Dhanteras broom buying tradition
Dhanteras broom buying tradition

Overview:धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा – इसके पीछे का रहस्य

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा सिर्फ धार्मिक मान्यता नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक और स्वच्छता से जुड़े कारण भी हैं। नई झाड़ू घर में गंदगी और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है, मां लक्ष्मी का आशीर्वाद लाती है और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ाती है। यह परंपरा हमें स्वच्छता, सकारात्मक ऊर्जा और नए आरंभ की याद दिलाती है, जिससे घर में खुशहाली और स्वास्थ्य बना रहता है।

Dhanteras Tradition: भारत में हर त्योहार के साथ कोई न कोई खास परंपरा जुड़ी होती है। दिवाली जैसे बड़े त्योहार पर जहां घर-घर दीप जलाए जाते हैं, वहीं धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने की परंपरा भी सालों से चली आ रही है। बहुत से लोग इसे सिर्फ एक मान्यता मानते हैं, लेकिन इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारण जुड़े हैं।

कहा जाता है कि धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और दरिद्रता दूर होती है। झाड़ू को सिर्फ सफाई का साधन नहीं बल्कि धन की देवी लक्ष्मी का प्रतीक भी माना जाता है। इसी वजह से इस दिन झाड़ू को आदरपूर्वक खरीदा और घर में रखा जाता है।

शोध और परंपरा दोनों बताते हैं कि साफ-सफाई से न केवल घर सुंदर और आकर्षक लगता है बल्कि यह सेहत के लिए भी फायदेमंद है। धूल-मिट्टी और गंदगी से रोग फैलते हैं, वहीं स्वच्छ घर सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। धनतेरस पर झाड़ू खरीदना इसीलिए केवल आस्था नहीं बल्कि स्वच्छता और खुशहाली का संदेश भी है।

धनतेरस और झाड़ू की परंपरा का धार्मिक महत्व

Buying a new broom on Dhanteras is believed to bring wealth and positivity.
Buying a new broom on Dhanteras is believed to bring wealth and positivity

धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर लोगों को भय और अंधकार से मुक्ति दिलाई थी। इसी दिन पुरानी झाड़ू को घर से विदा करने की परंपरा भी शुरू हुई। माना जाता है कि झाड़ू नकारात्मकता और बुरी शक्तियों को दूर करने का प्रतीक है। झाड़ू से गंदगी हटती है, वैसे ही जीवन से दरिद्रता और नकारात्मकता दूर होती है। इसलिए लोग धनतेरस के दिन इसे खरीदकर घर लाते हैं और इसे आदर से रखते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह छोटी सी चीज घर में सुख-समृद्धि का द्वार खोलने वाली मानी जाती है।

झाड़ू और मां लक्ष्मी का गहरा संबंध

भारतीय परंपरा में झाड़ू को धन और लक्ष्मी से जोड़ा गया है। कहा जाता है कि जिस घर में झाड़ू का सम्मान किया जाता है, वहां दरिद्रता नहीं टिकती। धनतेरस पर झाड़ू खरीदने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं और घर में स्थायी समृद्धि आती है। यहां तक कि यह भी कहा जाता है कि झाड़ू को कभी पैर से नहीं छूना चाहिए, क्योंकि यह लक्ष्मी जी का अपमान माना जाता है। रिसर्च बताती है कि घर की स्वच्छता का सीधा असर मनोवैज्ञानिक रूप से हमारी शांति और सुख पर पड़ता है। स्वच्छ और सजीव वातावरण मन को सकारात्मक ऊर्जा देता है और घर में आर्थिक स्थिरता का अहसास कराता है।

वैज्ञानिक नजरिए से झाड़ू खरीदने का महत्व

झाड़ू केवल आस्था से नहीं जुड़ा है बल्कि इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। जब हम घर की धूल-मिट्टी साफ करते हैं तो कई तरह के बैक्टीरिया और कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है और बीमारियां दूर रहती हैं। शोध बताते हैं कि साफ-सुथरा वातावरण मानसिक तनाव को कम करता है और घर में शांति बनाए रखता है। धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना इसीलिए समझदारी भरा कदम माना गया है, ताकि घर की स्वच्छता और स्वास्थ्य का ध्यान नए सिरे से रखा जा सके। इस दिन झाड़ू लेना पुराने को हटाकर नई शुरुआत का संकेत भी है।

झाड़ू और सकारात्मक ऊर्जा का संबंध

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में इस्तेमाल की गई पुरानी और टूटी-फूटी झाड़ू नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है। वहीं नई झाड़ू घर में सकारात्मकता और तरक्की लाती है। धनतेरस को नई झाड़ू खरीदकर घर में रखना इसी वजह से शुभ माना जाता है। झाड़ू से घर की गंदगी तो हटती ही है, साथ ही मानसिक रूप से भी एक ताजगी का अनुभव मिलता है। शोध यह भी बताते हैं कि साफ घर में रहने वाले लोगों का मूड बेहतर होता है और वे ज्यादा प्रोडक्टिव रहते हैं। यह परंपरा इसीलिए केवल धार्मिक नहीं बल्कि जीवन को संतुलित रखने का एक वैज्ञानिक तरीका भी है।

झाड़ू खरीदने की परंपरा की अहमियत

भले ही आज के समय में वैक्यूम क्लीनर और मॉडर्न क्लीनिंग टूल्स का जमाना है, लेकिन झाड़ू की अहमियत आज भी उतनी ही है। धनतेरस पर इसे खरीदने की परंपरा हमें याद दिलाती है कि स्वच्छता ही सुख-समृद्धि का पहला कदम है। घर की गंदगी दूर करना और साफ वातावरण बनाए रखना परिवार के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए जरूरी है। साथ ही यह हमें अपनी जड़ों और परंपराओं से भी जोड़ता है। झाड़ू खरीदना केवल धार्मिक रस्म नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक और वैज्ञानिक संदेश है, जो हमें हर धनतेरस नई शुरुआत करने की प्रेरणा देता है।

मेरा नाम दिव्या गोयल है। मैंने अर्थशास्त्र (Economics) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से हूं। लेखन मेरे लिए सिर्फ एक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद का एक ज़रिया है।मुझे महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक...