Japanese Techniques for Focus
Japanese Techniques for Focus

Japanese Techniques for Focus: आज के समय में जब बच्चों का ध्यान मोबाइल, गेम्स और सोशल मीडिया की तरफ ज्यादा होता है, तब पढ़ाई में फोकस करना बहुत मुश्किल हो गया है। लेकिन जापान के बच्चे पढ़ाई में बहुत तेज़ और अनुशासित माने जाते हैं। इसकी एक बड़ी वजह है – जापानी कल्चर में ध्यान और एकाग्रता पर ज़ोर।

जापान में बच्चे सिर्फ रटने की पढ़ाई नहीं करते, बल्कि मन लगाकर समझने वाली पढ़ाई करते हैं। वहां के स्कूल बच्चों को शांत, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाते हैं। उनके कुछ आसान तरीके जैसे ‘शिसा कांको’, ‘नाइकेन’, और ‘मा’, बच्चों को फोकस बनाए रखने में मदद करते हैं।

अगर हमारे बच्चे भी इन आसान जापानी तरीकों को अपनाएं, तो वे भी पढ़ाई में अच्छा कर सकते हैं। ये तरीके दिमाग को शांत रखते हैं और पढ़ाई में रुचि बढ़ाते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही आसान जापानी टिप्स, जो हर स्टूडेंट को ज़रूर अपनाने चाहिए।

शिसा कांको:

बोलकर ध्यान बनाएं – ‘शिसा कांको’ जापान में इस्तेमाल की जाने वाली एक बहुत ही दिलचस्प और असरदार तकनीक है, जिसका मतलब होता है – “इशारा करना और बोलकर दोहराना”। यह तरीका सबसे पहले जापानी रेलवे में शुरू हुआ, जहाँ ट्रेन के ड्राइवर और स्टेशन कर्मचारी किसी भी जरूरी चीज़ (जैसे – सिग्नल, टाइम, गेट की स्थिति) को देखकर उसकी ओर इशारा करते हैं और ज़ोर से बोलते हैं, जैसे – “सिग्नल हरा है”, “गेट बंद है” आदि।

इस तकनीक से क्या फायदा होता है?

जब हम किसी चीज़ को देखते हैं, फिर उसकी ओर इशारा करते हैं, और फिर जोर से बोलते हैं, तो हमारा ब्रेन उस चीज़ को तीन तरीकों से पकड़ता है – देखने से, कहने से और सुनने से। इससे ध्यान और फोकस बहुत तेज़ी से बढ़ता है और गलती की संभावना बहुत कम हो जाती है।

बच्चे इसको कैसे अपनाएं?

बच्चे इस तकनीक को अपनी पढ़ाई में इस तरह इस्तेमाल कर सकते हैं:

  • जब कोई नया चैप्टर शुरू करें, तो ज़ोर से कहें – “अब मैं साइंस पढ़ रहा हूँ”।
  • सवाल हल करते समय बोलें – “अब मैं प्रश्न 5 सॉल्व कर रहा हूँ”।
  • याद करते समय कहें – “अब मैं यह फॉर्मूला याद कर रहा हूँ”।

इससे उनका ध्यान उस काम पर पूरी तरह केंद्रित रहेगा और वे किसी और चीज़ में नहीं उलझेंगे।

नाइकेन:

दिन का छोटा रिव्यू – ‘नाइकेन’ एक बहुत ही पुरानी और प्रभावशाली जापानी आत्मचिंतन (Self-Reflection) की तकनीक है। इस शब्द का मतलब होता है – “अपने भीतर झांकना” यानी अपने दिन, व्यवहार और सोच को शांति से समझना और सुधार की तरफ बढ़ना।

नाइकेन में क्या किया जाता है?

इस तकनीक में दिन के अंत में एक व्यक्ति खुद से 3 सरल लेकिन गहरे सवाल पूछता है:

मैंने आज दूसरों से क्या पाया?

मैंने दूसरों को क्या दिया?

मैंने दूसरों को तकलीफ तो नहीं दी?

इन सवालों के जवाब सोचने से इंसान को अपनी जिम्मेदारी, भावनाओं और व्यवहार को समझने में मदद मिलती है। यह तरीका न सिर्फ ध्यान बढ़ाता है बल्कि इंसान को विनम्र और समझदार भी बनाता है।

बच्चे इसको कैसे अपनाएं?

बच्चे हर रात सोने से पहले 5 मिनट लेकर खुद से ये सवाल पूछें। वे चाहें तो इसे एक डायरी में भी लिख सकते हैं। इससे उन्हें पता चलेगा कि उन्होंने दिन भर क्या अच्छा किया, क्या सुधार करना है और किस बात पर गर्व करना चाहिए।

इचिग्यो-जम्माई

एक जापानी ध्यान तकनीक है, जिसका मतलब होता है – “एक समय में सिर्फ एक काम पर पूरी तरह ध्यान देना”। यह तकनीक जापानी कल्चर में गहराई से जुड़ी है, जहाँ लोग हर काम को शांत दिमाग और पूरे मन से करते हैं – चाहे वह चाय बनाना हो, सफाई करना हो या कुछ सीखना।

इस तकनीक में खास क्या है?

इसमें इंसान एक ही समय में एक ही काम करता है, उस काम में पूरी तरह लीन हो जाता है और बीच में कोई दूसरा ध्यान भटकाने वाला काम नहीं करता। इसका मकसद है – क्वालिटी पर ध्यान देना, न कि एक साथ कई काम करने की कोशिश में सब अधूरा छोड़ देना।

बच्चे इस तकनीक को कैसे अपनाएं?

आज के समय में बच्चे एक साथ कई काम करने की कोशिश करते हैं – पढ़ाई के साथ मोबाइल, टीवी या म्यूजिक। इससे ध्यान भटकता है और याददाश्त कमजोर होती है।

बच्चे इचिग्यो-जम्माई अपनाकर:

हर चैप्टर को ध्यान और समझदारी से पढ़ें।

एक समय में सिर्फ एक विषय पढ़ें।

पढ़ाई करते समय फोन, टीवी से दूरी बनाएं।

काकेइबो:

मन की सफाई लिखकर करें : काकेइबो (Kakeibo)’ जापान में इस्तेमाल होने वाली एक खास तकनीक है, जिसका मतलब होता है – “पैसों और आदतों का लेखा-जोखा”। लेकिन ये सिर्फ पैसे संभालने तक सीमित नहीं है। जापान में इसे मन को शांत करने और सोच साफ करने के तरीके के रूप में भी अपनाया जाता है।

इसमें क्या किया जाता है?

इस तकनीक में लोग रोज़ एक डायरी या नोटबुक में अपने खर्च, जरूरी चीज़ें, इमोशंस और दिन भर की छोटी बातें लिखते हैं। यह अभ्यास दिमाग को हल्का करता है और सोचने में क्लेरिटी लाता है। इसे मन की सफाई भी कहा जा सकता है – जैसे हम कमरे की सफाई करते हैं, वैसे ही ये दिल-दिमाग की सफाई है।

बच्चे इसे कैसे इस्तेमाल करें?

बच्चे इस तकनीक को अपनी पढ़ाई और रोजमर्रा की ज़िंदगी में ऐसे शामिल कर सकते हैं:

  • सुबह पढ़ाई शुरू करने से पहले 5 मिनट के लिए लिखें – “आज मुझे क्या पढ़ना है?”
  • रात को सोने से पहले लिखें – “आज मैंने क्या सीखा?” और “क्या दिक्कत आई?”

वे चाहें तो अपनी फीलिंग्स , टेंशन या अच्छे पल भी डायरी में लिख सकते हैं। इससे दिमाग साफ रहता है और स्ट्रेस कम होता है।

मा: छोटे-छोटे ब्रेक लें

‘मा (Ma)’ एक सुंदर और गहरी जापानी सोच है, जिसका मतलब होता है – “खाली स्थान” या “शांति का पल”। जापान में माना जाता है कि हर काम के बीच थोड़ी खाली जगह या रुकावट होना जरूरी है, ताकि मन और शरीर दोनों को आराम मिल सके।

मा तकनीक क्या सिखाती है?

हम अक्सर बिना रुके लगातार काम करते हैं – पढ़ाई, प्रोजेक्ट, होमवर्क… लेकिन इससे दिमाग थक जाता है और फोकस कम हो जाता है।
‘मा’ सिखाता है कि हर काम के बीच छोटा सा ब्रेक लेना जरूरी है, ताकि एनर्जी वापस आए और मन फिर से फ्रेश हो जाए।

बच्चे इसे कैसे अपनाएं?

लेकिन इस दौरान फोन या टीवी से दूर रहें, ताकि दिमाग सच में शांत हो।

हर 30-40 मिनट की पढ़ाई के बाद 5-10 मिनट का ब्रेक लें।

इस ब्रेक में रिलैक्स लें, थोड़ा टहलें, पानी पिएं या आंखें बंद करें।

मेरा नाम वामिका है, और मैं पिछले पाँच वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर सक्रिय हूं। विशेष रूप से महिला स्वास्थ्य, रिश्तों की जटिलताएं, बच्चों की परवरिश, और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों पर लेखन का अनुभव है। मेरी लेखनी...