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Parenting Tips: माता-पिता बनने के बाद आपको इतना तो जरूर समझ में आ गया होगा कि एक परफेक्‍ट और अच्छी पैरेंटिंग की कोई भी परिभाषा आज तक नहीं आई है। हमारा पैरेंटिंग का तरीका खुद हमें सिखाता है। जिस प्रकार हम खुद से आगे बढ़ना,जिंदगी की परेशानियों का सामना करना, टूटना, रोना ,बिखरना और फिर से पूरे उत्साह के साथ खड़े हो जाना सीखते हैं। उसी तरह से हम मां बाप बनने के बाद बच्चे को सिखाना चाहते हैं क्योंकि इसी का नाम जिंदगी है।  

बच्चे अपनी सारी बातें माता-पिता से एक उम्र तक ही साझा कर पाते हैं। लेकिन जब वह किशोरावस्था में कदम रखते हैं तो  इतना खुलकर हर बार साझा नहीं करना चाहते। उनको अपने दोस्तों से बात करना ज्यादा अच्छा लगता है। ऐसे में लगभग सभी माता-पिता चिंतित हो जाते हैं। उनको लगता है कि बच्चा किसी गलत रहा ना पकड़ ले ।इसलिए वह छोटी-छोटी बात पर सवाल जवाब करने लगते हैं। बच्चा उनकी भावना को बिना समझे नाराज हो जाता है ।उसको यह हर समय की टोका टाकी उचित नहीं लगती। ऐसे में एक महीन रेखा दोनों के रिश्तो में दरमियां आ जाती है।इस रिश्ते में जरा सी भी दरार उचित नहीं । जरूरी है कि पूरी समझदारी के साथ आपसी रिश्तो में सेतु का काम करना । कुछ बातें बिना सख्ती बरते भी ठीक की जा सकती है।

एक परिवार में जितना जरूरी बड़े लोग हैं उतना ही जरूरी बच्चे भी । इसलिए बच्चों की बात सुनना और मानना आवश्यक होता है। बच्चों में किशोरावस्था में मूड स्विंग होने के कारण और मां बाप के बीच में जेनरेशन गैप होने की वजह से मां बाप बच्चों को अच्छे से नहीं समझ पाते हैं। उन्हें हर समय डांटते रहते हैं और इसी वजह से बच्चे खुद को बाधित महसूस करते हैं। वह अपने मां बाप से सारे मोह को ही खो देते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसी टिप्स बताने वाले हैं जिनके माध्यम से आप अपने बच्चों के साथ दुबारा से बहुत प्यार और खूबसूरत रिश्ता बना पाएंगे और आपके बच्चे आपको फिर से वही प्यार और इज्जत देने लगेंगे जो वह पहले देते थे।

आइए जानते हैं बच्चों को मां बाप के रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए मां बाप को क्या क्या टिप्स अपनानी चाहिए।

उनकी भी बातें सुनें:

अगर आप अपने बच्चों को हमेशा इग्नोर कर देते हैं या उन्हें कोई महत्त्व नहीं देते हैं तो बच्चों को बहुत फालतू और बुरा महसूस होता है और वह आगे से आपको कुछ न बताने की ही सोच लेते हैं इसलिए उन्हें थोड़ा आवश्यक महसूस करवाने के लिए उनकी बातें भी सुनें और अगर कोई आवश्यक फैंसला लेना है तो उनके विचारों के बारे में भी एक बार जरूर गौर करें।

उन्हें सशक्त बनाएं :

अपने बच्चों को पैरों पर खड़ा करने के लिए बचपन से ही उन्हें प्रैक्टिस करवाएं। उन्हें शुरू से ही थोड़े थोड़े और छोटे छोटे निर्णय खुद लेने दें और अगर वह किसी मुसीबत में फंस जाते हैं तो उन्हें उसमें से खुद निकलना सिखाए।  अगर वह 18 साल के हो जाते हैं तो उन्हें अधिक बंधन पसंद नहीं आते हैं इसलिए अगर वह अपने निर्णय खुद लेना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए प्रेरित करें।

उनके बारे में कुछ प्रश्न पूछें:

अगर आपके बच्चे आपके सामने कोई नई चीज पेश करते हैं या फिर वह अपनी कोई बात बताने आते हैं तो उनमें आपको अपनी रुचि दिखानी है न कि उसे केवल टालना है। यह रुचि दिखाने के लिए आपको उनसे थोड़े बहुत प्रश्न पूछ लेने चाहिए ताकि उनके मन में आपके लिए जगह और अधिक बढ़ जाए।

उन्हें गलतियां करने का भी मौका दे :

कोई भी व्यक्ति परफेक्ट नहीं हो सकता है और बच्चे भी इसी कैटेगरी में आते हैं। हम अपनी गलतियों से ही सीखते हैं और अगर आपके बच्चे ने कोई गलती कर दी है तो इस गलती को उनके लिए एक सीख बनाने का प्रयास करें। न कि इस पर डांट फटकार लगा कर उन्हें अधिक डरा दें। अगर आप उन्हें गलतियां करने से रोकते हैं तो वह आपके आगे गलतियां करके बातें छुपानी शुरू कर देंगे।

उन्हें गाइड करें, कंट्रोल नहीं :

टीनएज एक ऐसी अवस्था होती है जहां हर किसी को अपने परिवार से स्वतंत्रता चाहिए होती है। इस उम्र में आपको अपने बच्चों को हर बात के लिए रोकना या बंधन में नहीं रखना होता है। वह आपसे अगर कोई चीज पूछते हैं तो आपको इस बारे में उन्हें गाइड कर देना चाहिए कि इसे करने या न करने के क्या क्या परिणाम हो सकते हैं। अगर आप बच्चे को किसी चीज से रोकेंगे या नियंत्रण में करना चाहेंगे तो वह और अधिक बिगड़ेंगे और छिपके से उस काम को करेंगे।

प्यार का अहसास कराते रहें:

यदि आपको लगता है कि हर बार आप डांट डपट कर अपनी बात मनवा लेंगे तो आप गलत हैं। आज के समय में बच्चा डांट से नहीं बल्कि प्यार से समझना चाहता है। कोशिश करें कि बच्चे को प्यार से समझाएं। तभी आप उसे सुधार सकते हैं।

तो यह थे कुछ टिप्स जो अपने बच्चे का बेस्ट फ्रेंड बनने के लिए माता पिता को ट्राई करने चाहिए।

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