गो ग्रीन अभियान-पर्यावरण के साथ दोस्ती या ईको फ्रेंडली, इन सभी बातों का एक ही अर्थ यह है कि हमें अपने पर्यावरण का खयाल रखना चाहिए। आज जब हम अच्छे रहन सहन, अच्छे खान-पान, अच्छे स्वास्थ्य और अच्छी शिक्षा की बात करते हैं तब हम यह भूल जाते हैं कि जब हमारा पर्यावरण अच्छा होगा तभी हम अन्य बातों में अच्छाई की तलाश कर सकते हैं। अगर हमारे आसपास बहने वाली हवा ही साफ  नहीं होगी, हमारा पीने का पानी शुद्ध नहीं होगा तो हम अच्छा पहन कर या अच्छा-सुंदर सा घर बनाकर क्या कर लेंगे। हमारा स्वास्थ्य अगर ठीक नहीं होगा तो हम कितना भी स्वादिष्ट खाना हो, उसे खा नहीं सकेंगे इसलिए हमें अपनी प्रकृति-अपने पर्यावरण का ध्यान रखना ही होगा और इसकी शुरूआत करनी होगी हमें अपने ही घर से-

लगाएं पौधे

गो ग्रीन अभियान का पहला कदम है हरियाली को बढ़ावा देना। इसकी शुरुआत अपने घर के अंदर और आसपास पौधे लगाकर की जा सकती है। ऐसा करने से आसपड़ोसी और दूसरे लोगों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा और वे भी अपने घर के अंदर और आसपास पौधे लगाकर इसका अनुसरण करेंगे।

बचाएं पानी की हर बूंद
प्रकृति और पानी का रिश्ता अटूट होता है। अगर हमारे पर्यावरण में पानी नहीं होगा तो पेड़-पौधे हरे होने से पहले ही मुरझा जाएंगे, इसलिए पानी को बचाना बेहद ज़रूरी है। आपके घर के बाथरूम में शॉवर भी होंगे ही लेकिन शॉवर को पानी की बर्बादी का कारण माना जाता है। अगर आप शॉवर की जगह बाल्टी में पानी भरकर नहाएं तो इससे पानी की कमी से परेशान अनेक लोगों को राहत मिल सकती है। इसके अलावा यह हमेशा ध्यान रखें कि कहीं आपका कोई नल खुला तो नहीं छूट गया है। 

बचाएं ऊर्जा
आपको ये तो पता ही होगा कि आमतौर पर बिजली पानी से बनती है। अब तो बिजली बनाने के लिए फालतू सामान यानी वेस्ट प्रोडक्ट का भी इस्तेमाल लगा है। पानी से ऊर्जा बनाने के लिए बांध से पानी को रोका जाता है। इससे आगे की नदियां सूखने लगती हैं और पानी का नुकसान होता है इसलिए बिजली का प्रयोग कम से कम करें और सिर्फ तब करें जब उसकी जरूरत हो। एसी, फ्रिज और जेनरेटर का कम से कम इस्तेमाल करें। घर में पुरानी तरह के पीली रोशनी वाले बल्ब की जगह केवल सीएफएल का ही प्रयोग करें। बल्ब और ट्यूब भी खराब होने के बाद कूड़े में फेंके जाते हैं, तो वे जमीन को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। जबकि सीएफएल से ऊर्जा तो बचती ही है, साथ ही प्रकृति को नुकसान भी काफी कम होता है।

सौर उत्पादों का इस्तेमाल करें
अगर आपके घर में सोलर पैनल लगाने का विकल्प है तो अपनी छत पर सोलर पैनल ज़़रूर लगवाएं ताकि बिजली का कम से कम इस्तेमाल हो। आजकल सौर ऊर्जा से चलने वाले अनेक उत्पाद बाज़ार में उपलब्ध हैं जिनका इस्तेमाल यदि हम अपने घरों में करें तो यह पर्यावरण के लिए तो बेहतर होगा ही बल्कि बिजली की बचत के साथ-साथ आपकी जेब की बचत भी करेगा। बाजार में उपलब्ध सौर उत्पादों में सोलर एसी, सोलर गीजर,  सोलर जैनरेटर, सोलर इनवर्टर, सोलर कुकर, सोलर सोलर बल्ब, सोलर बैटरी चार्जर, सोलर पावर सप्लाई, सोलर गार्दन लाइट्स, सोलर रिचार्जेबल टॉर्च, और अनेक सुरक्षा उपकरण शामिल हैं।

कागज बचाएं
 शायद आपको नहीं पता होगा कि एक किताब या कॉपी बनाने के लिए एक पेड़ काटा जाता है। अगर आप वाकई पर्यावरण की रक्षा करना चाहते हैं तो अपने बच्चों के लिए नई किताबें लेने की बजाय पुरानी किताबों से भी काम चला सकते हैं। इसके अलावा कागज़ों का इस्तेमाल दोनों तरफ से और कम से कम करना चाहिए। खाली पड़े कागज़ों से रफ नोटबुक भी बनाई जा सकती है। अगर एक-दूसरे से किताबें शेयर करके पढ़ेंगे तो कितने ही पेड़ कटने से बच सकते हैं।

रीसाइकलिंग का कमाल
 घर में पड़े कंटेनर और कैन को रीसाइकलिंग सेंटर में दें। इसके बदले वहाँ से कई सुंदर चीजें मिलती हैं जो वेस्ट मैटीरियल से बनाई जाती हैं। इसी तरह घर में खराब पड़े कैलकुलेटर, घड़ी, बैटरी आदि सामान को अगर कूड़े में फेंकने की बजाय रिसाइकल करवा लिया जाए तो हमारे पर्यावरण के लिए काफी फायदेमंद होगा। ये ऐसी चीजें होती हैं, जो अगर कूड़ेदान से ज़मीन में पहुँच जाएं तो जमीन को गहरा नुकसान पहुंचाती हैं।

अलग रखें सूखा और गीला कूड़ा
 हमारे घरों में रसोई का गीला कूड़ा और कागज, डब्बे, पैकिंग इत्यादि का तमाम सूखा कूड़ा होता है। हमें सूखे और गीले कूड़े को अलग-अलग डब्बों में रखना चाहिए जिससे दोनों तरह के कूड़े का इस्तेमाल दोबारा किया जा सके।

प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें
 अगर प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हैं तो उसे कम कर दें। उसकी जगह काँच, स्टील और दूसरी धातुओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। पॉलिथीन के स्थान पर कपड़े या कागज़ के थैले का इस्तेमाल किया जा सकता है। पॉलिथीन हमारे पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है।

पटाखे हैं बेकार
 दीवाली आने वाली है और भारत में ज्यादातर लोगों के लिए दीवाली का मतलब पटाखे ही होता है लेकिन शायद वे यह नहीं जानते कि पटाखे प्रकृति में प्रदूषण के स्तर को कई गुना ज्यादा बढा देते हैं, जिससे मानव के साथ-साथ पौधों को भी नुकसान पहुँचता है।

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