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दुनियाभर में हर साल हजारों लाखों दिलेर लोग इस चुनौती को दिल से स्वीकार करते हैं और इनकी चोटी पर पहुंचकर गर्व अनुभव करते हैं। ऐसे ही हिम्मतवाले और जिंदादिल लोगों को समर्पित है नेशनल माउंटेन क्लाइंबिंग डे।

National Mountain Climbing Day: पर्वतों की ऊंचाइयों को चुनौती देना और उन्हें पार करना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन दुनियाभर में हर साल हजारों लाखों दिलेर लोग इस चुनौती को दिल से स्वीकार करते हैं और इनकी चोटी पर पहुंचकर गर्व अनुभव करते हैं। ऐसे ही हिम्मतवाले और जिंदादिल लोगों को समर्पित है नेशनल माउंटेन क्लाइंबिंग डे। हर साल यह खास दिन 1 अगस्त को मनाया जाता है। पर्वतारोहियों के लिए यह दिन किसी उत्सव से कम नहीें होता। भारत में भी ऐसे कई विशाल पर्वत हैं, जिनकी ऊंचाइयां पर्वतारोहियों को आकर्षित करती हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही पर्वतों के बारे में जो बेस्ट ट्रेक माने जाते हैं—

नेशनल माउंटेन क्लाइंबिंग डे की शुरुआत साल 2015 से हुई है। यह खास दिन दो दिलेर पर्वतारोहियों बॉबी मैथ्यूज और जोश मैडिगन के सम्मान में मनाया जाता है। दरअसल, इन दोनों पर्वतारोहियों ने न्यूयॉर्क के एडिरोंडैक पर्वत की सभी 46 चोटियों पर सफलतापूर्वक माउंटेन क्लाइंबिंग की थी। इस पर्वत श्रृंखला की आखिरी चोटी व्हाइट फेस पर वे 1 अगस्त, 2015 को पहुंचे थे। तभी से हर साल इस दिन नेशनल माउंटेन क्लाइंबिंग डे सेलिब्रेट किया जाने लगा। हालांकि इससे पहले भी 1 अगस्त पर्वतारोहियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती थी, क्योंकि 1 अगस्त, 1898 में व्योमिंग में ग्रैंड टेटन पर पहली बार सफलतापूर्वक माउंटेन क्लाइंबिंग की गई थी। ऐसे में इन  दोनों ही घटनाओं के सम्मान में इस दिन यह खास दिन सेलिब्रेट किया जाता है।  

ऊंचाई: 12,500 फ़ीट

अगर आप पहली बार माउंटेन क्लाइंबिंग क्लब में शामिल होने जा रहे हैं तो केदारकांठा आपके लिए बेस्ट ट्रेक हो सकता है। यह उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय की एक चोटी है। इस ट्रेक पर सर्दियों के समय जाना बेस्ट है। बर्फ की चादर में लिपटा केदारकांठा ट्रेक आपका दिल जीत लेगा। यह गोविंद वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के अंतर्गत आता है। यह ट्रेक जौनसार-बावर क्षेत्र के सांकरी गांव से शुरू होता है।

ऊंचाई: 12,000 फीट

एक ही ट्रेक पर दो शानदार अनुभव करने हैं तो चंद्रशिला आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। प्रकृति से चारों ओर से घिरे इस ट्रेक की सबसे ऊंची चोटी पर देश का सबसे ऊंचा शिव मंदिर तुंगनाथ स्थित है। इस खूबसूरत ट्रेक की शुरुआत चोपता घाटी से होती है। तुंगनाथ मंदिर और चंद्रशिला से जुड़ी कई किवदंतियां आपको यहां बताई जाएंगी, जो आपको रोमांच से भर देंगी।  

ऊंचाई: 16,400 फीट

अगर आप भगवान शिव के भक्त हैं और उनका अलौकिक अनुभव करना चाहते हैं, साथ ही पर्वतारोहण का शौक भी रखते हैं तो श्रीखंड महादेव शिखर का ट्रेक बेस्ट है। यहां से आपको शिव के निवास स्थान कैलाश का मनोरम दृश्य नजर आएगा। खास बात ये है कि इस ट्रेक पर आपको अमरनाथ और केदारनाथ की तरह पालकी, घोड़े या पिट्ठू नहीं मिलते। यहां आपको ट्रेकिंग करके ही पहुंचना होता है। यही कारण है कि माउंटेन क्लाइंबिंग के शौकीन यहां आना पसंद करते हैं।

ऊंचाई: 17,220 फीट

माउंट शितिधर को शितिधाट भी कहा जाता है, जिसका मतलब है सफेद चोटियां। यह ट्रेक आमतौर पर सालभर बर्फ से ढका रहता है। यह कुल्लू जिले में स्थित विशाल पीर पंजाल रेंज में स्थित है। यह ट्रेक जितना सुंदर है, उतना ही मुश्किल भी। यहां आपको ब्यास कुंड के साथ ही कई खूबसूरत नजरे नजर आएंगे।  यह ट्रेक पार करने में आपको सात से आठ दिन लग सकते हैं।

ऊंचाई: 18,450 फीट

एक ही ट्रेक में बर्फ, जंगल, रेत, चट्टानें, घास के मैदान देखना चाहते हैं तो माउंट भनोटी एक अच्छा विकल्प है। यह कुमाऊं हिमालय रेंज में स्थित है। इस ट्रेक को देखकर आपको नेचर से प्यार हो जाएगा। हालांकि यह एक मुश्किल ट्रेक है और इसपर जाने से पहले आपको अनुभव होना जरूरी है।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...