अग्रणीय है ‘गृहलक्ष्मी’
Author Views: आज के डिजिटल युग में सभी के हाथ में मोबाइल है चाहे वह डेढ़ साल का बच्चा हो या 75 वर्ष के बुजुर्ग, 24 घंटे में 18 घंटे इी से चिपके रहते हैं। न्यूज पेपर व पत्रिकाएं भी ऑन लाइन हो गई और ज्यादातर पत्रिका पत्रिकाओं का प्रकाशन बंद हो गया करोना काल के समय से। आज भी कुछ महिला पत्रिका रह गई हैं जैसे- पिछले 33-35 वर्षों से निरंतर प्रकाशित हो रही है, उनमें से एक अग्रणीय है ‘गृहलक्ष्मी’ अपने नाम के अनुसार यह ‘सभी घरों की गृहलक्ष्मी’ है। इसका हर अंक नई ताजगी, उमंग व ऊर्जावान होता हरेक अंक विशेष
होता है। जैसे- मार्च 2025 का ‘समर ब्यूटी व मेकअप स्पेशल’ पूरा कोर्स ब्यूटी श्रंृगार पर आधारित था। मैं पुरुष होते हुए भी बंबई, केरल व दिल्ली से प्रकाशित सभी महिला पत्रिका पढ़ता हूं व संग्रह भी करता हूं। मैं
पिछले 30 वर्षों से गृहलक्ष्मी का पाठक हूं। पत्रिका की ओर प्रगति के शुभेक्षा आपका पाठक।
- सुशील कुमार गुप्ता
दिल्ली
ज्ञानवर्धक है गृहलक्ष्मी
गृहलक्ष्मी पत्रिका का मैं पिछले 25 सालों से पाठक रहा हूं। यह पत्रिका महिला/ पुरुष दोनों के लिए समान रूप से ज्ञानवर्धक रही है। आज के भागदौड़ की जिंदगी में होने वाले शारीरिक व मानसिक समस्याओं से कैसे निजात पाई जाए इसका बखूबी समाधान गृहलक्ष्मी के लेखों से मिलता है। इतने सालों के जुड़ाव के बीच मैंने गृहलक्ष्मी पत्रिका को सकारात्मक उद्देश्यों से भटकते नहीं जाना।
इसके लेख, कहानियां समाज से जुड़ी होती है, जो लोगों को सही दिशा देती है। आज का युवा वर्ग अपनी जड़ों को खोता जा रहा है। ऐसे में गृहलक्ष्मी जैसी पत्रिका नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देती है दो सराहनीय है। आज की सबसे बड़ी समस्या तलाक दर में वृद्धि होना है। बड़े-बड़े सेलिब्रिटी भी तलाक देकर समाज में जो मिसाल पेश कर रहे हैं वह चिंता का विषय है। इस पर सभी को ध्यान देना होगा।
श्रीप्रकाश श्रीवास्तव
वाराणसी (उ.प्र.)
पथ-प्रदर्शक है गृहलक्ष्मी
सबसे पहले चैत्र नवरात्रि की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं! गृहलक्ष्मी हम सबकी साथी है। जो कोई नहीं करता वह गृहलक्ष्मी कर दिखाती है। शादीशुदा महिलाएं जो अपनी जिंदगी से, घर-गृहस्थी के भार से थक चुकी होती हैं उन्हें भी मौका देने, उनमें विश्वास का रंग भरने का काम भी गृहलक्ष्मी ही करती आ रही है। इसी कारण मेरे मन में कुछ सवाल उठते रहे हैं। जब गृहलक्ष्मी पत्रिका ने हमें मौका दिया है कि हम अपनी अपनी बातों को गृहलक्ष्मी के साथ शेयर कर सकते हैं तो मैं यहां पर अपनी और अपने जैसी कुछ महिलाओं की बात करना चाहती हूं। आज हर किसी के हाथ में मोबाइल है। हम एक मोबाइल जोंबी की तरह बस फेसबुक या इंस्टाग्राम खोलकर स्क्रीन के रील से चिपके रहते हैं। न जाने उसमें हमें क्या दिखता है एक नशे की तरह हम अपना समय और नेटवर्क दोनों बर्बाद करते हैं। मैं पत्रिका से यह आग्रह करना चाहती हूं कि हम सभी महिलाओं के लिए ऐसी जानकारी दीजिए ताकि हम रील में समय गंवाने के बजाय उसका सदुपयोग कर सके। घर बैठे
स्वरोजगार के विकल्प खोल सकें। इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब आदि से कई घरेलू महिलाओं को काम करते हुए देखती हूं तो मुझे भी और मेरे साथियों को भी इसके बारे में जानने की बड़ी इच्छा होती है मगर इस बारे में हमें जानकारी ही नहीं है। अगर इस संबंध में एक अच्छा लेख और जानकारी प्रदान करें तो हमारे लिए बड़ा ही उपयोगी होगा। सिर्फ घर के कामों और घर की चारदीवारीयों तक बंधे रहने के कारण मैं और
हम जैसे महिलाएं कितनी शारीरिक और मानसिक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इससे अच्छा होगा कि हम भले ही कम बजट में अपना काम शुरू करें और अपने आपको फाइनेंशली सपोर्ट करें।
- सीमा प्रियदर्शिनी सहाय
दिल्ली
गर्मियों का उपहार है मार्च अंक

गृहलक्ष्मी का मार्च अंक सभी के लिए बेहद उपयोगी अंक है। गर्मियों आते ही हमें अपने बाल और चेहरे की चिंता सबसे ज्यादा होती है। गर्मियों में जहां चेहरे धूप से झूलस जाते हैं वहीं बाल भी चिपचिपे और गंदे हो जाते
हैं। इस समस्या का समाधान इस अंक में बताया गया है। इसके अलावा रितिका बंसल का लेख पेट की परेशानी से दूर रहने के लिए मसालेदार खाने से दूर रहें। हमारी खराब जीवनशैली का सबसे ज्यादा असर हमारी पेट पर ही पड़ता है इ सलिए अपने पेट को स्वस्थ रखने के लिए मसालेदार और जंक फूड से दूरी ही सही है। हर बार की तरह इस बार भी कहानी शिक्षाप्रद और समाज को नई दिशा दिखाने वाली है। एक
शब्द में कहें तो गर्मियों का उपहार है मार्च अंक।
ज्योति चौधरी
भिवाड़ी (राजस्थान)
फैशन और स्टाइल का पैकेज है गृहलक्ष्मी का ये अंक
हर बार की तरह इस बार फिर गृहलक्ष्मी ने अपने इस अंक में फैशन, स्टाइल और हेल्थ सभी तरह के आर्टिकल को इस अंक में शामिल किया गया है। महिलाओं के लिए ये अंक पूरा पैकेज है। इसे पढ़कर वो अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखने के साथ ही अपने घर को भी सजा सकते हैं। कहानियों के अलावा इसमें ब्यूटी के नये ट्रेंड से भी महिलाओं को रू-ब-रू करवाया है। ये अंक पूरी तरह महिलाओं के लिए शिक्षाप्रद है। मेरे
पूरे परिवार को गृहलक्ष्मी मैगजीन का बेसब्री से इंतजार रहता है।
- स्वाति गुप्ता
शाहदरा (दिल्ली)
पुरस्कृत पत्र
योति चौधरी, भिवाड़ी (राजस्थान)
