Summary: संक्रांति पर घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने के सरल उपाय
मकर संक्रांति सिर्फ़ पर्व नहीं, घर और मन की नकारात्मकता को छोड़कर नई ऊर्जा अपनाने का अवसर है। छोटे-छोटे भावनात्मक और पारंपरिक उपाय घर के माहौल को शांत, उजला और खुशहाल बना सकते हैं।
Makar Sankranti Vastu Tips: मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बैठाने का अवसर है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और माना जाता है कि अंधकार से प्रकाश की ओर जाने की शुरुआत होती है। यही कारण है कि संक्रांति को घर, मन और रिश्तों की नकारात्मकता को पीछे छोड़कर नई ऊर्जा को आमंत्रित करने का सबसे शुभ समय माना गया है। अगर इस दिन कुछ छोटे-छोटे उपाय अपनाए जाएं, तो घर का माहौल हल्का, शांत और सकारात्मक महसूस होने लगता है।
सुबह की शुरुआत ही बदल देती है माहौल
संक्रांति के दिन सुबह की शुरुआत जितनी शुद्ध और शांत होगी, पूरे दिन की ऊर्जा उतनी ही अच्छी रहेगी। सूर्योदय से पहले उठकर घर की खिड़कियां और दरवाज़े खोल देना चाहिए, ताकि ताज़ी हवा और सूर्य की पहली किरणें भीतर आ सकें। मान्यता है कि उत्तरायण सूर्य की किरणें घर में सकारात्मक कंपन फैलाती हैं। हल्के गुनगुने पानी से स्नान करना और स्नान के बाद कुछ पल शांत बैठकर धन्यवाद का भाव रखना भी मन को स्थिर करता है, जिसका असर पूरे घर के वातावरण पर पड़ता है।
सफाई नहीं, ऊर्जा की शुद्धि ज़रूरी है
अक्सर हम संक्रांति से पहले घर की सफाई तो करते हैं, लेकिन ऊर्जा की सफाई पर ध्यान नहीं देते। इस दिन घर के कोनों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यहीं नकारात्मकता जमा होती है। नमक मिले पानी से फर्श पोंछना या सुबह-शाम हल्का धूप-दीप जलाना वातावरण को शुद्ध करता है। रसोई और पूजा स्थल को साफ रखना विशेष रूप से ज़रूरी है, क्योंकि इन्हें घर की ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।
तिल और गुड़ का संबंध केवल स्वाद से नहीं

संक्रांति पर तिल और गुड़ खाने की परंपरा सिर्फ मौसमी कारणों से नहीं जुड़ी है। तिल को नकारात्मकता सोखने वाला और गुड़ को मिठास फैलाने वाला माना जाता है। घर में तिल-गुड़ से बनी चीज़ें बनाना और उन्हें परिवार के साथ मिलकर खाना रिश्तों में गर्माहट लाता है। जब घर में मिठास का भाव आता है, तो आपसी तनाव अपने आप कम होने लगता है, जो पॉज़िटिव एनर्जी को बढ़ाता है।
घर में धूप और रोशनी को जगह दें
संक्रांति के दिन कोशिश करें कि घर में दिनभर रोशनी बनी रहे। मोटे पर्दों को हटाकर हल्के रंगों के पर्दे लगाएँ या कुछ समय के लिए खिड़कियां खुली रखें। शाम के समय दीये या हल्की पीली रोशनी का उपयोग करें। तेज़ सफ़ेद लाइट की जगह गर्म रोशनी मन को सुकून देती है और घर को सहज ऊर्जा से भर देती है।
शब्दों की गर्माहट भी ऊर्जा बनाती है
त्योहार के दिन घर में बोले जाने वाले शब्द भी बहुत मायने रखते हैं। संक्रांति पर कटु बातें, शिकायतें या पुराने झगड़ों को दोहराने से बचें। इसके बजाय एक-दूसरे को शुभकामनाएं देना, बच्चों के साथ हंसी-मज़ाक करना और बुज़ुर्गों का आशीर्वाद लेना घर की ऊर्जा को मजबूत करता है। सकारात्मक शब्द घर की दीवारों में भी बस जाते हैं।
खुद के लिए थोड़ा समय निकालें

अक्सर महिलाएं त्योहारों में सबके लिए करती रहती हैं और खुद को भूल जाती हैं। संक्रांति के दिन अगर आप कुछ पल अपने लिए निकालें, चाहे वह धूप में बैठकर चाय पीना हो या मनपसंद भजन सुनना, तो आपकी ऊर्जा संतुलित होती है। जब घर की महिला मानसिक रूप से शांत होती है, तो पूरा घर उसी ऊर्जा में बहने लगता है।
संक्रांति का असली संदेश अपनाएं
संक्रांति का मूल संदेश है बदलाव, आगे बढ़ना और प्रकाश की ओर जाना। अगर इस दिन आप पुराने गिले-शिकवे छोड़ने, घर में सरलता लाने और दिल में हल्कापन रखने का संकल्प लें, तो यह सिर्फ़ एक दिन का नहीं, पूरे साल का सकारात्मक प्रभाव बन जाता है। छोटे-छोटे प्रयासों से घर केवल सजता नहीं, बल्कि भीतर से उज्ज्वल होता है।
