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छठ पूजा का पर्व सदियों से भारतीय संस्कृति और इतिहास का हिस्सा रहा है। रामायण से लेकर महाभारत तक में इसका जिक्र है। हर युग में छठ पूजा को लेकर एक मान्यता जुड़ी है।
Chhath Puja Story: भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है छठ पूजा। हिंदू पंचांग के अनुसार इस पर्व की शुरुआत कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानी 5 नवंबर, 2024 से होगी। छठ पूजा का समापन अष्टमी तिथि यानी 8 नवंबर, 2024 को होगा। सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना के इस पावन पर्व की तैयारियां महिलाओं के साथ ही पुरुष भी बहुत ही जोर शोर से करते हैं। मान्यता है कि पूरी श्रद्धा से छठ पूजा करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। यह पर्व सदियों से भारतीय संस्कृति और इतिहास का हिस्सा रहा है। रामायण से लेकर महाभारत तक में इसका जिक्र है। हर युग में छठ पूजा को लेकर एक मान्यता जुड़ी है। आइए जानते हैं छठ पूजा का इतिहास।
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सतयुग में माता सीता ने की थी छठ पूजा

पौराणिक कथाओं के अनुसार सतयुग से ही छठ पूजा की शुरुआत हुई है। मान्यताओं के अनुसार 14 वर्ष के वनवास के बाद जब भगवान श्री राम अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने ऋषि-मुनियों से सलाह ली। ऋषि मुनियों के आदेश पर भगवान श्रीराम ने राजसूय यज्ञ करने का फैसला लिया। मान्यता है कि उस समय ऋषि मुद्गल ने मां सीता पर गंगाजल छिड़क कर उन्हें पवित्र किया। साथ ही माता सीता को कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने के लिए कहा। ऋषि मुद्गल के आदेशानुसार माता सीता ने छह दिनों तक सूर्य देव की पूजा-अर्चना की। इसी पर्व को छठ पूजा के रूप में मनाया जाने लगा।
पांडवों को मिला था खोया हुआ राज्य
माना जाता है कि द्वापर युग में पांडवों की पत्नी द्रौपदी और दानवीर कर्ण ने भी छठ पूजन किया था। माना जाता है कि महाभारत काल में पांडवों और द्रौपदी ने अपने खोए हुए मान सम्मान, राज्य और वैभव को फिर से प्राप्त करने के लिए छठ पूजन किया था। जिसके बाद पांडवों और द्रौपदी की पूजा सफल हुई और वे सभी फिर से हस्तिनापुर लौटे। जहां उन्हें अपना राज्य फिर से मिला। इसी के साथ छठ पूजन को लेकर एक और कथा भी प्रचलित है। कुछ मान्यताओं के अनुसार छठ पूजन की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। इसकी शुरुआत दानवीर कर्ण ने की थी। कर्ण सूर्यपुत्र होने के साथ-साथ भगवान सूर्य के परम भक्त थे। वे अपने इष्ट को प्रसन्न करने के लिए नियमित रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देते थे। यहीं से छठ पूजन और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा शुरू हुई। ऐसा भी माना जाता है कि सूर्य के आशीर्वाद से ही कर्ण एक महान योद्धा बने थे।
कलयुग में ऐसे हुई शुरुआत
कलयुग में छठ पूजा को लेकर एक अलग कहानी जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत बिहार के गया जिले में स्थित ‘देव’ नामक स्थान से हुई है। वर्तमान में ‘देव’ औरंगाबाद में है। मान्यता के अनुसार एक शख्स को कुष्ठ रोग हो गया था। इस रोग से मुक्ति पाने के लिए उसने कार्तिक मास की षष्ठी को सूर्य देव की उपासना की। इस उपासना के बाद वह शख्स एक दम ठीक हो गया। तभी से छठ पर्व मनाने की शुरुआत हुई और देश-विदेश के लोग पूरी श्रद्धा से इसे मनाते हैं।
