परीक्षाओं में सहायक व्यायाम: Exercise In Exam
Exercise In Exam

Exercise In Exam: परीक्षा के लिए तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को प्राय: एक पारम्परिक सलाह दी जाती है: ‘पेशियों को आराम दो, दिमाग के कोशों (सैलों) को कुदाओ।
यदि शारीरिक व्यायाम न किया जाए तो दिमाग की धार थोड़ी कुन्द हो जाती है लेकिन अगर निर्धारित सीमा से ज्यादा किया जाए तो थकावट और आलस्य घेर लेता है।
दिमाग को संतुलित मात्रा में ऑक्सीजन चाहिए ही तब ही यह बढ़िया तरीके से काम कर पाता है। व्यायाम (शारीरिक) इसीलिए आवश्यक है क्योंकि यह ऑक्सीजन की आपूर्ति (दिमाग को) बढ़ाता है क्योंकि खून का दौरा भी तेज हो जाता है।
दिलचस्प बात यह भी है कि व्यायाम (खासतौर पर ऐरोबिक एक्सरसाईज) से हमारा बी.एम.आर. काफी समय के लिए बढ़ा-चढ़ा रहता है (कुछेक मामलों में तो 8 घंटे से लेकर कुछ दिन तक)। बी.एम.आर वह ऊर्जा है जो हमारा शरीर आराम करते समय खर्च करता है-यानी ऊर्जा की वह मात्रा जो मांसपेशियों की गतिविधि न होने पर भी हमारे भीतरी अवयवों-यथा दिमाग, जिगर और दिल इत्यादि-को चालू हालत में रहने से दरकार होती है। जब बी.एम.आर में इजाफा होता है तो हमारे शरीर की ईंधन खपत क्षमता बढ़ती है-यानी हमारे शरीर के अवयव (दिमाग समेत) ज्यादा ऑक्सीजन और पोषक तत्त्वों की खपत करते हैं, फलस्वरूप खून का दौरा बढ़ता है और हमारी समझ एवं याद रखने की क्षमता भी बढ़ जाती है।

कैसा अभ्यास या व्यायाम?

व्यायाम ऐरोबिक होना चाहिए जैसे कार्डियोवस्कुलर जिसमें आपके हृदय की गति के साथ-साथ श्वसन गति भी बढ़ती है। व्यायाम कम से कम इतना मेहनत वाला तो होना ही चाहिए कि हृदय साधारण गति से अधिक तेज धड़कने लगे और सांसों की गति भी बढ़ जाए। इस स्थिति को कम से कम पांच मिनट तक कायम रखना चाहिए (तब ही बी.एम.आर. का स्तर बढ़ता है)। यह 10 से 12 मिनट तक कायम रह सके तो अच्छा है मगर आपको इसका अभ्यास होना चाहिए। लेकिन भार उत्तोजन या तेज भागदौड़ से बचें क्योंकि ये व्यायाम मांसपेशियों को थका देते हैं। इन्हें एनोरोबिक एक्सरसाइज कहा जाता है जिसके दौरान पेशियों में काफी मात्रा में लैक्टिक एसिड जमा हो जाता है। फलस्वरूप जब आप पढ़ने बैठते हैं तो पेशियां ज्यादा खून की मांग करती हैं और यह खून आपकी दिमाग को दी जाने वाली आपूर्ति में अवरोध पैदा करता है।

कितना व्यायाम किया जाए?

यह तो प्रत्येक व्यक्ति पर अलग-अलग निर्भर होता है। एक बॉडी बिल्डर तो शायद रोज 100 से ज्यादा बैठक (sit-up) लगाकर भी थकावट न महसूस करे लेकिन ज्यादा बैठा रहने वाला आदमी 15-20 मिनट में ही थक के चूर हो जाएगा। अत: ऐसे व्यक्ति को थकने के पूर्व ही रुक जाना चाहिए और हल्के व्यायाम जैसे की 10 मिनट भागना या 20 मिनट तेजी से चलना ही करना चाहिए।

व्यायाम का आदर्श कार्यक्रम क्या होना चाहिए?

जो लोग कोई व्यायाम नहीं करते या कर सकते उनके लिए एक आसान कार्यक्रम का सुझाव है।
सुबह- थोड़ा योग या प्राणायाम या श्वसन व्यायाम करना आदर्श रहेगा। इसमें कुछ ऐरोबिक व्यायाम जैसे खड़े-खड़े भागना या 100 की गिनती तक खड़े-खड़े कूदना भी जोड़ लीजिए। यह कार्यक्रम आपके खून का दौरा बढ़ाकर ऑक्सीजन के विनिमय में भी इजाफा कर देगा।
शाम को- इस समय आपका ‘बी.एम.आर’ नीचा रहता है। यही कारण है कि हम ‘ईवनिंग न्यूज’ जैसे वाक्यों को प्रयोग करते हैं। इस स्थिति को बताने के लिए। अपने शरीर के चयापचय (या मेटाबोलिज्म) को बढ़ाने के लिए 10 से 15 मिनट तेजी से चहलकदमी करना या घूमना ठीक रहता है। इससे आगे के कुछ घंटों के लिए आपके खून के दौरे में बढ़ोतरी रहेगी। आदर्श रूप से ऐसे तब घूमना चाहिए जब आप अपने अध्ययन को खत्म करके उठें।
जो लोग देर तक या आधी रात तक पढ़ने के आदी होते हैं उनके लिए सुझाव है कि वे रात के खाने के बाद कम से कम 20 मिनट तक आराम से चहलकदमी जरूर करें। क्योंकि रात के भोजन के बाद आपकी आंतों को खाना पचाने के लिए अधिक खून की आवश्यकता होती है। इसलिए मानसिक रूप से आप थोड़ा आलस्य महसूस करने लगते हैं। इसलिए यदि रात को खाने के बाद थोड़ा घूम लेंगे तो चयापचन में इजाफा हो जाएगा।