Kids Virtual World: सोशल नेटवॄकग साइट्स के जाल में सिर्फ बड़े ही नहीं बच्चे भी फंसते जा रहे हैं, जिसका परिणाम यह है कि बच्चे धीरे-धीरे वर्चुअल दुनिया में ज़्यादा व्यस्त रहने की वजह से वास्तविक दुनिया से दूर होते जा रहे हैं।
काफी दिनों से शिवांगी देख रही थी कि उसकी 12 साल की बेटी स्नेहा का स्कूल परफॉर्मंेस लगातार घटता जा रहा था। इस विषय में जब शिवांगी ने डॉक्टरों से सलाह ली तो पता चला कि स्नेहा इंटरनेट एडिक्शन का शिकार है, जिससे उसका स्कूल परफॉर्मंेस दिन-प्रतिदिन घटता जा रहा था। इस बारे में मनोचिकित्सक प्रांजलि मल्होत्रा कहती हैं कि आज देश ही नहीं, दुनियाभर में इंटरनेट की लत एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। खासकर बच्चेि कशोर इसकी गिरफ्त में सबसे ज्यादा हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया की इस लत से बच्चों को कैसे बचाया जा सकता है, आइए जानते हैं।
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कैसे बचाएं बच्चों को इंटरनेट एडिक्शन से
अगर आपका बच्चा घंटों ऑनलाइन गेम, नेट सॄफग या सोशल साइट्स पर समय बिताने लगे, इंटरनेट नहीं मिले तो बेचैन या अवसाद से ग्रस्त हो जाए या फिर यहां तक कि झूठ बोलने लगे और जल्द ही नकारात्मक हो जाए तो समझ जाएं कि आपका बच्चा इंटरनेट एडिक्शन का शिकार हैं। उसको इससे बाहर निकालने के लिए इन बातों को आजमाएं-
बातचीत करें

यह बात सच है कि ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा देने में इंटरनेंट की अहम भूमिका रही है। लेकिन जब वर्चुअलबातचीत अधिक होने लगे, पढ़ाई का समय व्हाट्सऐप या फेसबुक पर चैटिंग करने में
बीतने लगे, तो इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप बच्चे से बात करें। उनसे उनकी मन की बातें साझा करें। शौक विकसित करें कई बार बच्चे अपना स्ट्रेस या अकेलापन दूर करने के लिए सोशल साइट्स पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसे में आपको उन कार्यों की पहचान करनी चाहिए, जिनमें उसे सुकून और खुशी मिलती हो। अगर कोई शौक है, तो उसे निखारने का जतन करें। इसके लिए आप उनके दोस्तों की मदद ले सकते हैं।
प्राथमिकता तय करें
बच्चा जब भी ऑनलाइन जाएं, तो समय का पूरा ध्यान रखें और चेक करें कि वह दिन में कितनी बार ऑनलाइन चैटिंग, कर रहा है। अगर आपको लगे कि इससे उसकी बाकी जरूरी गतिविधियों व दिनचर्या पर असर पड़ रहा है, तो सावधान हो जाएं और ऑनलाइन जाने से पहले टाइमर सेट कर लें।
पूरा समय दें
बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी को वर्चुअल मीडिया और स्मार्टफोन ने काफी हद तक प्रभावित किया है, जिससे आउटडोर गेम्स कम होते जा रहे हैं। जिसका परिणाम यह है कि बच्चों का अकेलापन बढ़ता जा रहा है। ऐसा ना हो इसके लिए अभिभावक को चाहिए कि वो बच्चे को पूरा समय दें और उनकी जिंदगी को समझें।
गेम्स खेलें
अगर बच्चा गैजेट्स की जिद करे तो उसे खुश करने की बजाय उसकी भलाई के बारे में सोचें। उसे उपयोगी गेम्स जैसे- स्क्रैबल, चेस, सुडोकू खेलने के लिए दें, इतना ही नहीं उसे अपना पूरा समय दें और इन गेम्स को उसके साथ बैठकर खेलें।
वॉचडॉग बनें
अपने बच्चे के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ध्यान बनाए रखें कि वो किस तरह के ग्रुह्रश्वस में सक्रिय है और उनकी दोस्ती कैसे लोगों से है। ये सब करने से पहले इस बातका जरूरी ध्यान रखें कि इस बारे में उनको पता ना चलें।
प्यार से समझाएं
किशोरावस्था बहुत नाजुक उम्र होती है। इसमें अगर थोड़ी सी भी दरार आपके और आपके बच्चे के बीच में पड़ी तो बच्चे का भविष्य खतरे में पड़ सकता है अगर आपका बच्चा सोशल मीडिया पर गलत संगत में फंस गया है तो उसे समझने की कोशिश करें और उससे ह्रश्वयार से बातचीत करें।
फ्रेंड्स लिस्ट में हो शामिल
सोशल मीडिया में उनकी फ्रेंडलिस्ट में आप भी शामिल हो सकते है। उन्हें ये यकीन दिलाएं कि आप उनकी वॉल पर कभीं कोई निगेटिव कमेंट नहीं करेंगे जिससे वो निराश हो, लेकिन उन्हें यह जरूर बताएं कि फ्रेंडलिस्ट में आपका होना क्यों जरूरी है।
हिस्ट्री चेक करें
बच्चा किस तरह की साइट देख रहा है, इस पर नजर रखना आपके लिए जरूरी है। इसलिए उनकी ब्राउजिंग साइट्स पर नियंत्रण रखें। जब वह नेट का इस्तेमाल कर लें तो आप हिस्ट्री में जाकर चेक करें कि बच्चा किस तरह की साइटस देख रहा था।
