नवदुर्गा की द्वितीय देवी ब्रह्मचारिणी: Maa Brahmacharini
Maa Brahmacharini Katha

Maa Brahmacharini Katha : पितृ पक्ष के समापन के बाद सोमवार को शारदीय नवरात्र शुरू हो चुके हैं। देवी दुर्गा को मानने वाले इन दिनों पूजा-पाठ और व्रत करते हैं। इन नौ दिनों में नौ देवियों की पूजा की जाती है। नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। नवरात्र की अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन किया जाता है। कई लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं तो कई लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं। नवरात्र की नौ देवियों का अपना विशेष महत्त्व है। क्या आप नवरात्र की नौ देवियों के नाम, मंत्र और महिमा से परिचित हैं। आज के इस लेख में हम नौ दुर्गा की दूसरी देवी मां ब्रह्मचारिणी के बारे में जानेंगे।  

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मां ब्रह्मचारिणी का रूप 

ब्रह्मचारिणी में ब्रह्म है तपस्या और चारिणी है आचरण करने वाली यानि ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। मां ब्रह्मचारिणी के दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है।

ब्रह्मचारिणी की कथा

Maa Brahmacharini Katha
Katha of Brahmacharini

ऐसी मान्यता है कि पूर्व जन्म में ब्रह्मचारिणी ने हिमालय के घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया था। भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए मां ब्रह्मचारिणी ने कठिन तपस्या की थी। इस तपस्या में देवी ने एक हजार वर्ष तक केवल फल-फूल ही खाये। देवी ने खुले आकाश के नीचे धूप,बारिश सहकर कठिन तपस्या की। निर्जल और निराहार तपस्या करने के बाद देवी का शरीर कमजोर पड़ गया। इस कठिन तपस्या के कारण देवी ‘ब्रह्मचारिणी’ कहलायीं। उनकी तपस्या देख ऋषि मुनि और देव आश्चर्यचकित हो गए उन्होंने देवी को आशीर्वाद दिया कि तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी। भगवान शिव तुम्हें पति के रूप में मिलेंगे।

 ब्रह्माचारिणी मंत्र 

या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

 ब्रह्मचारिणी श्लोक 

दधाना कर पद्माभ्यामक्ष माला कमण्डलु। 

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।   

सृष्टि मिश्रा, फीचर राइटर हैं , यूं तो लगभग हर विषय पर लिखती हैं लेकिन बॉलीवुड फीचर लेखन उनका प्रिय विषय है। सृष्टि का जन्म उनके ननिहाल फैज़ाबाद में हुआ, पढ़ाई लिखाई दिल्ली में हुई। हिंदी और बांग्ला कहानी और उपन्यास में ख़ास रुचि रखती...

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