World Consumer Rights Day: आज की आधुनिक जीवन-शैली में उपभोक्तावादी संस्कृति के चलते जहां हर कोई उपभोक्ता है, चाहे वह बच्चा हो या बड़ा। लेकिन जाने-अनजाने वे आयदिन ठगी का शिकार भी होते जा रहे हैं जिन्हें बड़ी चालाकी से ठगता है-दुकानदार। इसकी पीछे बड़ी वजह है- उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी। मुनाफाखोरी ने उपभोक्ताओ के लिए कई तरह की परेशानियां होती हैं । इसी को ध्यान में रखकर 15 मार्च को दुनिया भर में ‘ विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों से उनको जागरुक कराना, उन्हें शोषण, भेदभाव और अन्य प्रकार की अनुचित प्रथाओं से बचाना है
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वस्तुओं में मिलावट और निम्न गुणवत्ता की वजह से जहां उन्हें परेशानी होती है, वहीं सेवाओं में व्यवधान या पर्याप्त सेवा न मिलने से कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सेल के नाम पर समापन तिथि के बाद सामान बेच कर, सही तरीके से मूल्य प्रिंट न करके या उसे काट कर हाथ से लिख कर, डत्च् या अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक कीमत पर सामान बेच कर,वस्तुओं की पैकिंग पर दी गई जानकारी से अलग सामग्री पैकेट की भीतर होना, मिलावट के चलते सामान की गुणवत्ता और वजन-मापन में कमी करना, माप-तौल में गड़बड़ करना। ऊपर से दुकानदार टैक्स या वैट बचाने की बात कह कर पक्का बिल देने में भी आनाकानी करते हैं ताकि बाद में आप कोई शिकायत भी नहीं कर पाएं।
आप भी कुछ न कुछ खरीदने जरूर जाते होगे। अगर आप इस तरह होने वाली ठगी के प्रति जागरुक हैं और खरीदारी करते समय कुछ बातो का ध्यान रखें, तो धोखा खाने से बच सकते हैं-
1) पैकिंग वाली कोई भी चीज खरीदने से पहले उसके नाम और बनाने वाली कंपनी बारे में दिए गए पते आदि के विवरण की जांच जरूर करें। कई बार उस चीज का नाम और पैकिंग, रंग असल वस्तु से काफी मिलता-जुलता होता है। ऐसी नकली या मिलावटी वस्तु को पहचान न पाने के कारण आप धोखा खा जाते हैं।
2) उस चीज की निर्माण और समापन तिथि जरूर देखें। समापन तिथि खत्म होने पर वह चीज आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। अपनी सेहत से समझौता करके ऐसी चीज किसी भी कीमत पर न लें।
3) पैकेट पर उसकी मात्रा और कुल भार अवश्य देखें। अगर आपको किसी भी तरह का संदेह होता है तेा आप दुकानदार को चैक कराने के लिए कह सकते हैं। अगर वह वस्तु कुल भार से कम निकले तो आप उसे छोड़ दें।
4) ऐसे ही खरीदने से पहले उस वस्तु की सील जरूर चैक कर लें ताकि उसमें किसी तरह की मिलावट की आशंका न रहे। फिर अच्छी तरह सीलबंद वस्तु में नमी से दूर रहती है और न तो उसका टेस्ट बिगड़ता है और न ही वह खराब होती है।
5) खाने की कोई भी चीज खरीदने से पहले AGMARK ,FPO, ISI जैसे स्टेंडर्ड माक्र्स को जरूर चैक करें। ये माक्र्स भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा प्रमाणित किए गए हैं। उस वस्तु की गुणवत्ता चैक करने के बाद ही दिया जाता है।
6) पैकेट के ऊपर MRP या अधिकतम खुदरा मूल्य जरूर चैक करें। यानी कि हर तरह के टेैक्स के साथ उस वस्तु का अधिकतम विक्रय मूल्य़। यह ध्यान रखें कि दुकानदार आपसे MRP से अधिक पैसे न लें। इसके बजाय आप चाहें तो दुकानदार से उस चीज पर लगने वाले वैट या टैक्स को कम करा सकते हैं। अगर दुकानदार MRP से काफी कम मूल्य पर चीजें बेचता है, तो उनके नकली या मिलावटी होने की संभावना रहती है। दोस्तो जरूरत है आपको सचेत रहने की।
7) किसी फेरी वाले से सामान खरीदते वक्त ध्यान रखें कि उसका तराजू और बाट (वेइंग मशीन और वेट) ठीक हो और फेरी वाला तराजू का इस्तेमाल ठीक तरह कर रहा हो। तराज़ू एक हुक या छ़ड की सहायता से लटका होना चाहिए। लक़डी और गोल डंडी की तराज़ू का इस्तेमाल न हो। ध्यान रखें कि हर बाट पर निरीक्षक की मुहर होनी चाहिए। एक साल की अवधि में मुहर का सत्यापन ज़रूरी है। पत्थर, धातुओं आदि के टुक़डों का बाट के तौर पर इस्तेमाल नहीं हो सकता।
8) ध्यान रखें कि मिठाई-गिरीदार वस्तुओं एवं मसालों आदि की तुलाई में दुकानदार डिब्बे का वज़न शामिल न करे। डिब्बे का वजन शामिल करना कानूनन अपराध है।
9) आप कोई भी सामान खरीदने पर फर्जी बिल की बजाय पक्का बिल जरूर लें। इस बिल में दुकानदार से लेकर उस वस्तु के निर्माता का नाम दर्ज होता है। इससे किसी भी तरह की शिकायत आने पर आपको शिकायत करने में मुश्किल नहीं होगी और न ही दुकानदार हर्जाना देने में किसी तरह की आनाकानी करेगा।
दुकानों से सामान खरीदी पर ग्राहको को जो बिल दिया जा रहा है, उसमें भारी गड़बड़ी होती है। दुकानों पर पक्के बिल के साथ सादे पर्चे के बिल डायरी का उपयोेग हो रहा है। उपभोक्ताओं की आंखो में धूल झोंकने के लिए सादे पर्चे पर ही बिल फाड़ कर हाथ में थमा दिया जाता है। जिसके बाद सामान खराब होने पर कंजूमर फोरम में भी शिकायत नहीं कर सकते है। ग्राहक अगर एक हजार का भी कोई आईटम खरीदे तो पक्का बिल जरूर ले। पक्के बिल पर अंकित होता है टिन नंबर यानी उसमें दुकान से लेकर संचालक का नाम तक अंकित होता है। लेकिन टिन नंबर अंकित नहीं होता है जो पक्के बिल की एक पहचान है। इसलिए ग्राहक बिल लेने से पहले बिल में टिन नंबर अंकित है कि नहीं।
अगर आपकेा लगता है कि आपके साथ धोखा हुआ है। खरीदी गई वस्तु में कोई कमी है और वह पैकिंग पर दिए गए विवरण या जानकारी के मानकेा पर खरी नहीं उतर रही है, तो आप उसकी शिकायत 30 दिन के भीतर कंज्यूमर फोरम में कर सकते हैं।
ऑन लाइन कंप्लेन करने के लिए – www.core.nic.in
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्प लाइन नं- 1800-11-40000 (टोल फ्री)
