Energy Conversion: जिसे तुम ‘जीवन’ कहते हो या जिसे तुम ‘मैं’ कहते हो, वह ऊर्जा है। तुम जितने जीवंत हो, तुम जितने जागृत हो, उतने ही तुम ऊर्जावान होते हो।
ऊर्जा का एक स्तर जिसे तुम जानते हो, वे हैं-भोजन जो तुम करते हो, पानी जो तुम पीते हो, हवा जिसे तुम सांस में लेते हो, सूर्य का प्रकाश जिसे तुम ग्रहण करते हो। तुम्हारे भीतरी तंत्र में जाकर ये चीजें ऊर्जा बन जाती हैं, जो
ऊर्जा तुम प्रतिदिन एक खास सीमा तक अनुभव करते हो- अलग-अलग लोगों में इसकी अलग-अलग सीमाएं हैं। इसे देखने का दूसरा तरीका यह है कि जिसे तुम ‘जीवन’ कहते हो या जिसे तुम ‘मैं’ कहते हो, वह ऊर्जा है। तुम जितने जीवंत हो, तुम जितने जागृत हो, उतने ही तुम ऊर्जावान होते हो। इसलिए जो भोजन तुम करते हो, जो पानी तुम पीते हो, जो हवा तुम सांस में लेते हो, जो कुछ भी तुम ग्रहण हो, जो कुछ भी भीतरी प्रणाली में जाता है, उसे अपने अंदर सक्रिय और उत्पादक ऊर्जा में बदलने की योग्यता-अलग-अलग लोगों में अलग-
अलग होती है।
ऊर्जा का रूपांतरण विभिन्न अवस्थाओं में होता है और यह इस पर निर्भर करता है कि तुम्हारी अपनी ऊर्जा कितनी जीवंत और कितनी जागृत है। शायद तुमने देखा होगा, जैसे ही तुम कोई आध्यात्मिक अभ्यास शुरू
करते हो, तुम्हारी ऊर्जा का स्तर पूरी तरह से बदल जाता है। अगर तुम इन क्रियाओं का प्रतिदिन अभ्यास करते हो, और यदि तुम उन्हें एक दिन नहीं करते हो, बिल्कुल स्पष्टï अंतर आ जाता है। अभी तुम यहां बैठे हुए
हो और हो सकता है कि तुम्हारे भीतर एक खास भावना बहुत छोटे स्तर पर बनी जा रही हो और तुम उसके बारे में जागरूक न हो। अगर कोई आकर तुम्हें ‘मूर्ख’ कह दे, तुम विस्फोट कर जाते हो। अब तुम सोचते हो
कि तुम क्रोध में हो, यह बनता जाता है, संभवत: कई दिनों, हफ्तों या महीनों तक, लेकिन तुम्हारे ऊर्जा के स्तर के कारण या जिस तरह से तुम हो उसके कारण, यह तुम्हारी चेतना या जागरुकता में नहीं होता।
इसमें कई घटक निहित हैं। इसलिए तुम्हारे भीतर जो हो रहा है। वह तुम्हारी जागरुकता में नहीं है। जब तुम्हारे भीतर जो हो रहा है वह तुम्हारी जागरुकता में नहीं है, फिर जीवन की पूरी प्रक्रिया आकस्मिक हो जाती है, तुम्हारी ऊर्जा आकस्मिक हो जाती है, उसमें कोई समरूपता नहीं रह जाती। जब यह आकस्मिक हो जाती है, तो तुम देखोगे कि एक दिन तुम ऊर्जावान हो और ठीक अगले दिन तुम नहीं हो। यह इस तरह से हो
जाती है।
निश्चित रूप से तुमने इस पर गौर किया होगा कि किसी दिन तुम बहुत खुश होते हो, उस दिन तुम ऊर्जावान लगते हो। दूसरे दिन तुम उतने खुश नहीं होते, तुम्हारे पास ऊर्जा नहीं होती। हम हमेशा शांतिपूर्ण और खुश रहने की बात कर रहे हैं, मात्र शांतिपूर्ण और खुश रहने की खातिर नहीं, बल्कि इसका एक कारण यह है कि जब व्यक्ति शांतिपूर्ण और खुश होगा, केवल तभी उसकी ऊर्जा एक खास तरह से जीवंत होने लगती है। अन्यथा
तुम्हारा भीतरी तंत्र पूरी तरह से अवरुद्ध होता है। अलग-अलग लोगों के लिए ऊर्जावान होने का अर्थ-अलग चीजें हैं। एक अर्थ में, एक स्कूली बच्चे के संदर्भ में ऊर्जावान होने का अर्थ-स्कूल जाना, खेल-कूद करना, और
सो जाने की उसकी क्षमता है। सड़क के एक मजदूर के लिए इसका अर्थ-दिनभर अपना काम करने के योग्य होना है। एक योगी के लिए, वह सोना या खाना नहीं चाहता है। कुछ लोग यह जानने में वर्षों लगा सकते हैं,
थोड़े से लोग शीघ्र ही जान जाएंगे, लेकिन जानना सबको है। कोई भी दो व्यक्ति, शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से बिल्कुल एक जैसे नहीं हैं, यह संभव नहीं है। जब तुम सही अर्थ में ऊर्जावान हो जाते हो,
एकरूपता या अद्वैत बिल्कुल स्वाभाविक है। यह बस ऐसी ही है।
