Chanakya Neeti about Women: आचार्य चाणक्य न केवल महान अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ थे, बल्कि उन्होंने मानव जीवन के व्यवहारिक पक्षों को लेकर भी गहरी नीतियां दी थीं। उनके द्वारा रचित ‘चाणक्य नीति’ में जीवन के हर पहलू को सरल और स्पष्ट रूप में समझाया गया है – फिर चाहे वह राजा की योग्यता हो, मित्र की पहचान हो या जीवनसाथी का चयन। चाणक्य के अनुसार, एक आदर्श पति में कुछ विशेष गुण होने चाहिए, जो न सिर्फ दांपत्य जीवन को सुखी बनाते हैं, बल्कि स्त्री को मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक सुरक्षा भी प्रदान करते हैं। आइए जानते हैं वो 7 गुण जो हर पत्नी अपने पति में देखना चाहती है — और जिन्हें चाणक्य ने भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया है।
सच्चरित्र और ईमानदार हो
चाणक्य कहते हैं, “ईमानदारी वह नींव है जिस पर विश्वास की इमारत खड़ी होती है।” एक पति अगर सच्चरित्र हो, तो वह अपने जीवनसाथी की आत्मा को शांति देता है। झूठ, छल और बेवफाई रिश्ते को खोखला कर देते हैं।
धैर्यशील और संयमी स्वभाव
जीवन में उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं, लेकिन एक अच्छा पति वही होता है जो मुश्किल समय में भी धैर्य और संतुलन बनाए रखे। चाणक्य के अनुसार, बिना संयम के व्यक्ति जल्द ही नष्ट हो जाता है — यही बात दांपत्य जीवन पर भी लागू होती है।
स्त्री का सम्मान करने वाला
चाणक्य नीति में कहा गया है कि जो पुरुष स्त्री का सम्मान नहीं करता, वह खुद भी सम्मान का पात्र नहीं बनता। एक पत्नी के लिए सबसे अहम होता है कि उसका पति उसे बराबरी और आदर की नजर से देखे, न कि हुक्म चलाने वाले के रूप में।
कर्तव्यनिष्ठ और जिम्मेदार
एक पत्नी तब सबसे सुरक्षित महसूस करती है जब उसका जीवनसाथी अपनी जिम्मेदारियों को समझे और उन्हें निभाए। चाणक्य स्पष्ट कहते हैं कि जो पुरुष अपने कर्तव्यों से भागता है, वह समाज में भी अपमानित होता है।
सांत्वना देने और समझने वाला स्वभाव
हर स्त्री चाहती है कि उसका पति न सिर्फ उसकी बात सुने, बल्कि उसे समझे भी। चाणक्य नीति में यह भी उल्लेख है कि एक अच्छा जीवनसाथी वही होता है जो कठिन समय में पत्नी का संबल बने, न कि उसकी कमजोरी पर कटाक्ष करे।
परिश्रमी और आत्मनिर्भर
चाणक्य कहते हैं – “जो पुरुष आलसी है, वह न अपने लिए कुछ कर सकता है और न दूसरों के लिए।” एक ऐसा पति जो मेहनती और आत्मनिर्भर हो, वह न सिर्फ परिवार को संबल देता है, बल्कि समाज में भी सम्मान पाता है।
धन और सुख में संतुलन बनाए रखने वाला
धन का लोभ या भौतिक सुखों की अंधी दौड़ रिश्तों को खोखला कर देती है। चाणक्य का मानना है कि एक पुरुष को न तो अतिआसक्त होना चाहिए और न ही विलासिता में डूब जाना चाहिए। पत्नी चाहती है कि उसका पति संतुलन में जीना जाने, ताकि जीवन स्थिर और खुशहाल बना रहे।
