पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में स्थित मां मनसा देवी का भव्य मंदिर बेहद ही प्राचीन है। यह मंदिर देवी के शक्तिपीठों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि यहां देवी सती का मस्तक गिरा था। ये मां का ऐसा धाम है, जहां दर्शन मात्र से और जिनका नाम लेने भर से भक्तों की मन्नतें पूरी हो जाती हैं।
 
माता मनसा देवी के मंदिर पर चैत्र की नवरात्रि को बहुत बड़ा मेला लगता है। इस मेले में भाग लेने के लिए और माता के दर्शनार्थ लोग दूर-दूर से आते हैं। माना जाता है कि माता के दरबार में सच्चे मन से कुछ मांगा जाए तो मां उसे अवश्य ही पूरा करती हैं।
 
ऐसा है माँ का दरबार
 
प्राचीन होने के विपरीत मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। आरंभ में ही विशाल सीढ़ियां हैं जिनसे होकर आप माता के दरबार में पहुंचते हैं। मंदिर के मुख्य द्वार से ही माता मनसा देवी की सुख लाल मूर्ति हमारी हृदय की भक्ति को आकर्षित करती है।  
 
कालसर्प दोष से मुक्ति
 
अगर आपकी कुंडली में कालसर्प दोष का साया है या जीवन में हर काम में अड़चन आती है, तो मां मनसा का यह धाम किसी वरदान से कम नहीं है। मां के इस दरबार में की गई कालसर्प दोष निवारण पूजा कभी खाली नहीं जाती है। देश के कोने-कोने से भक्त इस खास पूजा के लिए मां के दर पर आते हैं।
 
इस मंदिर के पीछे का रहस्य
 
मंदिर के बारे में एक ऐतिहासिक कथा प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर के काल में एक बार प्रकोपवश फसल बहुत कम हुई। परंतु राजा ने किसानों का लगान माफ नहीं किया। मां दुर्गा के एक भक्त ने उनकी पूजा और हवन किया। देवी ने प्रसन्न होकर सभी किसानों का कल्याण होने का आशीर्वाद दिया। किसानों का उस वर्ष का लगान माफ हो गया। सबने मिलकर वहां एक मंदिर की स्थापना की जो मनसा देवी अर्थात् मन्शा (इच्छा) को पूर्ण करने वाली के नाम से विख्यात हुआ। 
 
कैसे पहुँचे – यह मंदिर चंडीगढ़ शहर के समीप ही मनीमाजरा नामक स्थान पर है। चंडीगढ़ से इस स्थान के लिए बहुत सी बसें व निजी वाहन उपलब्ध हैं।