योगा दिलाएगा आपको क्रॉनिक बीमारियों से छुटकारा, यहां देखें इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातें: Chronic Disease Tips
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योगा दिलाएगा आपको क्रॉनिक बीमारियों से छुटकारा

क्रॉनिक बीमारियां जैसे शुगर, कैंसर, कार्डियोवैस्कुलर और रेस्पिरेटरी से जुड़ी बीमारियां न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में तेज़ी से बढ़ रही हैं।

Chronic Disease Tips: क्रॉनिक बीमारियां जैसे शुगर, कैंसर, कार्डियोवैस्कुलर और रेस्पिरेटरी से जुड़ी बीमारियां न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में तेज़ी से बढ़ रही हैं। इनका कोई इलाज न होने की वजह से ज़्यादातर लोग इन बीमारियों की वजह से अपनी जान भी गवा देते हैं। आज की मॉडर्न दवाइयां इन बीमारियों के उपचार के लिए पहले से काफी बेहतर काम कर रही हैं। लेकिन अभी भी इन बीमारियों को ठीक होने में काफी लंबा समय लग जाता है। खराब जीवनशैली, असंतुलित डाइट, तंबाकू और शराब का हद से ज्यादा सेवन, धूम्रपान जैसी बुरी चीजें इन बीमारियों के होने और बीमारियों को और ज़्यादा बढ़ाने के कुछ कारणों में से ही एक हैं। इन बीमारयों के बढ़ने की बहुत सी वजह होती हैं। हालांकि इन चीज़ों की कुछ मुख्य वजहों को हम ज्यादातर नजरअंदाज ही कर देते हैं। अगर उनपर अच्छी तरह से ध्यान दिया जाए और उन्हें हर मुमकिन कोशिश से खतम किया जा सकता है।

Chronic Disease Tips: संपूर्ण दृष्टिकोण

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Yoga for Chronic Disease Tips

हर एक व्यक्ति का अपने जीवन के प्रति एक अप्रोच यानी दृष्टिकोण होता है, एक उद्देश्य होता है। जिस उद्देश्य को पूरा करने में वह अपनी जी जान लगा देते हैं। जीवन के किस दौर पर हम क्या निर्णय लेते हैं और किस चीज को ज्यादा या कम महत्व देते हैं इस पर हमारा भविष्य और स्वास्थ्य दोनों ही पूरी तरह से निर्भर करता है। उदाहरण के लिए यदि किसी का लक्ष्य है खूब धन दौलत कमाना है और उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अगर वो व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को भी नजरअंदाज कर देता है तो इसका परिणाम काफी नुकसानदायक हो सकता है।

जागरूकता

जीवन में जागरूकता बेहद जरूरी है। अपने शरीर के प्रति मानसिक और शारीरिक स्तर पर जागरूक रहना हर व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी है। कोई भी बड़ी बीमारी किसी को भी अचानक नहीं होती है। हमारे शरीर के अंदर इन बीमारियों का विकास धीरे धीरे और एक व्यवस्थित रूप से ही होता है। अगर हम इन की वजह से सचेत हो जाएं और शरीर में होने वाले किसी भी असंतुलन को पहचान लें तो हम अपने आप को होने वाली इन कई घातक बीमारियों से दूर रख सकते हैं। और हमेशा स्वस्थ रहने की कोशिश कर सकते हैं।

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तनाव

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Stress

तनाव यानि स्ट्रेस, हर व्यक्ति के जीवन का मुख्य हिस्सा बन चूका है। आधुनिक समाज में होनेवाले लगातार विकास से हमारे निजी जीवन पर लगाता दबाव धीरे धीरे बढ़ता ही जा रहा है। इसका असर हमारे शरीर और मन दोनों पर क्रॉनिक स्ट्रेस के रूप में होता जा रहा है। धीरे धीरे हम इस क्रॉनिक स्ट्रेस को कंट्रोल नियंत्रित करने की क्षमता खोते ही जा रहे हैं और इसलिए आज हर दूसरा व्यक्ति तरह-तरह की बीमारियों का शिकार बनता जा रहा है। जरूरत से ज़्यादा तनाव लेने से कोई भी व्यक्ति अपनी किसी भी काम में अच्छी तरह से फोकस भी नहीं कर पाता है।

इन सभी मुख्य कारणों से छुटकारा पाना यौगिक चिकत्सा यानी योग शुरू करने से संभव हो सकता है। लगातार योगा करने से कई क्रोनिक बीमारियों को ख़तम किया जा सकता है। योग हमारे जीवन में संतुलन लाने में मदद करता है। साथ ही मेंटल और फिजिकल स्तर पर संतुलन बनाये रखने में मददगार साबित होता है। योग हमारे शरीर की अंदरूनी प्रतिरक्षा क्रियाविधि यानी डिफेंस मेकैनिज़्म को मज़बूत बनाने में भी मदद करता है। जिससे हमारे शरीर को बाहरी संक्रमण के लड़ने की शक्ति मिलती है। बता दें, योगासन, प्राणायाम, ध्यान जैसी चीजें हमारे शरीर को रोगी से निरोगी बनाने की प्रक्रिया की गति को और भी अच्छे से बढ़ाते हैं। आइए देखते हैं कि योग के जरिये हम कैसे इन क्रोनिक बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं-

यम नियम – यह ऐसी नीति है, जो हमारे सामाजिक और पर्सनल जीवन में एक संतुलन लाने का काम करती है। यम नियम किसी भी व्यक्ति को न सिर्फ समाज के साथ बल्कि खुद के साथ भी पूरी तरह से एडजस्ट करके रहना सिखाता है। ये किसी भी व्यक्ति को एक एकीकृत जीवन का आधार याद दिलाता रहता है।

आसन -आसन किसी भी व्यक्ति की मांसपेशियों को मज़बूत बनाये रखता है। साथ ही शरीर में स्थिरता, शक्ति और लचीलापन लाने में भी मददगार साबित होता है।

मुद्रा एवं बंध -मुद्राओं और बंध की प्रॅक्टिवे किसी प्रफेशनल योग टीचर के साथ किया जाए तो यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। साथ ही गलतियां होने के चांस भी कम होते हैं।

प्राणायाम– प्राणायाम की प्रैक्टिस से हमारे रेस्पिरेशन ऑपरेशन में लगातार सुधार लाता है। जिससे शरीर के ज़रूरी पार्ट्स में ब्लड सर्कुलेशन और बेहतरीन होता है और शरीर में होनेवाले अंदरूनी दर्द को भी खतम करता है।

शुद्धि क्रियाएं – ये ज़रुरत से ज्यादा कफ़ और टोक्सिन को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। और शरीर के अंदर की नलियों को भी साफ़ करती हैं। शुद्धि क्रियाओं से न सिर्फ शारीरिक मल को साफ रखता है, बल्कि मानसिक स्तर पर भी शुद्धिकरण में इससे बहुत मदद मिलती है। प्राणायाम की प्रैक्टिस में भी ये मदद करता है।

यौगिक आहार – यौगिक आहारयानी कम्पाउंड डाइट एक काफी महत्वपूर्ण चीज मानी जाती है। अगर हम इस बात पर थोड़ा-सा गौर करें कि हम अपने भोजन में क्या, कितना, कैसे, और कब खाएं तो हम अपने शरीर से बड़ी मात्रा में टोक्सिन को बाहर निकाल कर अपने शरीर को पूरी तरह से स्वस्थ रख सकते हैं। इससे मेन्टल और फिजिकल हेल्थ दोनों ही समय के साथ लगातार बेहतर होती हैं।

ध्यान – शारीरिक और मानसिक स्थिरीकरण यानी मेंटली और फिज़िकली बिलकुल फिट होने के बाद ही ध्यान का अभ्यास मुमकिन हो पता है। इमोशनल स्थिरता और एकीकृत पर्सनालिटी लाने में ध्यान बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी भी चीज में एक बेहतर फोकस बनाये रखने के लिए किसी भी व्यक्ति का ध्यान करना बेहद ज़रूरी है। इसे लगातार प्रैक्टिस करने से मानसिक स्तिथि में भी सुधार देखने को मिलेगा।