An angry mother tries talking while teenage daughter refuses to listen
Teenage girls' attraction to older men: Credit: Istock

Summary: बच्चों हर मांग मानना बनाता है जिद्दी

बच्चों की हर मांग पूरी करने से वे जिद्दी, अनुशासनहीन और धैर्यहीन बन जाते हैं, जो भविष्य में समस्याएं पैदा करता है।

Parenting Mistakes: हर माता-पिता की कोशिश होती है वह अपने बच्चों के सारे शौक पूरे करें, उन्हें वह सभी चीज दे जो उनके पॉकेट पर दबाव डालें बिना खरीदी जा सकती है। लेकिन इन सब के बीच माता-पिता भूल जाते हैं कि बच्चे की हर मांग पूरी करना उन्हें जिद्दी और अनुशासनहीन बना सकता है। बच्चे की हर मांग के लिए माता-पिता का हां कहना बच्चों को यह सिखा देता है कि वह जब चाहे जो मांग सकते हैं उसके लिए मेहनत की नहीं बस जिद्द की जरूरत है। आइए इस लेख में जानते हैं कैसे बच्चे की हर बात मानना उनको जिद्दी और अनुशासनहीन बनता है।

Parenting Mistakes
The effect of parents saying yes every time on children

जब माता-पिता बच्चों की हर मांग पूरी करते जाते हैं, उसके लिए हां कहते जाते हैं तो वह समझ नहीं पता उसकी कितनी मांग मानी जा सकती है या कितनी चीज बिना मेहनत या धैर्य की पूरी हो सकती है। उसके जीवन में अपनी मांगों को रखने या समझने की सीमाओं का अभाव होता है।

माता-पिता द्वारा लगातार मांगे पूरी होने के कारण बच्चों के अंदर धैर्य या प्रतीक्षा करने के गुण का विकास नहीं हो पता है।

लगातार बच्चों की मांग पूरी होने से बच्चा किसी भी चीज के प्रति जिम्मेदारी की भावना नहीं रखता है, क्योंकि वह नहीं जानता कि किसी चीज को पाने के लिए मेहनत या पैसों की जरूरत होती है।

बच्चों के जिद्द के पीछे मनोवैज्ञानिक करण: अगर माता-पिता बच्चों को हर बार हां कहते हैं तो उसके दिमाग में इस सोच का विकास होता है कि उसकी हर मांग पर माता-पिता को हां ही कहना है। ऐसे में अगर बच्चा किसी से ना सुनता है तो वह अपनी बात मनवाने के लिए गुस्सा दिखाता है, रोता है या जबरदस्ती करने की कोशिश करता है।

बच्चों की जिद्द के आगे झुकना: अगर माता-पिता के मना करने पर बच्चा जिद्द करता है, रोता है, गुस्सा दिखाता है ऐसे में अगर माता-पिता उसे शांत करवाने के लिए उसकी बात मान लेते हैं तो बच्चे की समझ में आ जाता है कि वह जिद्द करके अपनी बात मनवा सकता है।

नियमों की अनदेखी पर समर्थन: अगर माता-पिता घर में, स्कूल में या समाज में बच्चों के गुस्से या जिद्द को सही ठहराते हैं और उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने की प्राथमिकता देते हैं तो बच्चा नियमों के प्रति अनदेखी करता है जो कि बच्चों को अनुशासनहीन बनता है। बच्चे की हर बात मानने पर बच्चों के अंदर खुद को सही और दूसरों को गलत समझने वाले नजरिए का विकास होता है।

आत्मनियंत्रण की कमी: अगर माता-पिता बच्चों की सारी बात मानते हैं तो बच्चे में आत्मनियंत्रण की कमी आती है। बच्चा अपने मन के अनुसार न होने पर हो जाता है, उसके अंदर नकारात्मक भावना का विकास होता है।

माता-पिता द्वारा बच्चों को ना कहना वर्तमान में थोड़ा दुखी जरूर कर सकता है पर उनके भविष्य के निर्माण में बहुत मददगार साबित होता है। पेरेंट्स द्वारा बच्चों को ना कहना उन्हें यह समझने का एक तरीका हो सकता है कि हर चीज तुरंत नहीं मिल सकती, कुछ चीजों के लिए उन्हें धैर्य के साथ कार्य करने की भी जरूरत होती है। इस तरह का अनुभव आपके बच्चे को भविष्य में होने वाले अनुभवों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं।

बच्चों को ना कहने का तरीका: बच्चे से गुस्से में या चिढ़कर ‘ना’ ना कहें, बल्कि शांत भाव से स्पष्ट शब्दों में ना कहें। बच्चे को हमेशा विकल्प दें, ताकि बच्चे के जिद्द को संभालना आपके लिए आसान हो। उन्हें सीधे ना कहने की बजाय कहें की आपके इस काम के बाद यह बात मानी जाएगी।

आपका वर्तमान में कहा गया ना भविष्य में उनके मानसिक विकास में मददगार साबित होगा।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...