कोई चाह कर कभी अपने जीवन को दुखी नहीं बनाना चाहता लेकिन फिर भी ऐसी कई चीजें हैं जो जिंदगी को नरक बना देती हैं और जिसका मुख्य कारण है अंसतोष। आचार्य चाणक्य ने तीन ऐसी परिस्थितियां बताई हैं, जिसमें व्यक्ति को संतोष करना चाहिए। जबकि तीन ऐसे काम बताए है जिनमे संतोष नहीं करना चाहिए।
हर व्यक्ति को इन 3 चीजों से संतुष्ट रहना चाहिए
अपनी पत्नी
दूसरी स्त्रियों के पीछे नहीं भागना चाहिए। अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाए रखने के लिए व्यक्ति को अपनी पत्नी से संतुष्ट रहना चाहिए।
वह भोजन जो विधाता ने प्रदान किया
घर का भोजन छोड़ कर बाहर के खाने पर मन रखने वाला व्यक्ति जल्दी बीमारियों की गिरफ्त में आ जाता है। ऐसा इंसान सिर्फ स्वाद के चक्कर में अपनी सेहत से समझौता करता है और कई बीमारियों का शिकार हो जाता हैं। इसलिए मनुष्य को जो भोजन अपने घर पर मिलता है, उसी से संतुष्ट रहना चाहिए।
उतना धन जितना ईमानदारी से मिल गया
व्यक्ति को उसकी जितनी आय हो, उसी में संतोष रखना चाहिए। ज्यादा धन या दूसरों के धन के लालच में पड़ने से हमेशा जीवन दुखी ही रहता है।
लेकिन व्यक्ति को इन 3 चीजों से कभी संतुष्ट नहीं होना चाहिए
अध्ययन
मनुष्य को चाहे कितना ही ज्ञान क्यों न मिल जाए, वह कभी भी संपूर्ण नहीं होता है। इसीलिए व्यक्ति कितना ही अध्ययन कर ले, उसे कभी भी संतुष्ट नहीं होना चाहिए।
ईश्वर का नाम स्मरण
भगवान को याद करने की कोई सीमा नहीं होती। हम कितना भी जप कर ले, वह कम ही होता है। हमें कभी भी जप से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, हमेशा जप करते रहना चाहिए।
परोपकार
हम कितना ही परोपकार करें, कभी भी उसका हिसाब-किताब नहीं करना चाहिए। हमें कभी भी परोपकार से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, जहां भी मौका मिले पवित्र भावनाओं के साथ दान करते रहना चाहिए।
