Funny Stories for Kids: निक्का के पड़ोस में ही एक खशुदिल आदमी रहता था, इल्ला-उल्ला । अजीब-सा नाम था उसका, पर था बड़ी तेज अक्ल वाला । इसलिए अलबेलापर में सभी इल्ला उल्ला का लोहा मानते थे। खब लंबा-तगड़ा शरीर, तन पर मोटे-झोटे कपड़े । पर इल्ला-उल्ला खशुमिजाज इतना था कि जिधर से
भी निकल जाता, उधर हँसी-खशी की एक लहर सी दौड़ जाती ।
एक दिन की बात, अलबेलापर में लाल रंग का बड़ा सा पग्गड़ बाँधे एक जादूगर आया । बड़ी-बड़ी झब्बेदार मूंछे । ढीला-ढाला, रंग-बिरंगा चोगा । देखने में खासा रोबीला । नाम था नोखेलाललखनवी । आते ही उसने अपनी बातों से रंग जमा दिया । बोला, “भाइयो, नाम तो मेरा नोखेलाल लखनवी है। पर मैं अलबेला जादूगर हूँ । इसीलिए आपके अलबेलापर में आया हूँ। आप कहें तो ऐसा जादू मैं दिखा सकता हूँ कि जादगर सरकार की भी छुट्टी हो जाए।…मैं चाहूँ तो चटुकियों में चाँद-सूरज को लट्टू की तरह घमाु दूँ । ऊपर की चीज नीचे, नीचे की ऊपर कर दूँ । सारी दनिया में मेरेु नाम का डं का पिटता है। आज आपके अलबेलापर में भी अपना कमाल दिखाने आया हूँ।”
सचमचु जादगरू नोखेलाल लखनवी की लच्छेदार बातों का जाद पूरेू अलबेलापर परु चल गया । फिर उसका रोबीला रंग-रूप और भारी-भरकम चोगा । बच्चे, बढ़ेू, जवान सब आँखें फाड़े उसके करतब देख रहे थे। जादूगर ने अपने तरह-तरह के हैरतअगेज जादू दिखाए। एक खाली संदकूमें उसने ढेर सारे के ले रखकर, ढक्कन बंद किया । फिर पता नहीं कैसा मंतर घुमाया, कि उसमें से के ले की जगह अंगूर निकलेू । थोड़ी देर बाद उसने एक बड़ी-सी पेटी में लाल रंग की साड़ी रखकर ताला लगा दिया । कुछ देर बाद ताला खोला गया तो उसमें से सैकड़ों रंग-बिरंगे रूमाल निकल-निकलकर बाहर आ गए।
देखकर लोग तालियों पर तालियाँ बजा रहे थे। सारे अलबेलापर के लोगों ने जादूगर की बहुत तारीफ की, पर इल्ला-उल्ला चुप रहा ।
जादूगर कुढ़कर बोला, “शायद मेरा जादू इल्ला-उल्ला को पसंद नहीं आया ।”
इस पर इल्ला-उल्ला बोला, “बात तो कुछ ऐसी ही है। बुरा न मानना भाई नोखेलाल लखनवी, इससे बढ़कर जादू तो मैं दिखा सकता हूँ।”
अब तो जादूगर नोखेलाल बरी तरह चिढ़ गया । बोला, “ठीक है, अगली बार मैं आऊँगा । मेरे और तमु्हारे जादू का मुकाबला होगा ।” इल्ला-उल्लाने मजे में मँछें ऐठीं । फिर मुसकराकर चनुौती कुबल कर ली । बोला, “ठीक है।”
इसके कोई छह महीने बाद जादूगर नोखेलाल लखनवी फिर आया । इस बार उसके ठाट और भी निराले थे। उसने और भी तरह-तरह के जादू दिखाए। बहुत-से नए खेल वह सीखकर आया था । देखकर लोग अचरज में पड़ गए। देखकर लगता था, जमीन से लेकर आसमान तक कुछ भी ऐसा नहीं है, जो उसके काबू में न हो । हर चीज पर उसका जादूचलता था । जिसे भी कहो, वह नाच नचा सकता था ।
अपने तमाम करतब दिखाकर जादूगर नोखेलाल लखनवी ने दर्शकों को हैरान कर दिया । सारे के सारे लोग उठ खड़े हुए और उसके लिए तालियों पर तालियाँ बजाने लगे। इसके बाद जादगर बोला, “आप ने मेरा खेल देख लिया । अब इल्ला-अल्ला अपना जादू दिखाएगा ।”
नोखेलाल मचं से उतरा, तो इल्ला-उल्ला अपनी एकदम सीधी-सादी देहाती वेशभषूा में मचं पर जा पहुँचा । उसके हाथ में एक घड़ा था । रोज घर-घर में इस्तेमाल होने वाला मामली सा घड़ा । और कोई चीज उसके पास नहीं थी । यहाँ तक कि जादूगर नोखेलाल जैसा भारी-भरकम चोगा भी नहीं । हाँ, उसकी मँछें अजब ढंग से फड़क रही थीं, और चेहरे पर मदं -मदं मसकाु न थी ।
दर्शकों की ओर देखते हुए इल्ला-उल्ला बोला, “भाइयो, अभी नोखेलाल लखनवी ने यहाँ खड़े होकर खूब तीन-पाँच की । इधर की उधर भिड़ाई और खूब कुलाबे दिखाए। मझे यह सब नहीं आता, और मैं इसकी जरूरत भी नहीं समझता । मेरा जाद तो एकदम सीधा-सादा है। आप कहें तो दिखाऊँ , आप कहें तो रहने दूँ ।” कहकर इल्ला-उल्ला ने फिर से दर्शकों पर नजर डाली ।
सनुकर सब लोग एक साथ चिल्लाए, “दिखाओ, अपना जादूदिखाओ इल्ला-उल्ला । जरूर दिखाओ। हम तमु्हारा जादूदेखने ही तो आए हैं।” “असल में जादू मैं नहीं, बल्कि मेरा यह घड़ा दिखाएगा । आप लोग अच्छी तरह से देख लें। यह घड़ा साबत हैु न, कहीं से टूटा-फूटा तो नहीं है न ?” कहकर इल्ला-उल्लाने मचं पर उस घड़े को चारों ओर से घुमाकर दिखा दिया । घड़े में कोई जोड़ नहीं था । वह एकदम साबुत था । पर भला इस घड़े में क्या जादू हो सकता हैू ? किसी की समझ में नहीं आ रहा था ।
इल्ला-उल्ला की बात सनुकर जादूगर नोखेलाल हँसा । बोला, “घड़ा और जादू? शायद हमारे इल्ला-उल्ला जी आज सचमचु कोई विचित्र जादूदिखाने जा रहे हैं, जैसा आज तक किसी ने नहीं दिखाया!”
इस पर सब लोग खिलखिलाकर हँस पड़े । सबको लग रहा था, बेचारा इल्ला-उल्ला !…इसने बिना बात ही अपनी फजीहत करा ली । उधर मचं पर खड़ा इल्ला-उल्ला परी मौज में था । वह भी औरों के साथ-साथ हा-हा, ही-ही करके हँस रहा था । हँसते-हँसते बोला, “भाइयो, हमारे जादूगर नोखेलाल जी बिल्कुल ठीक कहते हैं। आज तो मैं वाकई घड़े का ही जादू दिखाऊँ गा । और ऐसा जाद, जैसा आज तक किसी ने नहीं दिखाया ।” सनुकर सब लोग चौंके। जादूगर नोखेलाल के होंठों पर भी चपु्पी का ताला लग गया ।
और इल्ला-उल्ला ?…वह तो अपनी मस्ती की तरंग में था ही । सो उसी तरंग में हवा में गोल-गोल हाथ हिलाता हुआ बोला, “भाइयो, मैंने अपने जादू से घड़े में परा कद्दू डाल दिया है। अब यह जादूगर नोखेलाल लखनवी महाशय बगैर घड़ा फोड़े, अपने जाद से इसे बाहर निकालू दें तो मैं इन्हें मान जाऊँ।…पर हाँ, शर्त यह है कि घड़ा टूटना नहीं चाहिए।”
लोगों ने देखा, वाकई इल्ला-उल्ला सही कह रहा था । घड़े के अदंर पराू कद्दू मौजूद था । हे राम, घड़े में कद्दू कै से डाला इल्ला-उल्लाने? हर कोई हैरान ! “आओ भई जादूगर नोखेलाल, आओ। अब घड़े से निकालकर दिखाओ
यह कद्दू ।” सब एक साथ पुकारने लगें।
जादूगर नोखेलाल ने सनुा तो उसकी हवा खराब । चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं । भला घड़े के छोटे से मँह से इतना बड़ा कद्दू कै से बाहर निकाला जा सकता था? और फिर इस विचित्र से देहाती आदमी इल्ला-उल्ला ने बिना घड़ा फोड़े इसके अदंर इतना बड़ा कद्दू डाल कै से दिया । यह खदु में एक रहस्य
था ।
जादूगर नोखेलाल को लगा, उसका दिमाग काम नहीं कर रहा । अगर वह कुछ देर और यहाँ रहा, तो लोग उसके मँह पर खिल्ली उड़ाएँगे। बड़ी किरकिरी होगी । इसलिए यहाँ से भागना ही अच्छा है।
कुछ देर बाद उसने अपना सामान सँभाला और चुपके से खिसक लिया । अलबेलापुर वालों ने इल्ला-उल्ला का जय-जयकार करते हुए, परे कसबे में जुलूस निकाला । सबने मानलिया कि असली जादूगर तो इल्ला-उल्ला ही है। जलुस में निक्का भी था । उसने इल्ला-उल्ला से पछा, “जादूगर चाचा, यह तो बताओ, तमुने यह जादू किया कैसे? घड़े में साबुत कद्दू कैसे चला गया?”
“अरे, बहुत आसान है बचआु !” इल्ला-उल्ला हँसकर बोला, “जब बेल पर कद्दू छोटा ही था, मैंने उस पर उलटा घड़ा रख दिया । अब कद्दू घड़े के अदंर बढ़ता चला गया । जब पूरा कद्दू हो गया, तो मैं उसे तोड़कर ले आया ।…”
इल्ला-उल्ला ने अपने खास अंदाज में बताया जादू का रहस्य । फिर बड़े ठसके से बोला, “यों कद्दू घड़े के अदंर चला तो गया, पर यह जादूघर तो क्या, इसका परदादा भी इसे घड़े से बाहर नहीं निकाल सकता था!”
कहकर इल्ला-उल्ला हँसा, तो निक्का के साथ-साथ सबने तालियाँ बजा दीं । निक्का समझ गया कि असली असली होता है, और नकली नकली । तभी तो जादूगर चाचा के देसी जादूने नोखेलाल लखनवी के नकली जादू की हवा निकाल दी ।
ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Bachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ
