Geeta Gyan for Women: भगवत गीता हिंदू धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ है जोकि देश-दुनिया में भी काफी प्रचलित है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए ज्ञान में संपूर्ण जीवन का सार समाहित है। गीता के उपदेशों को पढ़कर या सुनकर केवल ज्ञान हासिल करना मात्र नहीं है, बल्कि गीता का ज्ञान आत्मसात करके जीवन जीने की अद्भुत कला भी है। यकीन मानिए अगर आपने घर पर गीता रख ली, गीता से जुड़े श्लोक, उपदेश या तस्वीर को दीवार पर टांग दिया तो इससे कतई मोक्ष नहीं मिलने वाला। बिना गीता को जीवन में अपनाए आप इसका लाभ नहीं उठा सकते।
वैसे तो गीता का ज्ञान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र की रणभूमि में दिया, लेकिन गीता का ज्ञान काफी हद तक महिलाओं के जीवन के इर्द-गिर्द भी घूमता है। गीता में ज्ञान, धर्म, कला, युद्ध, मोक्ष आदि के साथ ही स्त्रियों के गुणों से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं, जोकि हर युग की महिलाओं में पाई जाती है।
बता दें कि महाभारत युद्ध की जिस भूमि पर श्रीकृष्ण ने अर्जुन उपदेश दिए थे, जिसे हम सभी गीता उपदेश के नाम से जानते हैं, दरअसल वह युद्ध भी नारी (द्रौपदी) के अपमान का बदला लेने के उद्देश्य से हुआ था। इसलिए महाभारत का यह युद्ध इस बात का भी संदेश देता है कि, महिलाओं को हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखना चाहिए और कभी उनका अपमान नहीं करना चाहिए। इस समय जब पूरी दुनिया नारी शक्ति के सम्मान में महिला दिवस मना रही है तो ऐसे में जानते हैं भगवत गीता में बताए ऐसी बातों के बारे में जो विशेषकर महिलाओं से जुड़ी है।

गीता में बताए गए हैं महिलाओं के ये गुण

- महिलाएं अगर किसी चीज का प्रण ले लें तो उसके पूरा होने तक शांत नहीं बैठती। महाभारत काल में जब द्रौपदी का चीरहरण दुशासन के हाथों हुआ था तब द्रौपदी ने कसम खाई कि दुशासन के रक्त से ही अपने बाल धोएगी और जब तक वह ऐसा नहीं कर लेती तब तक अपने बाल नहीं बांधेगी।
- भगवत गीता में नारी शक्ति को भी स्वीकारते हुए कहा गया है कि, नारी सृष्टि की उद्भव, स्थिति और संहारकारिणी आदिशक्ति हैं। साथ ही गीता में नारी को पुरुषों के समान अधिकार और सम्मान देने की बात कही गई है।
- श्रीकृष्ण कहते हैं कि महिला अपने जीवन का हर कुछ बांट सकती है बजाय प्रेम के। क्योंकि वह अपने प्रेम पर पूरा अधिकार मानती है। सतयुग और द्वापर युग से लेकर कलयुग तक आज भी महिलाओं में ये गुण पाए जाते हैं।
- महिलाएं छोटी-छोटी बातों को लेकर चिंतिंत हो जाती हैं। महिलाओं में यह चिंता जीवन के हर अवस्था में होती है। मां बनती है तो अपने बच्चों के लिए चिंता करना, पत्नी बनती है तो खुद से ज्यादा पति के लिए परेशान रहना और बहन होती है तो अपने भाई-बहनों की चिंता करना।
- गीता के अनुसार महिलाओं में एक अच्छा स्वभाव यह होता है कि वह कभी किसी का उधार नहीं रखती। वैसे तो वह उधार लेने से बचती है, लेकिन किसी कारण उधार लेना भी पड़े तो वह जब तक अपने सिर से उधारी का बोझ न उतार ले चैन से नहीं बैठती।
