Spa For Relaxation: आज के भागमभाग और बिजी लाइफस्टाइल में खुद को रिलेक्स करने के लिए हर कोई अपने अंदाज में नए-नए तरीके अपनाता है जैसे-मैडीटेशन, योगासन, म्यूजिक, वॉक। ऐसी ही एक नेचुरल थेरेपी है-स्पा जो विभिन्न तरह की बॉडी मसाज, स्टीम बाथ और मेंटल हीलिंग के जरिये दी जाती है। स्पा के अलग-अलग ज़ोन्स होते हैं जिनका मकसद बॉडी को रिलेक्स करना, रेजुविनेट करना और हैल्दी बनाना है। व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से स्पा ट्रीटमेंट दिया जाता है। केवल बॉडी रिलेक्सेशन और शारीरिक खूबसूरती बढ़ाने के लिए स्पा लेना चाहता है या फिर किसी बीमारी के निदान के लिए। स्वास्थ्य और सौंदर्य को नेचुरल तरीके से स्वस्थ रखने में मदद करता है।
क्या हैं फायदे

स्पा थेरेपी व्यक्ति के मन-मस्तिष्क को तरोताजा करके ऊर्जा प्रदान करती है और ‘फील गुड‘ की फीलिंग कराती है। शरीर पर बढ़ती उम्र के असर को कम करती है और सौंदर्य में निखार लाती है। यह तुरंत स्फूर्ति उत्पन्न करने वाला बॉडी रब है जो त्वचा को पोषण प्रदान करने के साथ-साथ ताजगी भी देता है। विभिन्न थेरेपी के जरिये शरीर से सेरोटोनिन हार्मोन निकलता है जो व्यक्ति को हैल्थ संबंधी कई समस्याओं में भी राहत महसूस कराता है। स्पा मूलतः शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है। जिससे शरीर के विभिन्न सेल्स में ऑक्सीजन पहुंचाने और शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों या फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालने का काम करता है। यानी शरीर केा डिटॉक्सिफाई कर शरीर को स्वस्थ रखता है।
इंद्रियों को करे एक्टिवेट
थेरेपिस्ट विभिन्न थेरेपी के जरिये व्यक्ति की छहों इन्द्रियों या सेन्स (सूंघना, देखना, सुनना, टेस्ट, टच, फील करना) को एक्टिवेट करते हैं और उन्हें पॉजीटिव एनर्जी से भर देते हैं। जिससे वे टेंशन, थकान भूल कर रिलेक्स हो जाते हैं और आसानी से सकारात्मक जिंदगी की ओर प्रवृत होते हैं। स्पा ट्रीटमेंट में व्यक्ति को सबसे पहले और आखिर में पिलाई जाने वाली हर्बल चाय से उसे टेस्ट यानी जीभ की इन्द्रियों को एक्टीवेट किया जाता है।
जिस कमरे में स्पा किया जाता है, उसका एनवायरनमेंट व्यक्ति पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालता है। विजुअल एनवायरनमेंट में वहां लगी सीनरी, फोटो, ग्रीनरी, मद्धम रोशनी और ऊपर से लाइट म्यूजिक या चिड़ियों या जल तरंग जैसी नेचुरल साउंड व्यक्ति की दृश्य-श्रव्य इंद्रियों पर कूलिंग और स्मूदिंग प्रभाव डालती हैं। यहां तक कि थेरेपिस्ट की आवाज और बोलने का लहजा भी आपको रिलेक्स करने में काफी मायने रखती हैं। व्यक्ति की स्मेलिंग पॉवर को वहां डेकोरेट किए फूलों, अरोमा कैंडल्स, डिफ्यूजर, मसाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एसेंशियल ऑयल की भीनी खुशबू मजबूत करती हैं। इनके अतिरिक्त मसाज, प्रेशर या स्पा की विभिन्न थेरेपी से व्यक्ति की टच और फील सेंस को रिलेक्स किया जाता है।
स्पा की विभिन्न थेरेपी

स्पा मसाज: मसाज या मालिश स्पा में प्रमुख है। यह करीब 45 मिनट से घंटा भर की जाती है। आम मसाज से अलग थेरेपिस्ट स्पा मसाज में व्यक्ति की छहों इंद्रियों को एक्टीवेट करता है जिनसे बीमारियों का इलाज किया जाता है। मसाज के लिए गुलाब, चमेली, लैवेंडर, नीम, तिल के ऑयल के साथ जड़ी-बूटियां मिलाकर तैयार किए ऑयल से मसाज की जाती है। बॉडी के अलग-अलग प्रेशर जोन्स पर समुचित दबाव डालकर व्यक्ति को रिलेक्स किया जाता है।
इनमें मुख्य हैं-स्वीडिश मसाज (बॉडी पर गोलाई शेप के मूवमेंट्स में कम प्रेशर से), बेलिनिस मसाज (बॉडी के विभिन्न एक्यूप्रेशर पाइंट्स पर ज्यादा प्रेशर के साथ), इंडोनेशियन मसाज (मीडियम प्रेशर के साथ), थाई मसाज (पाउडर के साथ), डीप टिशू मसाज (काफी ज्यादा प्रेशर के साथ)।
पंचकर्मा थेरेपी: भारत की कैराली स्पा थेरेपी पंचकर्मा के पूर्वकर्म और प्रधानकर्म दो भाग हैं। पूर्वकर्म कराना अनिवार्य है। स्नेहन में घी या तेल पिलाकर और मालिश कर दोषों को दूर किया जाता है, तो स्वेदन में शरीर से पसीना निकाल कर बीमारियां दूर की जाती हैं।
प्रधानकर्म में ये क्रियाएं कराई जाती है- वमन जिसमें दवा या काढ़ा पिलाकर उल्टी कराई जाती है। सर्दी-जुकाम, बुखार या सांस संबधी बीमारियों कफ या पित्त से होने वाले रोगों का इलाज किया जाता है। विरेचन में पित्त के इलाज से पेट की बीमाारियों का इलाज किया जाता है। शुष्क चीजों से एनिमा देने की प्रक्रिया आस्थापन बस्ति में पेट के वायु संबंधी दोष दूर होेते हैं। चिकने पदार्थो से बनाए एनिमा का इस्तेमाल कर अनुवासन बस्ति प्रक्रिया से पेट की बीमारियों में राहत मिलती है। अलग-अलग तेल सुंघाने और माथे और सिर पर तेल की धार डालने की शिरोविरेचन या शिरोधारा प्रक्रिया से आंख-नाक-कान की बीमारियां, नींद न आना या तनाव जैसी बीमारियों में राहत मिलती है।
लावा शैल थेरेपी: ज्वालामुखी के लावा से बने शैल से बॉडी मसाज की जाती है। जब वेन्स में ब्लॉकेज होने पर ब्लड का फ्लो ठीक से नहीं हो पाता और व्यक्ति की बॉडी का टेम्परेचर एक जैसा नही रहता। बॉडी पार्ट्स में अलग-अलग टेम्परेचर महसूस होता है जिससे बॉडी पेन, थकावट रहती है। इससे बॉडी टेम्परेचर एकसमान हो जाता है।
हॉट स्टोन या चक्र थेरेपी: बॉडी के विभिन्न चक्रों में आए असंतुलन की वजह से बॉडी पेन, पेट दर्द जैसी समस्याएं होती हैं। इसमें बेसाल्ट स्टोन को 120-130 डिग्री टेम्परेचर पर पानी में गर्म करके तेल में डुबोया जाता है। इनसे पीठ और रीढ़ की हड्डी के एक्यूप्रेशर पाइंट्स पर हल्का दबाव देते हुए 30 मिनट मसाज की जाती है। फिर इन्हें रीढ़ की हड्डी पर 15-20 मिनट तक रखा जाता है।
एक्यूपंक्चर स्पा थेरेपी: बॉडी में जकड़न, पेन, हाथ-पैरों में कोआर्डिनेशन की कमी, सर्वाइकल, हिप बोन, साइनस, नस चढ़ने जैसी स्थिति में यह थेरेपी कारगर है। व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से छोटी-छोटी सुइयां एक्यूपाइंट्स स्किन में लगाई जाती हैं। इनसे बॉडी में गर्मी और एनर्जी का संचार होता है।
वॉटर स्टीम बाथ: स्किन प्रॉब्लम वाले व्यक्ति को एक मंजी पर लिटा दिया जाता है। एक बड़े टब में कई तरह की हर्ब्स डालकर पानी उबाला जाता हैै। इस टब को मंजी के नीचे रख दिया जाता है और 25-30 मिनट के लिए स्टीम दी जाती है। इससे निकलने वाली स्टीम से उस व्यक्ति के स्किन पोर्स खुल जाते हैं और स्किन की डीप क्लीनजिंग हो जाती है।
सोना स्टीम बाथ: इसी तरह व्यक्ति को स्टीम चैंबर में बिठाया जाता है। कमरे में कोयले से पत्थरों को गर्म किया जाता हैै जहां उन्हें 25-30 मिनट तक स्टीम दी जाती है।
अरोमा थेरेपी: इसमे तिल के तेल में यूकलिप्टस, गुलाब, लैवेंडर, चमेली जैसे खुशबूदार अरोमा ऑयल मिलाकर मसाज की जाती है। स्पा के दौरान इन फूलों की कैंडल भी जलाई जाती हैं जिनकी भीनी खुशबू से व्यक्ति रिलेक्स होता है।
मड थेरेपी: स्किन प्रॉब्लम्स, वेन्स में ब्लॉकेज की वजह से ठीक से ब्लड सर्कुलेशन न होना, बॉडी पेन, थकावट आदि में यह थेरेपी दी जाती है। मिट्टी में नीम की पिसी पत्तियां और दूसरी जड़ी-बूटियां मिलाकर बॉडी पर लगाई जाती है। इनमें डीप सी मड, मिनरल्स से भरपूर डेड सी मड, इज़राइल और मुल्तानी या गाची मिट्टी होती है।
पोटली थेरेपी: इसमें नीम, चंदन जैसी अलग-अलग हर्ब्स को मिलाकर सूती कपड़े में बांधकर पोटली बनाई जाती है। इसे नियत टेम्परेचर पर हल्का गर्म किया जाता है। बॉडी की सिंकाई और अलग-अलग प्रेशर पाइंट्स पर दबाव देकर मसाज की जाती है।
बॉडी रैप: दूध में फलों का पल्प, जड़ी-बूटियों का गाढ़ा पैक बॉडी पर लगाकर 25-30 मिनट के लिए सूती कपडें से लपेटा जाता हैै। पैक बॉडी से विषैले पदार्थ खींच लेता है और बॉडी को डिटॉक्सिफाई करता है। गर्म पानी में भीगेे कपड़े से पोंछकर एसेंशियल ऑयल से मसाज की जाती है।
इंफेंट बेबी मसाज: 12 साल की उम्र से पहले स्पा नहीं कराना चाहिए क्योंकि इस समय बच्चों की स्किन और बॉडी काफी नाजुक होती है। उन्हें नुकसान हो सकता है। 12-18 साल की उम्र के व्यक्ति केवन सोना बाथ, मसाज, शिरोघारा ले सकते हैं।
आजकल समाज में एकल परिवार बढ़ने से इंफेंट बेबी स्पा का चलन भी बढ़ रहा है। 1-6 महीने तक के बच्चों को थेरेपिस्ट मसाज दे रहे हैं जिससे उनकी हड्डियां मजबूत बनती हैं और विकास अच्छा होता है।
स्पा कितने अंतराल पर कराएं और क्या है रेट
स्पा एक लग्जरी ट्रीटमेंट होने के बावजूद महीने में एक ही बार कराना ठीक है। 12 सिटिंग का पैकेज भी दिया जाता है। दी जाने वाली थेरेपी के हिसाब से इनकी कीमत तय की जाती है। इनकी कीमत 1200 रुपये से 12,000 रुपये तक होती है।
रखें सावधानी
आपके लिए कौन-सी थेरेपी ठीक रहेगी-इस बारे में स्पा थेरेपिस्ट से बात करें। अगर आपको किसी चीज से एलर्जी है तो थेरेपिस्ट को जरूर बताएं। स्पा ट्रीटमेंट से पहले हैवी डाइट या एल्कोहल न लें जिससे स्पा कराते हुए आपको उल्टी वगैरह न आ जाए। स्पा के दौरान जूलरी या मंहगी एक्सेसरीज न पहनें। आपका ध्यान न भटके, इसके लिए अपना मोबाइल स्विच ऑफ मोड पर रखें। बॉडी को लंबे समय तक रिफ्रेश फीलिंग देनी है तो जहां तक हो सके स्पा से पहले और बाद कम से कम एक घंटे तक धूप में न जाएं। बाजार, भीड़भाड़ वाली जगह पर न जाएं। लाउड म्यूजिक न सुनें। उस दिन या कम से कम 6 घंटे तक हैवी या गरिष्ट भोजन न करें।
(ब्यूटी एक्सपर्ट आश्मिन मुंजाल, स्टार अकेडमी, नई दिल्ली )
