Bathing in the Ganges bestows health and spiritual purification.
Bathing in the Ganges bestows health and spiritual purification.

Ganga Snan during Sankranti: मकर संक्रांति पर गंगा स्नान को मोक्ष, स्वास्थ्य और आत्मिक संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। यह परंपरा हमें यह सिखाती है कि सच्ची शुद्धि आस्था, अनुशासन और सकारात्मक सोच से आती है- जो जीवन को नई दिशा देने का आधार बनती है।

साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी (बुधवार) को मनाई जाएगी। यह पर्व केवल एक तिथि नहीं, बल्कि सूर्य के उत्तरायण होने का पावन संकेत है। मान्यता है कि इस दिन से देवताओं का दिन प्रारंभ होता है और प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है। गृहलक्ष्मी की पाठिकाओं के लिए यह पर्व इसलिए भी खास है, क्योंकि इसमें आस्था, परंपरा, स्वास्थ्य और आत्मिक शांति- चारों का सुंदर संगम देखने को मिलता है। मकर संक्रांति पर किया गया दान, जप और विशेष रूप से गंगा स्नान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।

धर्मग्रंथों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी देखें तो जनवरी की ठंड में नदी स्नान शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। ठंडे जल से स्नान रक्त संचार को सक्रिय करता है, जिससे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। महिलाओं के लिए यह स्नान मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन का भी माध्यम बनता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा जल में सूर्य की किरणें विशेष औषधीय गुण ले आती हैं, जिससे स्नान करने वाला व्यक्ति तन-मन से शुद्ध होता है। विशेष मान्यता के अनुसार, सूर्योदय के समय या उसके तुरंत बाद किया गया स्नान सर्वाधिक फलदायी होता है। यदि किसी कारणवश नदी तक जाना संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना गया है।

भारत में मकर संक्रांति के अवसर पर कई पवित्र स्थानों पर श्रद्धालु स्नान के लिए एकत्र होते हैं। हालांकि हिमालयी क्षेत्रों में मौसम के कारण कुछ तीर्थ स्थल जनवरी में सुलभ नहीं होते, फिर भी आस्था के केंद्र बने रहते हैं।

हर की पौड़ी पर आस्था का सागर हरिद्वार मकर संक्रांति स्नान के सबसे प्रमुख केंद्रों में से एक है। हर की पौड़ी पर इस दिन विशाल मेला लगता है और लाखों श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाते हैं। मान्यता है कि यहां स्नान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

ऋषिकेश को गंगा तट पर स्थित सबसे शांत और आध्यात्मिक स्थलों में गिना जाता है। मकर संक्रांति के दिन त्रिवेणी घाट, राम झूला और लक्ष्मण झूला क्षेत्र में गंगा स्नान का विशेष महत्व है। यहां स्नान के साथ-साथ योग, ध्यान और सत्संग का वातावरण महिलाओं को मानसिक संतुलन और आत्मिक मजबूती प्रदान करता है। जो महिलाएं भीड़-भाड़ से दूर रहकर श्रद्धा के साथ पर्व मनाना चाहती हैं, उनके लिए ऋषिकेश आदर्श स्थान है।

गंगोत्री और बद्रीनाथ हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित हैं, जहां जनवरी में भारी बर्फबारी होती है। इस कारण मकर संक्रांति के समय यहां पहुंचना संभव नहीं होता। गंगोत्री देवी की शीतकालीन पूजा मुखबा में और बद्रीनाथ धाम की पूजा जोशीमठ (नरसिंह मंदिर) में होती है। श्रद्धालु इन शीतकालीन गद्दियों में दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।

देवप्रयाग: गंगा का जन्मस्थल देवप्रयाग वह पवित्र स्थान है जहां भागीरथी और अलकनंदा नदियों का संगम

मकर संक्रांति पर स्नान का सबसे उत्तम समय पुण्य काल माना जाता है।

तिथि: 14 जनवरी 2026, बुधवार
पुण्य काल: प्रात: सूर्योदय से दोपहर तक होकर गंगा का वास्तविक स्वरूप बनता है। यह स्थान मकर संक्रांति पर स्नान के लिए सुलभ और अत्यंत पवित्र माना जाता है। हालांकि यहां हरिद्वार या प्रयागराज जैसी विशाल मेले की व्यवस्था नहीं होती, फिर भी संगम में स्नान करना विशेष पुण्यकारी माना गया है।

Bathing in the Ganges bestows health and spiritual purification.
Ganga Snan

प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम है। मकर संक्रांति यहां माघ मेला के प्रमुख स्नान पर्वों में से एक है। यहां किया गया स्नान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।

मकर संक्रांति केवल स्नान का पर्व नहीं, बल्कि दान, सेवा और कृतज्ञता का उत्सव है। तिल, गुड़, खिचड़ी और ऊनी वस्त्रों का दान करने की परंपरा समाज में समानता और सहयोग की भावना को
मजबूत करती है। महिलाओं के लिए यह पर्व आत्मचिंतन का अवसर भी देता हैपुराने नकारात्मक भावों को त्यागकर नए संकल्प लेने का समय। यदि आप किसी कारणवश तीर्थ स्थल पर स्नान नहीं कर पा रही हैं, तो घर पर गंगाजल, सूर्य अर्घ्य और दान-पुण्य के माध्यम से भी मकर संक्रांति का पूरा पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। आस्था का सार बाहरी यात्रा से अधिक भीतरी शुद्धि में
छिपा है। मकर संक्रांति 2026 हमें प्रकृति, परंपरा और स्वयं से जुड़ने का अवसर देती है। गंगा स्नान हो या घर पर साधनायह पर्व हमें याद दिलाता है कि शुद्ध विचार, संतुलित जीवन और सेवा भाव ही
सच्चा पुण्य है।