उत्तर-पूर्वी प्लॉट- सौर ऊर्जा पूर्व दिशा से प्राप्त होती है तथा पृथ्वी की चुंबकीय धुरी उत्तर से दक्षिण की ओर घूमती है इसलिए उत्तर-पूर्वी प्लॉट का विशेष महत्त्व है।

एक उत्तम प्लॉट- वास्तु के नियमानुसार जिस प्लॉट के चारों दिशाओं में सड़क हो उसे शुभ माना जाता है।

  • यदि प्लॉट के चारों ओर सड़कें हों किंतु फैली हुई हों तो उन्हें अच्छा नहीं माना जाता है। 
  • तिकोनी आकृति वाला प्लॉट न खरीदें क्योंकि इससे निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा आपको नुकसान पहुंचा सकती है। 
  • यदि किसी प्लॉट की आकृति विचित्र हो तो उसे न खरीदें परंतु उसे आयताकार या वर्गाकार रूप में प्रतिबिंबित किया जा सके तो खरीद सकते हैं।

नोट- प्लॉट में ऐसा कोई भी संशोधन वास्तु विशेषज्ञ के सुझाव पर ही करना चाहिए।

  • शेर जैसे मुख वाला प्लॉट रहने के लिए अच्छा नहीं माना जाता परंतु उसे आप व्यावसायिक तौर पर प्रयोग कर सकते हैं। 
  • गौ जैसे मुख वाला प्लॉट आवासीय हो तो अच्छा है, इसे व्यावसायिक तौर पर प्रयोग में न लाएं। 

मिट्टी- ललाई लिए हुए पीली मिट्टी शुभ मानी जाती है। मिट्टी की सुगंध से भी धरती की विशेषता पता चलती है। मिट्टी की गुणवत्ता जांचने के लिए निम्न परीक्षण किए जा सकते हैं-

  • प्लॉट के बीचों बीच 3 घन फुट गड्ढा खोदें। फिर उसी मिट्टी से गड्ढïे को दोबारा भर दें। यदि सतह समान हो जाए तो मिट्टी औसत है।
  • यदि दोबारा भरी गई मिट्टी से सतह ऊंची हो जाए तो इस मिट्टी को अच्छा माने।
  • यदि दोबारा भरी गई मिट्टी से सतह दब जाए तो जान लें कि वहां नकारात्मक ऊर्जा का वास है। ऐसे प्लॉट को छोड़ने में ही भलाई है। 
  • यदि भूमि की ढलान पूर्व की ओर हो तो यह एक शुभ लक्षण है। उत्तर की ओर होने वाली ढलान भी शुभ मानी जाती है।
  • यदि ढलान पश्चिम की ओर हो तो इसे अच्छा नहीं माना जाता। यदि इस ढलान को उत्तर या पूर्व में बदल दें तो प्लॉट ले सकते हैं। 

दक्षिण की ओर ढलान होना भी अच्छा नहीं माना जाता क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा का परिचय मिलता है। ढलान उत्तर या पूर्व की ओर करने के बाद प्लॉट ले सकते हैं।

चुंबकीय धुरी

  • यदि प्लॉट की धुरी चुंबकीय धुरी के समानांतर हो तो यह एक शुभ लक्षण है।
  • यदि प्लॉट की धुरी, चुंबकीय धुरी के साथ किसी कोन पर स्थित हो तो उसे संतुलित किया जा सकता है परंतु दो बातों का ध्यान रखें-इसका मुख किस दिशा में है? ,प्लॉट के समीप कौन-सी वस्तु है?
  • किसी कब्रिस्तान में स्थित प्लॉट का चुनाव- जहां तक संभव हो सके, किसी ऐसे स्थान पर प्लॉट न खरीदें। यदि लेना ही पड़े तो निम्न तथ्यों को भी देखें-
  • कब्रिस्तान कितने वर्षों से बंद पड़ा है।
  • क्या मृत शवों से निकली नकारात्मक ऊर्जा रूपांतरित हो गई है?
  • ऐसा प्लॉट भी न लें जहां चट्टानें तथा हड्डियां पड़ी हों। इस तरह का प्लॉट शुभ नहीं माना जाता। 

इन प्रश्नों का उत्तर अनुकूल होने पर भी किसी दूसरे स्थान का विकल्प अपना लेना चाहिए।

प्लॉट का विस्तार- यदि कोई भी प्लॉट उचित आकार में न हो तो खरीदार को 

  • वास्तु के नियमानुसार उसमें संशोधन कर लेना चाहिए। 
  • कटा हुआ प्लॉट- कटे हुए प्लॉट की तुलना सिर विहीन शरीर से को जा सकती है। यदि प्लॉट का अतिरिक्त टुकड़ा मिल सके तो उसे अवश्य खरीद लें।

प्रवेश द्वार

  • यदि कार्यालय या दुकान का मुख उत्तर या पूर्व की ओर हो तो उसे शुभ माना जाता है। 
  • यदि दोनों पक्तियां एक-दूसरे के सामने हों तो दोनों को ही शुभ माना जाता है चाहे वे पूर्व-पश्चिम हों या उत्तर में हों। 
  • उत्तर-पश्चिम की ओर से कटा हुआ प्लॉट शुभ नहीं माना जाता परंतु इस दोष को दूर किया जा सकता है।
  • दक्षिण-पश्चिम की ओर से कटा हुआ प्लॉट भी शुभ नहीं माना जाता परंतु इस दोष को भी दूर किया जा सकता है।
  • यदि प्लॉट उत्तर-पूर्व की ओर से कटा हो तो इसे भी सुधार सकते हैं।

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