चाल भीतर छुपी हर अच्छाई-बुराई, गुण-अवगुण, सभी का पूरा-पूरा ब्योरा देती है, जैसे मनुष्य कब खुश है, कब तनाव में है, गंभीर है या कुछ सोच रहा है आदि।

  • यदि कोई व्यक्ति हाथ खोलकर, हाथ हिलाते हुए चलता है, तो इससे यह जाहिर होता है कि वह व्यक्ति बहुत ही संवेदनशील, आत्मनिर्भर तथा आत्मविश्वासी है। बिना झिझके वह लोगों से बातचीत कर लेता है और किसी भी नए काम को करने में घबराता नहीं है। उसमें हर नए परिवर्तन तथा घटना को स्वीकारने की क्षमता होती है। झूठ और चालाकी से इन्हें सख्त नफरत होती है। इन्हें सीधी-सीधी बातों को सीधा-सीधा जवाब अच्छा लगता है तथा रहन-सहन में सफाई पसंद होते हैं।
  • यदि कोई व्यक्ति अपने हाथों को बगल में बांधकर या सटा कर चलता है, तो इसका अर्थ यह है कि वह जरूरत से ज्यादा स्वाभिमानी है। वह अपने नियम एवं उसूल आदि स्वयं बनाना पसंद करता है। ऐसे लोग बातों पर दृढ़ रहते हैं, किए गए वादों तथा वचनों को पूरा करने की कोशिश करते हैं। वे सुनते सबकी है, पर करते अपने मन की हैं। दूसरों की मदद लेने की बजाए अपनी समस्याएं स्वयं सुलझाना पसंद करते हैं। यदि वे एक बात के पीछे पड़ जाएं, तो इसकी जड़ तक पहुंच कर ही दम लेते हैं।
  • यदि किसी व्यक्ति के हाथ चलते वक्त खुले रहते हैं, पर हिलते नहीं हैं, तो इससे यह पता चलता है कि वह व्यक्ति गंभीर है। इनके भीतर मस्तिष्क में सदा कोई न कोई विचार चलता ही रहता है। एक साथ दो नावों पर सवार होने की कोशिश, इन्हें जीवन में विपरीत परिणामों से भर देती है। आत्मविश्वास की कमी के कारण ये ठीक समय पर ठीक नियोजन तथा निष्कर्ष निकलने में असमर्थ रह जाते हैं या फिर चूक जाते हैं। दूसरे की आलोचना तथा कार्य में कमी निकालना, इनकी आदत होती है।
  • यदि कोई व्यक्ति हाथ खोलकर चलता है और चलते समय उसके दोनों हाथों की मुट्ठियाँ बंद रहती है, तो यह भीतर छुपी विभिन्न प्रतिभाओं को दर्शाता है। ऐसे लोग अपनी सक्रिय सोच के कारण देर-सबेर, जैसे-तैसे अपने लक्ष्य तक पहुंच जाते हैं। इनके विचार, रहन-सहन, आदतें, स्वभाव आदि आम आदमी से भिन्न होते हैं तथा इसके साथ-साथ जीवन के सुख-दुख, अनुभव, परिणाम भी कुछ हटकर होते हैं। इनके बोलने में एक चमत्कारिक शक्ति होती है, जो लोगों को सरलता से शीघ्र ही आकर्षित कर लेती है।
  • यदि चलते समय आंखों तथा चेहरा ज्यादा ही इधर-उधर हिलते रहते हैं, तो इससे यह ज्ञात होता है कि ऐसे व्यक्ति हमेशा कुछ नया करने की कोशिश में लगे रहते हैं। इनकी महत्वाकांक्षाएं इन्हें अपने से वरिष्ठï एवं अनुभवी लोगों के साथ संपर्क बनाने के लिए उकसाती रहती है। ये जरूरत से ज्यादा निडर, साहसी एवं आत्मविश्वासी होते हैं। अपनी इच्छानुसार कार्य या वस्तु पाने के लिए इन्हें लंबा इंतजार करना चड़ता है। ये कई बार अपनी ऊर्जा एवं कार्यशक्ति का उपयोग ठीक दिशा में नहीं कर पाते।
  • यदि कोई व्यक्ति चलते समय नजर झुकाकर चलता है, तो इससे यही ज्ञात होता है कि इनके अंदर आत्मविश्वास तथा आत्मनियंत्रण की कमी है। जिंदगी के कुछ खास खट्टे अनुभवों ने इनका दिल दुखाया है। वे लोगों से ज्यादा मिलना-जुलना पसंद नहीं करते। वे स्वयं की काल्पनिक एवं सपनों को दुनिया में रहना पसंद करते हैं। इनके भीतर का आलस इन्हें कांतिहीन बनाता है। चिड़चिड़े स्वभाव के कारण ये बहुत कम लोगों से बात करते हैं तथा किसी से दिल की बात नहीं कह पाते हैं और बातचीत के दौरान कम बोलना पसंद करते हैं। घर, काम, नौकरी-व्यवसाय तथा रिश्तों आदि का बोझ सदैव इनके कंधों पर रहता है। ऐसे व्यक्ति अपनी परेशानियों तथा रुकावटों के जिम्मेदार अपनी परिस्थितियों तथा अन्य लोगों को समझते हैं।
  • चलते समय किसी वस्तु आदि का उपयोग करना कई लोगों की आदत होती है। यदि कोई व्यक्ति इस श्रेणी में आता है, तो इससे यही पता चलता है कि वह अपने आप में कितना अकेलापन एवं असुरक्षित महसूस करता है। ये दोस्त बनाने तथा उनसे संपर्क बनाने में हिचकिचाते हैं और हर काम में नए बहाने तथा आसरे या आसान रास्ता खोजते हैं। ये खाली हाथ जरा सी भी दूरी तय नहीं कर सकते और हाथ में किसी सामान या वस्तु का होना अनिवार्य समझते हैं, जैसे पेंसिल, डायरी, किताब आदि। यह सब व्यक्ति के अंदर छुपी घबराहट, जल्दबाजी तथा विचारों में असंतुलन के साथ-साथ आात्मविश्वास की कमी तथा मानसिक कमजोरी को दर्शाता है।
  • तेज गति से चलने वाले व्यक्ति बहुत ही चुस्त व फुर्तीले होते हैं। ये अपने जीवन का लक्ष्य पहले से ही निर्धारित करते हैं। धैर्य की कमी व प्रतिस्पर्धा का भाव इनको नुकसान पहुंचाता है। ऐसे लोग अपनी मेहनत तथा बुद्घि पर विश्वास रखते हैं तथा अपने सभी कार्य स्वयं ही निपटाने की कोशिश करते हैं। जिद्दी एवं हठी होना, इनको कई बार लाभ पहुंचाता है, तो कई बार स्वयं की हानि का कारण बनता है। भीड़ से हटकर कुछ नया काम करने की कोशिश सदा इनको ऊर्जावान बनाए रखती है।
  • धीमी (मध्यम) गति से चलने वाले व्यक्ति संतुलित स्वभाव के होते हैं। ये अपने जीवन के निर्णय धैर्य से सोच समझकर करते हैं। औपचारिकताएं इन्हें अच्छी लगती हैं। ये या तो एकदम लापरवाह होते हैं या जरूरत से ज्यादा ही परवाह करते हैं। यह जितने व्यावहारिक होते हैं उतने ही संवेदशील भी होते हैं। इनके लक्ष्य कई बार परिस्थितियों एवं जिम्मेदारियों के हिसाब से बदलते रहते हैं। कई विषयों पर जानकारी इन्हें कई बाद फायदे तथा नुकसान का भागी बनाती है। कम समय में अधिक तथा मेहनत से ज्यादा पाने की उम्मीद, इन्हें हमेशा लगी रहती है।
  • जरूरत से ज्यादा धीमी गति से चलने वाले व्यक्ति नीरस, निस्तेज तथा आलस से परिपूर्ण होते हैं। आत्मविश्वास की कमी, इनकी हर असफलता का कारण होती है। ऐसे लोग अन्य लोगों के कहे अनुसार अपना लक्ष्य चुनते हैं तथा अपनी धारणाएं बनाते हैं हर काम करने का इनका अपना तरीका होता है, जिसे वह बड़े मन से शुरू करते हैं, परंतु कार्य के मध्य या अंत तक आते-जाते क्षीण हो जाते हैं। हर चीज को गहराई से देखना, चिंतन-मनन द्वारा विश्लेषण करना, इन्हें खूब भाता है जिसमें ये खरे भी उतरते हैं। यह लोगों के अंदर छुपे दर्द एवं तकलीफों को बखूबी समझते हैं। इन्हें पढ़ने-लिखने का शौक होता है। कई विषयों के जानकार तथा विशेषज्ञ होते हैं। यह अच्छे सलाहकार भी साबित होते हैं। यह अपनी ऊर्जा, सामर्थ्य तथा ज्ञान का सही समय पर सही प्रयोग करें, तो बहुत आगे जा सकते हैं, जहां तक हर कोई नहीं पहुंचता।
  • जो लोग पैर को जोर से रखते हैं यानी एड़ी को जोर से दबाकर आवाज करते हुए चलते हैं, बहुत ही जिद्दी तथा अभिमानी होते हैं। उनका यह अभिमान झूठा एवं निरर्थक होता है। अपने बारे में सुनना तथा सबके बीच आकर्षण का केंद्र बनना, इन्हें अच्छा लगता है। अपने काम का दिखावा करना तथा जरूरत से ज्यादा ऊंचे स्वर में बात करना, इन्हें कई बार महंगा पड़ता है।
  • पैर (तलवे व एड़ी) को जमीन से रगड़ कर बिना उठाए चलने वाले लोग दरिद्र तथा आलसी होते हैं। लापरवाह एवं भुलक्कड़ होना, इनका स्वभाव होता है। कार्यक्षेत्र हो या घर, ऐसे लोग परिस्थितियों तथा जिम्मेदारियों से असहमत होते हैं। जीवन जैसा मिला है उसे बिना किसी परिवर्तन तथा लक्ष्य निर्धारण के जीना पसंद करते हैं। यह भाग्य के सहारे जीने वाले कंजूस प्रवृत्ति के होते हैं। अपने आपको समझदार समझना तथा औरों की चुगली करना, इनके आचरण में होता है। घर का रख-रखाव हो या स्वयं का रहन-सहन दोनों को ही कुछ खास महत्त्व नहीं देते। इनकी चाल की तरह इनकी जिंदगी भी यूं ही घिसटती रहती है।

ठक-ठक-ठक आवाज करके चलने वाला व्यक्ति अपने अंतर्मन की किसी न किसी कमजोरी पर सदा काबू पाने की चेष्टï में लगा रहता है अथवा अपने भीतर की ऊर्जा शक्ति को बरकरार रखने के लिए वह ऐसा करता है। न तो ये किसी के सोचने की परवाह करते हैं और न ही चिंता, किंतु अपने काम को तल्लीनता से, मेहनत से करते हैं। इनका स्वाभिमान ही इनका सब कुछ होता है, आखिरकार उसे बरकरार रखने के लिए ही तो ये ऐसा करते हैं।

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