वास्तुशास्त्र एक ऐसी विद्या है जिसके अंदर मनुष्य की लगभग सभी समस्याओं का समाधान छुपा है। बस जरूरत है उस पर सही रूप से अमल करने की।

  • अगर आप बीम के नीचे बैठकर काम करते हैं तो इस आदत को बदलें। बीम के नीचे बैठना सेहत खराब करता है क्योंकि बीम पूरे घर की नकारात्मकता को समेट लेता है इसलिए स्थायी रूप से यहां बैठने से बचें।
  • रात्रि में दिशा देखकर ही सोएं। पूर्व व दक्षिण मुखी होकर सोना लाभकारी एवं शुभ होता है। उत्तर व पश्चिम मुखी सोना अशुभ होता है।
  • बेडरूम में शौचालय या स्नान घर हो तो उसके प्रयोग में विशेष सावधानी रखें। उनके दरवाजे हमेशा बंद रखें क्योंकि उससे नकारात्मक ऊर्जा आती है।
  • अगर घर में दवाइयों की खाली बोतलें रखी हुई हैं या प्रयोग में ना आने वाली दवाईयां रखी हैं या खराब हो चुकी दवाइयां पड़ी हैं तो उनको तुरंत फेंक दें अन्यथा बीमारियां घर से कभी जाएंगी नहीं।
  • घर में युद्घ अथवा दु:खद तस्वीर, ठहरे जल की तस्वीर या पेंटिंग ना लगाएं अन्यथा घर में अशांति का माहौल होगा। 
  • बच्चों को बिस्तर पर पढ़ने से रोकें। पढ़ते वक्त बच्चों का मुख पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। इससे पढ़ने में एकाग्रता आती है।
  • पूजा का कमरा मुख्य द्वार के सामने नहीं होना चाहिए। पूजा के कमरे में कभी भी अंधेरा नहीं होना चाहिए। पूजा घर में अंधेरा होने से पूरे परिवार की स्वास्थ्य की हानि होती है। अपने बेडरूम या ड्राइंग रूम में कभी भी पूजा का मंदिर ना रखें। ये अशुभ होता है।
  • घर को साफ रखें व हर सामान सही तरह से रखें। बिखरी हुई चीजें नकारात्मकता देती हैं।
  • पलंग के अंदर बॉक्स में कभी भी नुकीली चीजें, टूटी फूटी चीजें व बंद घड़ी ना रखें।
  • घर के नलों से पानी अगर रिसता हो तो इससे धन हानि व मान हानि होती है।
  • घर में हमेशा सेंधा नमक से पोछा लगवाएं। इससे नकारात्मकता दूर ही नहीं बल्कि खत्म हो जाती है।
  • तुलसी का पौधा घर के ईशान कोण में रखने से घर के लोगों की आयु बढ़ती है।
  • घर में कांटेदार व कड़वे पेड़-पौधे लगाने से घर में रहने वाले लोगों में बैर उत्पन्न होता है। इससे पिता-पुत्र भी शत्रु बन जाते हैं।
  • घर में अगर जूते-चप्पल इधर-उधर पड़े होते हैं तो इससे मान-सम्मान कम हो जाता है।
  • भोजन करते वक्त मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में ही रखें। रसोईघर में सुबह-शाम धूप दीप जरूर करें।
  • घर का मुख्य द्वार अगर दक्षिण मुखी है तो घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने बड़ा शीशा लगाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर से ही वापस चली जाएगी।
  • वास्तुदोष को दूर करने के लिए ओम् सतिया त्रिशूल द्वार पर लगाएं।

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