Summary: हरतालिका तीज को करने से पहले अच्छे से समझ लें
हरतालिका ‘हरित’ (हरना, ले जाना) और ‘आलिका’ (सखी, सहेली) से मिलकर बना है। मान्यता है कि पार्वती जी की सहेलियां उन्हें मायके से शिवजी के तप में बैठाने के लिए ले गई थीं ताकि उनका विवाह भगवान शिव से हो सके।
Hartalika Teej Importance: हरतालिका तीज एक ऐसा त्योहार है जो भक्ति, प्रेम और त्याग की अनोखी मिसाल पेश करता है। यह व्रत खासतौर पर महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख के लिए रखा जाता है। हरतालिका ‘हरित’ (हरना, ले जाना) और ‘आलिका’ (सखी, सहेली) से मिलकर बना है। मान्यता है कि पार्वती जी की सहेलियां उन्हें मायके से शिवजी के तप में बैठाने के लिए ले गई थीं ताकि उनका विवाह भगवान शिव से हो सके। इस दिन महिलाएं सज-धज कर, गीत-संगीत के साथ और पूरी आस्था से पूजा करती हैं। व्रत का सबसे खास पहलू निर्जला उपवास होता है जिसमें दिन-भर और रात-भर बिना अन्न-जल के रहकर प्रार्थना करना होता है। इस साल हरतालिका तीज 26 अगस्त को है।
व्रत का तरीका और सजधज की परंपरा

हरतालिका तीज पर महिलाएं प्रातः स्नान कर हरे या लाल रंग के नए वस्त्र पहनती हैं जो सौभाग्य के प्रतीक माने जाते हैं। माथे पर बिंदी, हाथों में हरी चूड़ियां और पैरों में महावर जैसे श्रृंगार इस व्रत का अहम हिस्सा है। पूजा स्थल पर बालू या मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर उनकी विधि-विधान से पूजा होती है। महिलाएं लोकगीत गाती हैं, मंगलाचरण करती हैं और ‘शिव-पार्वती विवाह कथा’ सुनती हैं। इस दिन की सजधज केवल बाहरी सुंदरता नहीं बल्कि आंतरिक भक्ति का प्रतीक भी है। इस दिन महिलायें ऐसे सजती हैं मानो अपने मन और तन को पवित्र कर देवी पार्वती और भगवान शिव को अर्पित कर दिया हो।
शिव-पार्वती के दिव्य मिलन की कथा
हरतालिका तीज को लेकर एक बहुत ही फ़ेमस कथा भी जुड़ी है। मान्यता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। उनका यह तप इतना कठिन और अटूट था कि भगवान शिव स्वयं प्रसन्न होकर उन्हें वचन देने आए। हरतालिका तीज इसी घटना की स्मृति में मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं पार्वती जी के उस त्याग और धैर्य को याद करती हैं जिससे उन्होंने अपने मनचाहे जीवनसाथी को पाया। यह व्रत विवाहित स्त्रियों के साथ अविवाहित कन्याएं भी अपने भावी पति के लिए इसे श्रद्धा से करती हैं।
रिश्तों में प्रेम और समर्पण का प्रतीक

हरतालिका तीज का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक भी है। यह व्रत दांपत्य जीवन में प्रेम, त्याग और विश्वास के महत्व को याद दिलाता है। व्रत का कठिन होना, निर्जला रहना और पूरी रात जागरण करना, इस बात का संकेत है कि रिश्ते में मुश्किलें आएं तो धैर्य, समर्पण और आस्था के साथ उन्हें पार किया जा सकता है। इस दिन का उपवास मन और आत्मा को भी अनुशासित करता है और जीवन के प्रति आभार का भाव बढ़ाता है।
हरतालिका तीज की प्रासंगिकता
जीवन की रफ्तार आज भले ही तेज हो गई है पर हरतालिका तीज का महत्व अब भी उतना ही है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि रिश्तों में केवल प्रेम ही नहीं बल्कि त्याग, विश्वास और एक-दूसरे की भावनाओं को समझना भी जरूरी है। आधुनिक समय में भी महिलाएं इस व्रत को पूरी निष्ठा से निभाती हैं। फिर चाहे वह गांव की खुली छत पर हो या शहर के अपार्टमेंट में। हरतालिका तीज, विरह में भी प्रेम की गहराई को महसूस करने और मन की प्रार्थनाओं को भगवान तक पहुंचाने का सुंदर अवसर है।
इस तरह से हम कह सकते हैं कि हरतालिका तीज केवल एक व्रत नहीं बल्कि एक भाव है। जिसमें प्रेम, भक्ति, समर्पण और आस्था का अद्भुत मेल है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि रिश्ते केवल साथ रहने से नहीं बल्कि दिल से निभाने से सुंदर बनते हैं।
