chitthi aayi hai author views
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Author Views: नववर्ष पर गृहलक्ष्मी का जनवरी 2026 ‘हेल्थ एंड फिटनेश मंत्र’ अंक सबकी हेल्थ सुधारता, फिट रखता, बहुत लाभप्रद रहा। ‘सर्दियों में एथनिक फैशन’, ‘महिलाओं के लिए हार्मोन स्वास्थ्य’ ‘स्क्रीन स्ट्रेस से जूझती महिलाएं’, ‘गाजर का हलुआ बनाने के 5 नायाब तरीके’ तथा ‘स्वेटर स्टाइलिंग के स्मार्ट तरीके’ आदि सभी लेख रुचिकर लगे।
पुरातन काल से आज तक अंधविश्वास की कुरीतियां समाज में अपने पैर पसारे हुए है। अंध-भक्ति से भी लोग पथ-भ्रष्ट हो रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि अंधविश्वास की प्रवृत्ति अज्ञान ग्रस्त, अशिक्षित एवं भावुक लोगों में ही पाई जाती है। परंतु ऐसा देखा गया है कि प्रबुद्ध और पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी
लोग भी किसी के छींक देने, बिल्ली के रास्ता काटने या कुत्तों के कान फटफटा देने
पर अपना किसी जरूरी काम पर जाना भी स्थगित कर देते हैं।

चाहे उन्हें कितनी भी बड़ी हानि क्यों न उठानी पड़े। साक्षरता बढ़ने पर ऐसी भ्रांतियों पर कमी आनी चाहिए थी परंतु इस अंधविश्वास का दलदल और गहरा होता चला जा रहा है। मेरे विचार से यह सब
मानसिक पिछड़ापन का नहीं अपितु कुछ मानसिक विकारों का परिणाम हो सकता है, जो शताब्दियों से हमारी मनोभूमि पर राज कर रहा है, जिसकी वजह से हमारे समाज को बहुत हानियां उठानी पड़ती हैं। विवेकशीलता का तकाजा है कि अंधविश्वास को जीवन और समाज के हर क्षेत्र से निरस्त कर स्वस्थ मान्यताओं और आदर्श परंपराओं को प्रतिष्ठित किया जाए। इसके लिए जागरूक बुद्धिजीवियों को आगे आने की तत्परता दिखानी चाहिए।

  • सुरभि वरुण गोयल
    ग्रेटर नोएडा-वेस्ट, (उ.प्र.)

कई बार जिंदगी में हम छोटी बातों को भूल जाते हैं और उसका नुकसान हमें भुगतना पड़ता है लेकिन अपनी आदत से मजबूर रहते हैं। जैसे अक्सर घर की लाइट, पंखा बंद करना भूल जाते हैं या
जरूरी कागज कहां रख दिए, बिजली का बिल जमा करना हो या दवाई का समय ऐसे में छोटे नोट्स काफी मददगार होते हैं, जैसे- दरवाजे पर कृपया स्विच ऑफ लिखकर लगा दें, जिससे निकलने के
पहले याद आ जाता है वैसे ही रसोई और पलंग के कॉर्नर पर दवाई लेनी है समय के साथ लिख कर रखने से याद आता है और बिल जमा करना है जरूरी कागज कहां रखे है ये भी दराज में लिख कर
लगाने से उन्हें ढूंढ़ने की मेहनत बच जाती है और समय भी बच जाता है। खाने में क्या बनाना है या सामान खत्म हो गया तो तुरंत लिख दें, जिससे ऑर्डर करना या लाना आसान हो जाता है नहीं तो कई बार हम बनाने बैठते है और वो सामान नहीं होता। इस तरह नोट्स के जरिए हम अपनी जिंदगी को बेहतर कर सकते हैं अब तो मोबाइल के जरिए भी नोट्स बना सकते हैं पर कई उपयोग के लिए नोट्स ही बेहतर है।

  • -अंजना ठाकुर
    ग्वालियर (म.प)
Grehalakshmi teaches us lessons
Grehalakshmi teaches us lessons

नववर्ष 2026 के प्रथम अंक में प्रकाशित ‘आपकी चिठियाँ’ से बहुत-सी प्रेरणादायक सीख मिली है। ‘प्रदूषण से लड़ने वाली थाली’, व्यंग्य- ‘सेल्फी का बुखार’, सेल्फी लेकर पोस्ट करने वालों के लिए एक चेतावनी है कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। जरा हटके में भारतीय सेना के जवानों का बर्फ में क्रिकेट खेलना हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। वे हमारी रक्षा के लिए हंसते-हंसते कष्ट सहते हैं, वहीं देश के कुछ व्यक्ति और व्यवसायी खाद्य पदार्थों एवं दवाइयों में मिलावट कर तथा खराब सड़कों का निर्माण कर देश से धोखा करते हैं। महिलाओं के लिए ‘हार्मोनल स्वास्थ्य’ अत्यंत उपयोगी विषय है। ‘स्क्रीन टेस्ट से जूझती महिलाओं’ पर आधारित लेख जैसे उपयोगी विषय पत्रिका को और अधिक सार्थक बनाते हैं। ‘महिला फिटनेस- अब खुद को दे पा रही आत्मनिर्भरता’ जैसे लेख स्त्री स्वास्थ्य के प्रति सजगता को और तीव्र करते हैं। गृह लक्ष्मी की रसोई की विविधता नए-नए स्वाद बनाने और चखने का अवसर प्रदान करती है। साथ ही विभिन्न प्रकार की जानकारियां भी उपलब्ध कराती है, जैसेट्रेवल के बारे में शिक्षा, धर्म और वास्तु संबंधित आदि। ऐसी खूबसूरत और उपयोगी पत्रिका की पाठिका होने पर गर्व है।

-मनिकना मुखर्जी
झांसी (उ.प्र.)

गृहलक्ष्मी का नये साल का पहला अंक ‘हेल्थ एंड फिटनेस मंत्रा स्पेशल था। नये साल में नये सिरे से फिटनेस के नये मंत्र जो एकदम नये तो नहीं थी, मगर लम्बे अरसे के बाद रिपीट होने से नये ही
लगे। बस एक शिकायत है कि शीर्षक में ‘मंत्र’ को कृपया ‘मंत्रा’ न कहें। मंत्र हिन्दी का ही शब्द है उसे मंत्र ही रहने दें। हेल्थ एंड फिटनेस के संदर्भ में महिलाओं के लिये आपने जिस नये फिटनेस फॉर्मूले
की बात कही है वो काफी उपयोगी से हैं। इस अंक के एक अन्य आलेख में महिलाओं के सुरक्षित भविष्य के लिये आर्थिक सेहत को कुंजी निरुपित करना भी एक अच्छा विश्लेषण रहा। महिलाओं
के स्वास्थ्य से जुड़ा आलेख- ‘पीरियड्स से मेनोपॉज तक हार्मोन की भूमिका’ भी ज्ञानवर्द्धक है। इस बार गुहलक्ष्मी में वर्ष 2025 में विभिन्न क्षेत्रों में जिन महिलाओं ने असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं उनका संकलन भी सराहनीय है। हमेशा की तरह सभी स्थाई स्तम्भ भी पठनीय सामग्री से भरपूर हैं।

  • संध्या दुबे, भोपाल (म.प्र.)

सुरभि वरुण गोयल (ग्रेटर नोएडा-वेस्ट)