Summary: टीनएजर को सही जानकारी दे
किशोरावस्था में बढ़ती यौन जिज्ञासा सामान्य है, पेरेंट्स खुली बातचीत और सही शिक्षा देकर बच्चों को सही राह दिखाएँ।
Teenage Sexual Curiosity: किशोरावस्था में बच्चों के अंदर जिज्ञासाओं का बढ़ना सामान्य है और आम बात है। किशोरावस्था, इस उम्र में बच्चे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक कई तरह के बदलाव से गुजरते हैं। इन बदलावों का मुख्य कारण इस उम्र में होने वाले हार्मोनल बदलाव है जो बच्चों के अंदर स्वाभाविक रूप से विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण, प्रेम और सेक्स की जिज्ञासा को बढ़ाते हैं। आईए जानते हैं इस लेख में अगर बच्चों की इस तरह के जिज्ञासाएं अनियंत्रित होने लगे इसका असर उनके जीवनशैली पर पड़ने लगे तो माता-पिता किस तरह उनकी मदद करें।
टीनएज में आकर्षण और यौन जिज्ञासा बढ़ने का करण

हार्मोनल बदलाव: टीनएज में बच्चों के अंदर टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन सक्रिय होते हैं जो कि बच्चों में दूसरों के प्रति शारीरिक आकर्षण और यौन इच्छाओं को जन्म देते हैं।
शारीरिक बदलाव: टीनएज के दौरान बच्चों के अंदर शारीरिक बदलाव शुरू हो जाते हैं शरीर का बदलता आकार बच्चों को अपने प्रति ज्यादा जागरूक बनता है।
दोस्तों का असर: अक्सर बच्चे स्कूल में या बाहर अपने दोस्तों के अनुभवों से खुद की तुलना करके खुद को समझने की कोशिश करते हैं।
मीडिया और इंटरनेट का प्रभाव: वर्तमान समय में मीडिया और इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध एडल्ट कंटेंट बच्चों को जल्दी उत्तेजित कर देते हैं।
सही जानकारी का अभाव: स्कूल और परिवार में अगर बच्चों को सही जानकारी न दी जाए तो बच्चा इधर-उधर से उसे जानने की कोशिश करता है जो की नुकसानदायक है।
टीनएज में बच्चों की बढ़ती यौन इच्छाएं और उसके नकारात्मक प्रभाव को पेरेंट्स कैसे हैंडल करें आइए जानते हैं।
बच्चों की भावनाओं को स्वीकार करें
किशोरावस्था के दौरान बच्चों में आकर्षण, प्रेम की भावना या यौन इच्छा का होना स्वाभाविक है। इस तरह की जिज्ञासा का होना उनके शरीर का स्वाभाविक विकास दिखता है इस बात को माता-पिता समझे।
अगर आपका बच्चा अपनी इन इच्छाओं के बारे में बात करता है या आप उसे किसी तरह के एडल्ट कंटेंट के साथ देखते हैं तो उस पर गुस्सा करने या उसे शर्मिंदा महसूस करवाने की बजाय उससे शांत भाव से बात करें। उन्हें गलत दिशा में अपनी जिज्ञासा को जाने से रोकने के लिए सही सलाह दे।
बच्चों से खुलकर बात करें
बच्चों से सामान्य बातचीत की तरह उनके शारीरिक बदलाव, रिश्तों पर उनकी समझ और दूसरों की तरफ उनके आकर्षण पर बात करें।
टीनएजर, इतने समझदार होते हैं कि आप उनके सवालों का जवाब वैज्ञानिक तर्कों पर दे सकते हैं।
बच्चों से बात करते हुए सकारात्मक भाषा का प्रयोग करें। उनसे कहे, तुम्हारी जिज्ञासाएं सामान्य है पर इसके लिए अभी सही समय नहीं है। यह समय तुम्हारे पढ़ाई और भविष्य के विकास के लिए है इसका उपयोग अपने भविष्य को बनाने के लिए करो।
सेक्स एजुकेशन पर बात करें
बच्चों को सुरक्षित यौन व्यवहार के बारे में बताएं। उन्हें समझाएं सेक्स में पार्टनर की सहमति तथा प्राइवेसी दोनों का होना बेहद जरूरी है।
सेक्स के दौरान वह किस तरह यौन संक्रमण और अनचाही प्रेगनेंसी से बच सकते हैं इसकी जानकारी देना भी सेक्स एजुकेशन के अंतर्गत शामिल हो है।
डिजिटल गाइडेंस और भावनात्मक सहारा दे
डिजिटल गाइडेंस: बच्चों को अपने बेडरूम में फोन या लैपटॉप ना रखने की सलाह दे। देर रात तक फोन देखने या सोशल मीडिया चलाने से रोके।
पेरेंट्स बच्चों के फोन पर कंटेंट फिल्टर का उपयोग करें
भावनात्मक सहारा दें: बच्चों की भावनाओं को अनदेखा या मजाक ना उड़ाए। उन्हें रिलेशनशिप और फिजिकल इंटिमेसी का अंतर समझाएं। उन्हें समझाएं इस उम्र में उनकी प्राथमिकता पढ़ाई करना और अपना भविष्य बनाना है।
