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Janmashtami 2022 Special: आखिर कान्हा को क्यों प्रिय है मोर पंख?
Janmashtami 2022 Special

Janmashtami 2022 Special: हिन्दू धर्म में हर कार्य के पीछे कोई न कोई पौराणिक कहानी जुड़ी हुई है। ईश्वर के निर्माण का रहस्य वैसे तो मानव खोज से बिलकुल परे है लेकिन धार्मिक कहानियां ईश्वर के जन्म को एक जीवंत रूप दे देती हैं। यहाँ तक कि भगवान के वस्त्र, उनके आभूषण और मुद्राओं के पीछे भी धार्मिक रहस्य है जिसे आप हमारे वेदों, उपनिषद और पुराणों में ढूंढ सकते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के शुभावसर पर आज हम आपको श्री कृष्ण के मोर पंख को धारण करने का रहस्य बताने वाले हैं। वो मोर पंख जिसके बिना कान्हा का शृंगार अधूरा है। अनेकों रंगों से भरपूर मोर पंख जिसके बिना कान्हा की छवि की कल्पना कर पाना ही असंभव है।

आखिर क्यों श्री कृष्ण को इतना प्रिय है मोर पंख आइये जानें :

  1. मोर पंख को धारण करने के पीछे एक कारण मोर है जो सदैव ब्रह्मचर्य का पालन करता है क्योंकि सृजन क्रिया में मादा नर मोर के आंसुओं को पीकर ही गर्भ धारण कर लेती है। मोर की पवित्रता को देखते हुए ही श्री कृष्ण ने इसके पंख को धारण किया हुआ है।
  2. श्री कृष्ण ने मोर पंख को प्रेम का प्रतीक माना है। उनके दाऊ बलराम शेषनाग के अवतार थे जबकि शेषनाग और मोर में शत्रुता होती है। इस तरह श्री कृष्ण ने अपने मस्तक पर मोर पंख धारण कर शत्रुता पर प्रेम की जीत का संकेत किया है और यह बतलाया है कि शत्रुता से ऊपर मित्रता है।
  3. हिन्दू धर्म में प्रचलित एक पौराणिक कथा के अनुसार श्री राधा रानी के महल के इर्द गिर्द मोर अधिक रहा करते थे। जब भी राधा रानी श्री कृष्ण की बांसुरी की सुरीली धुन सुन उनसे मिलने आया करती थीं तो मोर उनके पीछे-पीछे चले आते थे और भक्तिभाव में डूबकर नृत्य करने लगते थे। ऐसे ही एक बार मोर के नृत्य करते समय एक पंख टूटकर श्री कृष्ण के चरणों में जा गिरा। श्री कृष्ण ने उस पंख को राधा रानी के प्रेम प्रतीक समझ अपने सिर पर धारण कर लिया। तभी से उन्हें मोर पंख अत्यधिक प्रिय हो चला जो राधा रानी का स्मरण कराया करता था।

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