Kids Mental Health: छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना, चिड़चिड़ाना और अपनी बात मनवाने के लिए जिद्द करना… ये सभी टेंट्रम आजकल के बच्चों में आसानी से देखे जा सकते हैं। बच्चों के बदलते व्यवहार का कारण एक ऐसी चीज है जिसके बिना रहना शायद नामुमकिन है। जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं मोबाइल या स्क्रीन की। मोबाइल अब केवल जरूरत का साधन मात्र नहीं है बल्कि एक लत बन गया है, जिसके बिना जिंदगी शायद मुश्किल हो सकती है। आजकल बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी मोबाइल एडिक्शन का शिकार अधिक हो रहे हैं। आपको बता दें कि मोबाइल की मूविंग स्क्रीन एडिक्टिव होती है जो व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करती है। खासकर बच्चे मोबाइल फोन देखना अधिक पसंद करते हैं। मोबाइल या स्क्रीन की लत के कारण बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है और वह कई प्रकार की मानसिक समस्याओं का शिकार बन जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में बच्चों का तनाव और एंग्जाइटी लेवल भी काफी बढ़ा है जिसकी वजह से उनमें ऑटिज्म जैसे गंभीर लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। यदि बच्चा मोबाइल पर इन चीजों को लगातार स्क्रॉल करता है तो समझिए वह एंग्जाइटी का शिकार हो रहा है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।
डूमस्क्रॉलिंग

बच्चों को मोबाइल चलाना या उसके साथ समय बिताना बेहद पसंद है। ऐसे में वह मोबाइल पर किसी भी टॉपिक को सर्च करके देखने लगते हैं। कई बार बच्चे डूमस्क्रॉलिंग करने लगते हैं यानी बच्चे नकारात्मक खबरों को पढ़ने में अधिक समय बिताने लगते हैं। ये नकारात्मक खबरें बच्चों के दिलो-दिमाग पर असर डालती हैं और वह तनाव व एंग्जाइटी का शिकार हो जाते हैं।
डूम सर्चिंग
यदि बच्चा फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म पर क्राइसिस, ट्रेजेडी और दुखभरे कीवर्ड्स को सर्च करता है तो वह एंग्जाइटी का शिकार हो सकता है। तनाव व एंग्जाइटी में बच्चे खुद को दुखी और दुनिया से अलग मानने लगते हैं जिसकी वजह से वह केवल डूम सर्चिंग करते हैं। हालांकि छोटे बच्चे इन टॉपिक्स से दूर रहते हैं लेकिन टीनेर्ज में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें मोबाइल से दूर रखने में ही भलाई है।
मोबाइल से न बनाएं दूरी

जो लोग मोबाइल की वजह से एंग्जाइटी का शिकार होते हैं वह मोबाइल से दूरी नहीं बना पाते। वह एक्सरसाइज करते वक्त, खाना खाते वक्त और सोते वक्त भी मोबाइल को अपने करीब रखते हैं। आप ऐसे लोगों के हाथ में हमेशा मोबाइल देख सकते हैं। कई बार बच्चे भी मोबाइल के बिना खाना नहीं खाते या पढ़ाई करने नहीं बैठते। ये लक्षण एंग्जाइटी की ओर इशारा करते हैं।
मैसेज का इंतजार
जिन लोगों को मोबाइल की लत होती है वह मैसेजेस आने का इंतजार करते हैं। यदि किसी व्यक्ति ने उन्हें मैसेज किया है तो वह तुरंत रिप्लाई करना पसंद करते हैं। वहीं यदि कोई मैसेज का तुरंत रिप्लाई नहीं देता तो वह परेशान हो जाते हैं और उन्हें भलाबुरा कह सकते हैं। खासकर यंगस्टर्स अपने ग्रुप व दोस्तों को तुरंत रिप्लाई देते हैं। वह एक मिनट भी बिना फोन के नहीं रह सकते।
