क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि महिलाएं जो पायल या बिछिया पहनती हैं, वह चांदी की ही क्यों होती है? आपने कभी गौर किया है कि पैरों में पहने जाने वाली ये ज्वेलरी सिल्वर की ही क्यों बनी होती है? या फिर पैरों में गोल्ड की पायल क्यों कोई नहीं पहने दिखता है, तो हम आपको बताते है ऐसा क्यों है, इसके पीछे का कारण क्या है-
क्या है धार्मिक पहलू?
धार्मिक मान्यता के अनुसार सोने को लक्ष्मी जी का स्वरूप माना जाता है। भगवान विष्णु को भी सोना ही सबसे प्रिय है। इसीलिए सोने को शरीर के निचले हिस्सों में नहीं पहना जाता है इससे देवी-देवताओं का अपमान होता है।
क्या है साइंटिफिक रीज़न?
आयुर्वेद के अनुसार सिर ठंडा और पैर गर्म रहने चाहिए। गोल्ड की ज्वेलरी गर्म और सिल्वर-ज्वेलरी ठंडी होती हैं। इससे सिर की एनर्जी का फ्लो पैरोँ में और पैरों की एनर्जी सिर तक पहुँचती हैं। इसीलिए कहते है कि कमर के नीचे सिल्वर ज्वेलरी पहनने से शरीर में गर्मी और शीतलता का बैलेंस मेन्टेन रहता है। वहीं अगर सिर और पांव दोनों में ही गोल्ड ज्वेलरी पहन ली जाए तो इससे सेम एनर्जी फ्लो होगा, जो की व्यक्ति के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।
फायदे
- पैरों में चांदी की पायल पहनने से पायल हमेशा पैरों से रगड़ती रहती है, जिससे पैरों की हड्डियों को लाभ मिलता है। इससे फीमेल्स के पैरों की हड्डियां स्ट्रांग होती हैं।
- चाँदी की पायल पहनने से ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है। इससे बहुत सी गयनेकोलॉजिकल प्रॉब्लम्स (gynecological problems) से निजात मिलती है।
- चांदी की पायल पहनने से घुटनों के दर्द व पैरों के दर्द में आराम मिलता है।
- वहीं चांदी की बिछिया पहनने से पीरियड्स नियमित रहते हैं। इसके अलावा बिछिया एक्यूप्रेशर का भी काम करती है, जिससे तलवे से लेकर नाभि तक की सभी पेशियां और नाड़ियां सही से काम करती रहती हैं।
- चाँदी के पायल में लगे घुंघरू की खनक से व्यक्ति का मन शांत होता है।
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