Summary: 60 साल पहले बनी पहली छठ पूजा की फिल्म, बॉलीवुड सिंगर्स की आवाज़ में गूंजी महिमा
छठ पर्व की महिमा को पहली बार बड़े पर्दे पर पेश करने वाली फिल्म ‘भैया’ 1961 में रिलीज़ हुई थी। इस फिल्म में छठ पूजा के अनुष्ठानों और गीतों को दर्शाया गया, जिसमें लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, आशा भोंसले और अन्य मशहूर सिंगर्स ने अपनी मधुर आवाज़ से जान डाल दी थी।
Chhath Puja Film: पटना और पूरे बिहार में छठ का उत्साह देखने लायक है। शहर-गाँव में छठी मैया के गीतों की धुनें गूंज रही हैं और माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। आज से छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से हो गई है। बिहार के हर कोने में छठ के गीतों ने वातावरण को सुगंधित और रंगीन बना दिया है। मठ-मंदिरों में भी सुबह की शुरुआत देवी के गीतों से होती है। क्या आप जानते हैं कि करीब 60 साल पहले इस पर्व पर एक फिल्म भी बनी थी? उसमें मशहूर गायकों ने छठ के गीत गाए थे और लोगों ने इस पर्व का महत्व और करीब से जाना। अगर यह नहीं जानते, तो आइए जानते हैं इसके बारे में।
60 साल पहले बड़े पर्दे पर छठ पूजा की झलक

फिल्मों में छठ पूजा को दिखाने का इतिहास 60 साल से भी ज्यादा पुराना है। बड़े हिंदी फिल्म स्टार्स के साथ काम कर चुके डायरेक्टर फणी मजूमदार ने पहली बार छठ पूजा को बड़े पर्दे पर पेश किया। करीब 64 साल पहले, 1961 में उनकी फिल्म ‘भैया’ रिलीज़ हुई थी। नालंदा चित्र प्रतिष्ठान के बैनर तले बनी यह पहली फिल्म मगधी भाषा में थी, लेकिन इसे इतनी सरल भाषा में बनाया गया था कि हिंदी भाषी दर्शक भी आसानी से समझ सकते थे।
फिल्म की भावुक कहानी
फिल्म में तरुण बोस, विजय चौधरी, पद्मा खन्ना के साथ हेलेन, शुभा खोटे, अचला सचदेव और रामायण तिवारी जैसे प्रसिद्ध कलाकार भी शामिल थे। ‘भैया’ की कहानी ऐसे लड़के की है जो अपने सौतेले भाई के प्यार के लिए अपने प्रेम को कुर्बान कर देता है। इस फैमिली ड्रामा की शुरुआत ही छठ पूजा से होती है।
फिल्म में कई मशहूर सिंगर्स ने गाया था गाना
फिल्म ‘भैया’ में छठ पूजा के सीक्वेंस के साथ ही मधुर गीतों की झलक भी देखने को मिलती है। इस फिल्म में लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, आशा भोंसले, उषा मंगेशकर, कमल बरोट और मन्नाडे जैसे मशहूर सिंगर्स ने आवाज दी थी। फिल्म की शुरुआत छठ पूजा के उस दृश्य से होती है जिसमें गीत “सूपवे नरियरवे बझलीं मोरी मैया…” गाया जाता है, जिसका अर्थ है कि छठ मैया सूप और नारियल जैसी चीजों में खुश हो जाती हैं। यह गीत इस कथा पर आधारित है कि छठ का व्रत मां ने भी किया था। इसे कंपोज़ किया था चित्रगुप्त ने और इसके लिरिक्स विंध्यवासिनी देवी और प्रेम धवन ने लिखे थे।
छठ पूजा के चारों दिन का क्यों है इतना महत्व
छठ पूजा चार दिनों तक मनाई जाती है और हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है। पहले दिन नहाय-खाय होता है, जिसमें व्रती शुद्धिकरण करते हुए स्नान करते हैं और सरल, शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। दूसरे दिन खरना होता है, जिसमें व्रती उपवास रखते हुए दिनभर भूखे रहते हैं और शाम को गुड़ और केले का प्रसाद लेकर व्रत खोलते हैं। तीसरे दिन संध्या अर्घ्य होता है, जब सूरज को अर्घ्य देने के लिए घाट पर गंगा या किसी नदी के किनारे विशेष पूजन और प्रसाद के साथ शाम के समय व्रती खड़े होते हैं। चौथे और अंतिम दिन उषा अर्घ्य होता है, जिसमें व्रती सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देकर अपने व्रत का समापन करते हैं

