वास्तुशास्त्र
यूं तो लोग घर बनवाते समय दिशाओं का ध्यान रखते हैं, लेकिन पूजा करते समय किसी का भी ध्यान दिशा की तरफ नहीं जाता है। परिणाम यह होता है कि पूजा अधूरी रह जाती है और उसका फल नहीं मिलता है। अगर मंदिर में पूजा करते समय भी दिशा का ख्याल रखा जाए तो ईश्वर की कृपा आप पर हमेशा बरसती रहेगी। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-
 
1. आमतौर पर पूजा करते समय जातक का मुँह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
 
2. वास्तु ग्रंथों में कहा गया है कि धन प्राप्ति के लिए उत्तर दिशा एवं ज्ञान प्राप्ति के लिए पूर्व दिशा की ओर मुँह करके की गई पूजा चमत्कारिक लाभ देती है। हालांकि हर दिशा के अलग-अलग देवता होते हैं, इसलिए उस क्षेत्र के देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उस दिशा विशेष में ही पूजा करना अच्छा रहता है।
 
3. देवी माँ और हनुमान जी की पूजा दक्षिण दिशा में, धन की दिशा उत्तर में गणेश, लक्ष्मी जी एवं कुबेर की व उत्तर-पूर्व दिशा में शिव परिवार, राधा-कृष्ण और पूर्व दिशा में श्री राम दरबार, भगवान विष्णु की आराधना एवं सूर्य उपासना करने से परिवार में सौभाग्य की वृद्धि होती है।
 
4. उत्तर, उत्तर-पूर्व दिशा में भगवान धनवंतरि और नदियों की पूजा-आराधना करने से अच्छे स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति होती है।
 
पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम में माँ सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान में बढ़ोत्तरी होती है। पश्चिम दिशा में गुरु, महावीर स्वामी, भगवान बुद्ध की पूजा शुभ फल प्रदान करती है।
 
5. संबंधों और जुड़ाव की दिशा दक्षिण-पश्चिम में पूर्वजों की पूजा घर में सुख-समृद्धि लाती है।