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Ram, Lakshman and Sita

Overview:

रामायण की मुख्य कहानी से सभी परिचित हैं, लेकिन आज भी इसकी ऐसी कई कहानियां और प्रसंग हैं, जिनसे लोग अनजान हैं। या जिनके बारे में लोग बहुत ही कम जानते हैं। ऐसा ही एक प्रसंग है माता ​सीता और रावण की बहन शूर्पणखा का।

Mata Sita and Surpanakha Story: रामायण और महाभारत दोनों ही हिंदू धर्म के महाकाव्य हैं, जो सदियों बाद भी हमें जीवन से जुड़ी शिक्षाएं और सीख दे रहे हैं। रामायण की मुख्य कहानी से सभी परिचित हैं, लेकिन आज भी इसकी ऐसी कई कहानियां और प्रसंग हैं, जिनसे लोग अनजान हैं। या जिनके बारे में लोग बहुत ही कम जानते हैं। ऐसा ही एक प्रसंग है माता ​सीता और रावण की बहन शूर्पणखा का। यह प्रसंग इतना सुंदर और तार्किक है कि आज भी प्रासंगिक है। यह प्रसंग सभी को प्रेम का असली मतलब बताता है।

इस घटना से जुड़ा है प्रसंग

श्री राम और रावण युद्ध होने में शूर्पणखा भी एक बड़ा कारण थी।
Shurpanakha was also a big reason for the war between Shri Ram and Ravana.

श्री राम और रावण युद्ध होने में शूर्पणखा भी एक बड़ा कारण थी। शूर्पणखा रावण की इकलौती बहन थी। इसी बहन की नाक काटे जाने पर रावण ने माता सीता का हरण किया था। जिसके बाद श्रीराम ने रावण वध किया और लंका विजय की। कथाओं के अनुसार रावण वध के बाद भी शूर्पणखा माता सीता से मिली थी। जब अयोध्या में एक धोबी ने माता सीता के चरित्र पर आरोप लगाए तो श्री राम ने अपनी पत्नी सीता को त्याग दिया। तब माता सीता एक बार फिर से वनवास पर चली गईं। यहां उन्होंने ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में आश्रय लिया।

माता सीता से मिलने पहुंची शूर्पणखा

कथा के अनुसार जब शूर्पणखा को इस बात की जानकारी हुई तो वो माता सीता के मिलने के लिए आश्रम में जा पहुंची। यहां शूर्पणखा अपनी गलतियों की माफी मांगने नहीं, बल्कि माता सीता को उकसाने, भड़काने और उनका उपहास उड़ाने के उद्देश्य से पहुंची थी। रावण की बहन ने माता सीता से कहा कि तुम्हें राम और लक्ष्मण के कर्मों की सजा मिल रही है, क्योंकि उन्होंने मेरे साथ अन्याय किया है। हालांकि माता ने शांत मन से उसकी बात सुनी और मुस्कुराई। जिस पर शूर्पणखा विचलित हो गई। मां सीता ने उससे कहा कि इसी प्रतिशोध के कारण रावण का अंत हुआ है, अब तुम्हें भी इससे सीख लेनी चाहिए। अतीत को भूलकर आगे बढ़ो। क्योंकि बिना किसी स्वार्थ के किया गया प्यार ही सच्चा होता है। इसके बाद माता सीता ने शूर्पणखा को बेर दिए और कहा कि ये बेर भी मंदोदरी के बगीचे में लगे बेरों जितने ही मीठे हैं।

विचलित शूर्पणखा को किया शांत

इस दौरान शूर्पणखा माता का धैर्य और शांत स्वभाव देखकर विचलित हो गई। उसकी पीड़ा समझ माता सीता ने कहा कि मैं लोगों से कब तक प्रेम के बदले प्रेम और सम्मान के बदले सम्मान पाने की उम्मीद करूं? इसलिए बेहतर यह है कि अपने अंदर ऐसी शक्ति जगाओ कि जो तुम्हें प्यार न भी करें, तो भी तुम उसे प्यार कर सको। हमें दूसरों की गलतियां देखने और फिर उन्हें सजा देने के बारे में नहीं सोचना चाहिए। क्योंकि अपने कर्मों को फल सभी को मिल जाता है।

पुरानी बातें भूलने की सीख

शूर्पणखा को शांत करते हुए माता सीता ने उन्हें एक ऐसी सीख दी जो आज भी हम सभी के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि जीवन में पुरानी बातों को भुलाकर आगे बढ़ना ही सबसे उचित आचरण है। खुद को पीड़ित न बनाएं। अपने मन से सारी बातें निकाल दें। क्योंकि बदले की आग आपको सिर्फ रावण जैसा ही बना सकती है, जिससे आपका अंत निश्चित है। इस धरती पर लोग आते जाते रहते हैं। लेकिन हमें सभी से ऊपर उठकर इस धरती मां और प्रकृति का धन्यवाद करना चाहिए और इनका आनंद लेना चाहिए।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...