किसके अवतार हैं नृसिंह भगवान? क्यों मनाई जाती है नृसिंह द्वादशी, जानें महत्व: Narasimha Dwadashi 2023
Narasimha Dwadashi 2023 Importance

Narasimha Dwadashi 2023: हर वर्ष फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को नृसिंह द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। नृसिंह को भगवान विष्णु का पांचवां अवतार माना गया है। इसलिए इस दिन भगवान नृसिंह की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। नृसिंह द्वादशी को गोविंद द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन नृसिंह भगवान की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में सुख—समृद्धि आती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। नृसिंह द्वादशी को लेकर वेद व पुराणों में उल्लेख मिलता है। पुराणों में नृसिंह द्वादशी का महत्व व पूजा विधि भी बताई गई है। तो चलिए पंडित इंद्रमणि घनस्याल से जानते हैं। नृसिंह भगवान को समर्पित नृसिंह द्वादशी का महत्व व पूजा विधि क्या है।

कब है नृसिंह द्वादशी 2023?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार फाल्गुन माह की द्वादशी तिथि 3 मार्च सुबह 9 बजकर 11 मिनट पर प्रारंभ होगी, जो 4 मार्च सुबह 11 बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में इस बार 3 मार्च 2023 को नृसिंह द्वादशी मनाई जाएगी। इस दिन दो शुभ योग भी बन रहे हैं। 3 मार्च को 6 बजकर 34 मिनट से दोपहर 3 बजकर 43 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग, जबकि सूर्योदय से शाम 6 बजकर 44 मिनट पर सौभाग्य योग रहेगा। इसलिए इस दिन भगवान नृसिंह की पूजा अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी।

क्यों मनाई जाती है नृसिंह द्वादशी?

Narasimha Dwadashi 2023
Narasimha Dwadashi 2023

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, नृसिंह को भगवान विष्णु का पांचवां अवतार माना गया है। फाल्गुन माह की द्वादशी को भगवान विष्णु नृसिंह अवतार में एक खंभे को चीरते हुए प्रकट हुए थे। भगवान नृसिंह का आधा शरीर मनुष्य तो आधा शरीर शेर का है। कहते हैं कि असुरों के राजा हिरण्यकशिप का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह का अवतार लिया था। तब से यह पर्व के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि नृसिंह द्वादशी का व्रत रखने से ब्रह्महत्या का पाप समाप्त हो जाता है। इसके अलावा नृसिंह द्वादशी के व्रत से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। नृसिंह द्वादशी पर भगवान नृसिंह की पूजा करने से सात जन्मों के पाप खत्म हो जाते हैं और जीवन में सुख—समृद्धि का आगमन होता है।

नृसिंह द्वादशी पूजा विधि

Narasimha Dwadashi Puja
Narasimha Dwadashi Puja Vidhi

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नृसिंह द्वादशी पर भगवान नृसिंह के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा करनी चाहिए। इस दिन घर में शंखनाद का विशेष महत्व होता है। इसलिए नृसिंह द्वादशी पर घर में शंखनाद जरूर करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, माला, चंदन, तिल आदि अर्पित करें और इसके पश्चात विष्णु भगवान की आरती के साथ पूजा संपन्न करें।

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