बदलाव की दूत ”रहमान बेगम लसकर”

सुबह 9 बजे से उपकरणों को स्टरलाइज करना, ऑपरेशन थियेटर की सफाई, मरीजों की देखभाल और महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी देखभाल के साथ-साथ परिवार नियोजन के बारे में जागरूक करना। पिछले 27 वर्षों से इसी दिनचर्या के साथ जिंदगी को जिंदादिली से जी रही 47 वर्षीय रहमान बेगम लसकर असम के हैलाकांदी सिविल हास्पिटल में सहायक नर्स और मिडवाइफ (एएनएम) के रूप में कार्यरत हैं।

उपलब्धियां और मूल मंत्र
1-उनका मानना है कि महिलाओं को जागरूक होना जरूरी है। गर्भनिरोधक के विकल्प के चयन का अधिकार महिलाओं के हाथों में दिये जाने के मामले में उन्होंने काफी बदलाव देखे हैं।

2-वो खुद बदलाव की दूत बनकर संतुष्ट हैं और उनका मानना है कि महिलाओं को परिवार नियोजन के संबंध में जानकारियां देने और गर्भनिरोधक उपलब्ध कराने से उनके जीवन में बदलाव आ सकता है।

3-महिलाओं को सुरक्षित विकल्प के तौर पर परिवार नियोजन और खास तौर पर आईयूसीडी के बारे में रहमान बेगम ने जागरूक किया जिससे परिवार नियोजन के नाम पर महिलाओं का जीवन खतरे से बचाया जा सके।

4-उन्होंने आईयूएसडी को स्पेसिंग में एक सुरक्षित और रिवर्सिबल विधि के रूप में प्रचारित किया और आईयूएसडी प्रतिस्थापन में विशेषज्ञता हासिल की है।