आप देवी मां की भक्त हैं तो आप जरूर किसी न किसी मंदिर में इनके दर्शन के मौके तलाशती ही होंगी। आपकी इसी तलाश को हम पूरा किए देते हैं। आज हम आपको पंचकुला के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जो माता का मंदिर है और अपने आप में अनोखा है। इसमें आपको माता की पूरी मूर्ति नहीं मिलेगी बल्कि सिर्फ देवी का सिर ही मिलेगा। सिर के दर्शन भर से आप खुद को धन्य महसूस करने लगेंगे। हम बात कर रहे हैं पंचकुला के मनसा देवी मंदिर की। ये एक बहुत बड़े एरिया में बना बड़ा और माना हुआ मंदिर है। यहां आने वालों की मानोकामना पूरी होती ही है। चलिए इस मंदिर के बारे में जान लें सबकुछ-

कैसे जाएं

मनसा देवी का ये मंदिर चंडीगढ़ से 10 किलोमीटर दूर है और हरियाणा के पंचकुला से 4 किलोमीटर दूर। देश के हर बड़े शहर से चंडीगढ़ के लिए फ्लाइट और ट्रेन चलती हैं। बसें भी आपको मिल जाएंगी। नवरात्र में यहां आएंगी तो प्रशासन की ओर से चलाई गई बसों से भी सफर कर सकेंगी। 

40 दिन और मनोकामना पूरी

मनसा देवी मंदिर के लिए माना जाता है कि यहां 40 दिन तक लगातार आने वाले लोगों की मनोकामना पूरी होती ही है। दरअसल ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। श्रीमाता मनसा देवी पूजास्थल बोर्ड की स्थापना कर दी गई है। 

मनसा देवी की पहचान

देवी के नौ रूपों में से एक है मां मनसा देवी। माना ये जाता है कि देवी का सिर इसी जगह पर गिरा था। ये मंदिर चंडीगढ़ के करीब पंचकुला में है और 100 एकड़ में फैला है। 

क्या है मान्यता

मनसा देवी के लिए एक मान्यता है कि जब माता पार्वती पिता राजा दक्ष के घर गईं तो अश्वमेघ यज्ञ हो रहा था, जिसमें उन्हें बुलाया नहीं गया था। उनका सत्कार नहीं हुआ तो उन्होंने अपने आप को अग्नि में समा दिया। बेएचडी आहत शिव जी सती का शरीर लेकर तांडव करने लगे और नृत्य करते हुए भटकने लगे। देवताओं को शिव जी का ये रूप देख चिंता हुई तो उन्होंने सती के कई हिस्से कर दिये। सुदर्शन चक्र से किए गए ये हिस्से जहां-जहां गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। इन हिस्सों में से सिर पंचकुला के इस स्थान पर गिरा तो मनसा देवी शक्तिपीठ की बनाया गया। 

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