बस्टर की तरह काम करता है। इससे मूड अच्छा होता है और दिल की धड़कन भी सामान्य बनी रहती है। हार्वर्ड की रिपोर्ट बताती है कि ऐसे लोग जो हर दिन हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करते हैं, उनमें हार्ट डिजीज का खतरा लगभग 35% तक कम हो जाता है। वॉक करने का सबसे अच्छा समय सुबह का होता है, जब वातावरण शुद्ध होता है और मन शांत।

डीप ब्रीदिंग, दिल को देती है आराम

डीप ब्रीदिंग यानी गहरी सांस लेना एक सरल लेकिन असरदार तरीका है स्ट्रेस को कंट्रोल करने का। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक रिपोर्ट कहती है कि जब आप धीरे-धीरे और गहराई से सांस लेते हैं, तो पैरासिम्पेथेटिक नर्व सिस्टम एक्टिव होता है, जिससे शरीर को रिलैक्स होने का सिग्नल मिलता है। यह हार्ट रेट को कम करता है और ब्लड प्रेशर को संतुलित करता है। दिन में सिर्फ 10 मिनट भी अगर आप आंखें बंद करके गहरी सांस लें तो स्ट्रेस के असर से बचा जा सकता है। इसे किसी भी समय किया जा सकता है – ऑफिस ब्रेक में, सोने से पहले या सुबह।

कैफीन की जगह लें हर्बल चाय

हार्वर्ड स्टडी के मुताबिक ज़्यादा कैफीन यानी चाय-कॉफी का ज़्यादा सेवन स्ट्रेस हार्मोन को और बढ़ा सकता है। इसकी जगह अगर आप कैमोमाइल, लेमन बाम या ग्रीन टी जैसी हर्बल चाय पीएं, तो उसका शांत करने वाला असर स्ट्रेस को घटाता है। ये हर्बल टीज शरीर को डिटॉक्स भी करती हैं और ब्रेन में रिलैक्सिंग न्यूरोट्रांसमीटर को एक्टिव करती हैं। इसके अलावा, हर्बल चाय दिल की धड़कन को भी नियंत्रित करती है और अच्छी नींद लाने में मदद करती है। कोशिश करें कि दिन में 2 बार हर्बल चाय ज़रूर लें, खासकर शाम और रात को।

नींद पूरी होना है ज़रूरी

स्ट्रेस और नींद का सीधा संबंध है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो स्ट्रेस लेवल बढ़ जाता है, जिससे दिल पर दबाव आता है। हार्वर्ड हेल्थ जर्नल के अनुसार, हर दिन कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेने वाले लोगों में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम रहता है। नींद पूरी करने से ब्रेन को आराम मिलता है और शरीर के सारे सिस्टम संतुलन में रहते हैं। अच्छी नींद के लिए सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें, हल्का खाना खाएं और शांत माहौल में सोएं। याद रखें – अच्छी नींद मतलब स्वस्थ दिल।

सोशल कनेक्शन से घटता है स्ट्रेस

हार्वर्ड की एक 75 साल लंबी स्टडी – Harvard Study of Adult Development – में ये साफ बताया गया कि जो लोग अपने परिवार, दोस्तों और समाज से जुड़े रहते हैं, उनका दिल ज़्यादा स्वस्थ रहता है। अकेलापन और सोशल आइसोलेशन सीधे तौर पर स्ट्रेस और हार्ट डिजीज से जुड़े होते हैं। दोस्तों से बात करना, परिवार के साथ समय बिताना या किसी ग्रुप एक्टिविटी में शामिल होना – ये सब स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं। तो अगर आप चाहते हैं कि दिल खुश और हेल्दी रहे, तो रिश्तों को मजबूत बनाए रखें।

मेरा नाम दिव्या गोयल है। मैंने अर्थशास्त्र (Economics) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से हूं। लेखन मेरे लिए सिर्फ एक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद का एक ज़रिया है।मुझे महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक...