अग्रवाल समाज के भगवान एवं पितामह माने जाने वाले महाराजा अग्रसेन समाजवाद के महान प्रवर्तक, युगपुरुष, मृदुल हृदय एवं महान दानी थे। मान्यतानुसार उनका जन्म द्वापर युग के अंतिम काल एवं कलयुग के प्रारंभिक काल में माना जाता है।

महाराजा अग्रसेन को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की चौंतीसवीं पीढ़ी का वंशज माना जाता है। महाराजा अग्रसेन उन महान विभूतियों में से थे जो ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’ कृत्यों द्वारा युगों-युगों तक मनुष्य के मानस पटल पर अमिट रहेंगे। महाराजा अग्रसेन न केवल अग्रवाल समाज के कुल प्रवर्तक थे, बल्कि महान लोकनायक, सच्चे पथ प्रदर्शक एवं विश्व शांति और बंधुत्व के भी नायक थे। उनमें अलौकिक एवं अदम्य साहस, अविचल दृढ़ता एवं गंभीरता, अद्भुत सहनशीलता एवं दूरदर्शिता तथा विस्तृत दृष्टिकोण के गुण विद्यमान थे।

युगपुरुष महाराजा अग्रसेन ने ‘एक तंत्रीय’ शासन प्रणाली के प्रतिकार में एक नई व्यवस्था को जन्म दिया। इन्होंने पुन: वैदिक सनातन आर्य संस्कृति की मूल मान्यताओं को लागू कर राज्य की पुनर्गठन में कृषि, व्यापार, उद्योग और गौ-पालन के विकास के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की पुन: पदस्थापित का बीड़ा उठाया। इन्होंने अमीर-गरीब तथा ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए। महाराजा अग्रसेन ने अपने राज्य को बेकारी, बेरोजगारी एवं निर्धनता जैसे अभिशापों से मुक्त कर वहां सदाचार एवं भाई-चारे की नींव रखी।

महाराजा अग्रसेन इसलिए पूजनीय नहीं हैं कि वह अग्रवाल समाज के जनक थे वरन इसलिए पूजनीय हैं कि इन्होंने समय की मांग को देखते हुए तत्कालीन डावांडोल परिस्थितियों में अहिंसा एवं समाजवाद के आधार पर एक सुदृढ़ गणतंत्र की शुरुआत की, जिसपर अग्रवाल समाज के साथ-साथ पूरा राष्ट्र गर्व करता है। समाजवाद, लोकतंत्र एवं विश्व बंधुत्व का इससे बढ़िया उदाहरण पूरी दुनिया के इतिहास में कहीं देखने-सुनने को नहीं मिलता।

महाराजा अग्रसेन के जीवन, उनके आदर्श, उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से भटके समाज को एक बार पुन: सच्चे मन से उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प करना होगा, नई सामाजिक क्रांति लानी होगी, समाज बंधुओं में परस्पर घनिष्ठता एवं सहयोग की भावना बढ़ाते हुए समाज में व्याप्त कुरीतियों व बुराइयों को दूर करने के लिए संगठित होकर कार्य करने और अपनी एकता का परिचय देकर हर समय प्रयत्नशील रहना होगा, ताकि अग्रवाल समाज नित नवल ज्योत्सना की सुधा से रसाबोर हो।

युग पुरुष महाराजा अग्रसेन को सच्ची श्रद्धांजलि और जयंती तभी सार्थक होगी, जब अग्रवाल समाज एक बार पुन: उनके आदर्श और जीवन चरित्र से प्रेरणा लेकर स्वयं के जीवन को अग्रमय बनाते हुए समाज को नई दिशा प्रदान करने का संकल्प लें।

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