Summary:दूसरी प्रेग्नेंसी में पहला बच्चा कैसे संभालें
दूसरी बार प्रेग्नेंसी के दौरान पेरेंट्स को सबसे बड़ी चुनौती होती है—पहले बच्चे को नए बेबी के लिए मेंटली तैयार करना। 4–5 साल का एज डिफरेंस होने पर बड़े बच्चे में गुस्सा, असुरक्षा और इमोशनल लॉस की फीलिंग बढ़ सकती है। इसलिए पेरेंट्स को शुरू से ही बच्चे की भावनाओं को समझकर उसे टाइम देना, शामिल करना और उसकी इमोशनल सिक्योरिटी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
Sibling Bond: एक शादीशुदा कपल को पेरेंट्स बना बहुत अच्छा लगता है लेकिन जब आप दूसरी बार प्रेग्नेंट होती हैं तो आपके लिए खुशी के साथ-साथ एक चुनौती भी खड़ी होती है। चुनौती होती है अपने पहले बच्चे को दूसरे बच्चे के लिए मेंटली रेडी करना। आजकल पेरेंट्स दो बच्चों के बीच में काफी गैप लेने लगे हैं। ऐसे में पहले बच्चे का मेंटल स्टेटस, उसकी इमोशनल सिक्योरिटी भी जरूरी है। तो जानिए कि अगर आपके बच्चों में 4 से 5 साल का एज डिफरेंस है तो आप कैसे अपने पहले बच्चे को मेंटली रेडी करें। ताकि वो खुद को अकेला ना महसूस करें। इसके अलावा वो अपने छोटे बहन भाई के साथ एक अच्छा बॉन्ड स्थापित कर पाए। उनका सिबलिंग बॉन्ड खूबसूरत रहे।
उसे जरुरत है आपकी
कई बार देखा है कि आप कितना भी बच्चे को समझा लें, लेकिन पहला बच्चा छोटे बच्चों से बहुत छोटे-छोटे से मुकाबला करने लगता है वह इरिटेट रहने लगता है, और कई बार गुस्से में यह तक कह देता है कि मुझे तो इसकी कोई जरूरत नहीं है। यह क्यों आया है? ऐसे में आपको समझने की जरूरत है की बात यहां तक पहुंचे ही नहीं। आप शुरुआती लक्षणों को पहचानें अगर वह बात-बात पर गुस्सा होने लगा है, वह आपकी गोद में आने के बहाने ढूंढ रहा है तो उससे बात करिए। सवाल पूछिए कि वह क्या महसूस कर रहा है। उसे सपोर्ट करिए। उसे यह कतई मत बताइए कि वह बड़ा हो चुका है।
वो अहसास नहीं होने दें

उसे यह अहसास मत होने दीजिए कि उसकी गोद छिन चुकी है। अगर आप उसे गोद में नहीं ले पा रही हैं तो कोई बात नहीं आप उसे अपने पास बिठा टाइम दें। उसे खुद को एक्सप्रेस करने दीजिए। अगर वह कहना चाह रहा है कि मम्मा अब आप मेरी मम्मा नहीं रही तो आप उसे गले लगाकर उसे खूब प्यार करें। उसे बताएं कि वो बहुत इंपोर्वटेंट है आपके लिए।
वो उसका टाइम है

माना कि आपका टाइम अब बंट चुका है। आप भी दूसरे बच्चे के साथ बिजी हैं लेकिन कुछ स्पेसफिक टाइम आप केवल अपने बड़े बच्चे को दें। डिलीवरी के बाद वॉक करने को तो डॉक्टर कहते ही हैं। यह वॉक आप अपने बड़े बच्चे के साथ करें। वो एक्टिविटी जो वो आपके साथ करना चाहता है या चाहती है उसके लिए टाइम निकालें। उसे बेड टाइम स्टोरी जरुर सुनाएं। याद रखिए अगर यह टाइम उसे नहीं दिया तो वो खुद को बहुत अकेला महसूस करेगा। इस वक्त बच्चे बहुत सेंसेंटिव हुए होते हैं आपको यही बात समझनी है।
वो बॉन्ड बनाएं
या आपकी ही जिम्मेदारी है कि आपका पहले बच्चे और दूसरे बच्चे में एक अच्छा बॉन्ड बने। इसके लिए आपको बहुत छोटे-छोटे से स्टेप्स को फॉलो करना है जैसे कि अगर आप न्यू बॉर्न के लिए कोई चीज ले रहे हैं तो उसमें पहले बच्चे का इंवॉल्वमेंट रखें। उसकी पसंद को प्रॉयोरिटी दें। उसे बताएं कि वो कितना स्मार्ट है। इसके अलावा छोटे बच्चे के साथ उसे खेलने दें। जैसे कि बच्चा या बच्ची स्कूल से लौटे तो बताएं कि बेबी आपका इंतेजार कर रहा था। इससे उसे अच्छा महसूस होगा।
रिश्तेदारों को करें डील
इस जमाने के स्मार्ट पेरेंट्स भले ही बड़े बच्चे को बड़ा नहीं बनाते। लेकिन रिश्तेदार ना चाहते हुए भी कुछ ऐसी बात कर जाते हैं जो मासूम दिल को चोट पहुंचाती है। जैसे कि अब तो बाबू आ गया। अब मम्मी ज्यादा प्यार बाबू से करेंगी। इस तरह की ना जाने कितनी ही बातें लोग कर जाते हैं। आप हर इंसान को चुप नहीं करवा सकतीं। लेकिन जैसे ही बच्चे के सामने कोई इस तरह की बात कहे आप उसी समय अपने बड़े बच्चे का सपोर्टिव जवाब दें। आन महसूस करेंगी कि बच्चे को जब पूरा इमोशनल सपोर्ट मिलेगा। बच्चा पॉजिटिव रहेगा और अपने बहन भाई को भी स्वीकार करेगा। उसे प्यार करेगा।
