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amarnath yatra 2022 - Grehlakshmi

Amarnath yatra 2022 : अमरनाथ की कठिन यात्रा कर बाबा बर्फानी के दर्शन करना बड़े ही सौभाग्य की बात है लेकिन यह भी सत्य है कि कुछ बातों का ध्यान रखकर हम इस यात्रा को काफी हद तक आसान अवश्य बना सकते हैं।

अमरनाथ यात्रा हिन्दी माह के आषाढ़ की पूर्णिमा (जून के अंतिम व जुलाई के प्रथम सप्ताह) को प्रारम्भ होकर, सावन की पूर्णिमा, रक्षाबंधन (अगस्त) को घड़ी मुबारक के रूप में समाप्त होती है। लेकिन भंडारा लगाने वाले जून में ही पहुंचना शुरू कर देते हैं।

ऐसे करें यात्रा

इस यात्रा को दो रास्तों द्वारा पूरा किया जा सकता है। पहलगांव (जिला अनन्तनाग) दक्षिण कश्मीर से प्रारम्भ हो वाया शेषनाग लगभग 45 किमी दूरी तय करने पर पहुंचते हैं। इस यात्रा में दो विशेष पड़ाव आते हैं। जहां यात्रियों के ठहरने का अच्छा प्रबन्ध होता है। पहला शेषनाग दूसरा पंचतरणी। पंचतरणी पर हेलीकॉप्टर का हेलीपैड बना है। यहां से वालटाल व पहलगांव को थोड़ी-थोड़ी देरी बाद उड़ानें भरते रहते हैं हेलीकॉप्टर यदि मौसम अनुकूल हो तो।

दूसरा रास्ता वालटाल (जिला गन्देलवाल) मध्य कश्मीर से प्रारम्भ होती है जो अति दुर्गम लगभग 16 किमी. दूरी वाली है। पहलगांव होते हुए रास्ता पारम्परिक व सुगम है वालटाल की तुलना में। दूरी कम होने के कारण वालटाल वाली यात्रा थकाऊ व अधिक कठिन है, सीधी चढ़ाई के कारण। खाने-पीने व बैठने का इंतजाम कदम-कदम पर लगाये भंडारों में आराम से नि:शुल्क मिलता। बड़े-बड़े भंडारों में ठहरने व सोने की भी सुविधा मिल जाती है। पूरा रास्ता, पैदल, घोड़ों या पाल्की द्वारा ही यात्रा होती है।

इन बातों का रखें ध्यान यात्रा से पहले

स्पाइक्स (उभार वाले) शूज, रेन कोट, स्वैटर (फुल स्लीव), टॉर्च, एक जोड़ी कपड़े, एक छोटा बैग, पॉलीथिन, दो जोड़ी मोजे, घड़ी (हल्की लकड़ी की बनी, 4 फुट लम्बाई, लगभग 6 इंच लम्बी कील ठुकी हो) हो सके तो घर पर बनी हुई ले जाएं। वहां मिलने वाली का लोहे वाला टुकड़ा बीच में धोखा दे जाता है। जो यात्रा को दुर्गम बना देता है। उपरोक्त वस्तुओं को ले लें। शैडो कैप व रंगीन चश्मा तेज धूप बचने के लिए न भूलें।

रखें ख्याल इन बातों का यात्रा के दौरान

बड़े बैग को वालटाल या अनन्तनाग पर ही छोड़ें।
छोटे बैग में रेनकोट, ग्लूकोज का पैकेट, छोटी बोतल, दवाएं, टॉर्च, किशमिश आदि रखें।
कपूर की टिक्की रुमाल में लपेट कर कलाई पर बांध लें। इसे सूंघते चलने पर चढ़ाई में सांस की तकलीफ व थकान से निजात मिलेगी।जरा दूरी चढ़ने पर महसूस हुई थकान को मिटाने में किशमिश खाना अच्छा रहता है।
छड़ी को अपने शरीर से लगभग 45 अंश कोण पर पहाड़ी की विपरीत दिशा (खाई की ओर रखें) दुर्गम, फिसलन व तंग, चिकने पत्थरों पर दो पत्थरों के बीच जमाकर चढ़ाई करें।
आगे बढ़ने के लिए छोटे कदम व एड़ियां पहले रखें। जल्दबाजी न कर खाई की ओर न देख आगे ही देखेंं। दूसरों से तुलना न कर आगे निकलने की चेष्टï न करें।

होम्योपैथी बन सकती है सहयोगी

यात्रा के दौरान निम्न दवाओं को साथ रखें-
कोका 30- चढ़ाई के दौरान यदि सांस फूले तो लें।
अर्निका 6- दुखन शरीर में जैसे किसी ने पीटा हो व उपयोगी चोट लगने पर होने वाली दुखन में।
डल्कामारा 6- बरसात में भीगने या बर्फ पर चलने-सोने से हुए विकारों में लाभदायक।
रस टॉक्स 6- वर्षा से भीगने पर शरीर दुखन, बेचैनी, नींद न आना बुखार।
नक्स वॉय 6- मिर्च वाले, ढाबे या भंडारे के खाने पर आई पेट की परेशानी दूर करता है।
फल्स 6- कचौड़ी, पकवान आदि खाने पर हुए विकारों (पेट दर्द, दस्त उल्टियां आदि) में लाभकारी।

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