Diabetes in Kids: डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जो कभी-कभी बचपन से शुरू हो जाती है। ये 2-3 साल के बच्चे को भी हो सकती है। इस उम्र में बच्चे खासकर टाइप-1 डायबिटीज के शिकार होते हैं जिसमें उनका शरीर इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है और इंसुलिन बढ़ाने के लिए आजीवन इंसुलिन उपचार लेना पड़ता है। वहीं 13 वर्ष की उम्र के बाद बच्चों को लाइफस्टाइल संबंधित यानी टाइप-2 डायबिटीज अधिक परेशान कर सकती है। ये डायबिटीज अक्सर खराब डाइट, शारीरिक गतिविधि की कमी और वजन बढ़ने जैसी जीवनशैली से संबंधित होती है। यदि डायबिटीज के शुरूआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए तो इस लाइफलॉन्ग डिजीज को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं बच्चों को होने वाली डायबिटीज के लक्षण और उपचार के बारे में।
बच्चों में डायबिटीज के लक्षण

बच्चों और युवा व्यस्कों में डायबिटीज के संकेत या लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कोई बच्चा कम ऊर्जावान हो सकता है वहीं कुछ बच्चों को जरूरत से ज्यादा भूख लग सकती है। बच्चों में होने वाले इन शारीरिक बदलावों को भूल कर भी न करें नजरअंदाज।
टाइप-1 डायबिटीज के लक्षण
यदि आपका बच्चा टाइप-1 डायबिटीज का शिकार है तो इसके लक्षण कुछ दिनों और हफ्तों के भीतर दिखाई दे सकते हैं।
– बार-बार पेशाब आना
– रात को सोते हुए पेशाब निकल जाना
– पानी पीने के बाद भी प्यास लगना
– सामान्य से अधिक थकान महसूस करना
– शरीर में एनर्जी की कमी
– धुंधला दिखाई देना
– अचानक वजन कम होना
– डिहाइड्रेशन
टाइप-2 डायबिटीज के लक्षण
यदि आपके बच्चे को टाइप-2 डायबिटीज है तो उसके शरीर और बरताव में बदलाव आ सकता है। इस समस्या के लक्षण अक्सर हफ्तों और महीनों में दिखाई दे सकते हैं।
– जरूरत से ज्यादा प्यास लगना
– बार-बार पेशाब आना
– हमेशा ब्लैडर भरा हुआ महसूस होना
– भूख में बदलाव
– इम्यूनिटी कम होना
– बार-बार बिमार होना
– मूड स्विंग्स की समस्या
– हाथ या पैरों में झुनझुनी होना
बच्चों में डायबिटीज के कारण

लाइफस्टाइल: बढ़ते बच्चों में डायबिटीज होने का मुख्य कारण बेढंगी लाइफस्टाइल है। अनहेल्दी और जंक फूड का अत्यधिक सेवन डायबिटीज को बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा दिनभर स्क्रीन के सामने बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि न करना भी डायबिटीज का कारण बन सकता है।
आनुवांशिकता: यदि बच्चे के परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या फिर पेरेंट्स को डायबिटीज है तो बच्चा इस समस्या का शिकार हो सकता है। डायबिटीज एक लाइफलॉन्ग समस्या है जिसके लक्षण उम्र और स्थिति के अनुसार बदल सकते हैं।
संक्रमण: माना जाता है कि टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी के कारण हो सकती है। जिसमें शरीर की इम्यूनिटी वीक हो जाती है और बाहरी संक्रमण इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। इससे शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है जो डायबिटीज को बढ़ावा देती है।
कैसे पाएं बच्चों की डायबिटीज पर काबू
हेल्दी डाइट: डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए बच्चों को हेल्दी डाइट फॉलो करने के लिए प्रोत्साहित करें। जंक और प्रोसेस्ड फूड का कम से कम सेवन करें।
फिजिकल एक्टिविटी: बच्चों को पढ़ाई के साथ फिजिकल एक्टिविटी के लिए भी वक्त निकालना चाहिए। दिन में कम से कम एक घंटा खेलकूद, डांस या वॉक करें। इसके अलावा स्क्रीन टाइम कम करें ताकि आंखों और मानसिक तनाव को कम किया जा सके।
