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पारिजात

पर्यावरण को स्वच्छ और निर्मल रखने के लिए हम बहुत से पेड़ पौधे लगाते हैं। कुछ छांयां के लिए, तो कुछ फलों के लिए, तो कुछ फूलों के लिए। अगर फूलों की बात की जाए, तो पारिजात का पौधा बेहद पसंद किए जाने वाले पौधों में से एक हैं। इस पर लगने वाले सफेद रंग के फूल बेहद मनमोहक लगते हैं। हिंदू धर्म में माना जाता है कि पारिजात वृक्ष को देवराज इंद्र द्वारा स्वर्ग में लगाया गया था. इस पर रात के वक्त खुशबूदार छोटे सफेद रंग के फूल खिलते हैं और सुबह होते ही वह फूल खुद ब खुद झड़ जाते हैं. यह फूल पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प भी है। पारिजात एक ऐसा औषधीय पौधा है, जिसका इस्तेमाल पूजा-पाठ में किया जाता है। बीते दिनों राम मंदिर के शिलान्यास के वक्त भी पारिजात के पौधे को खासतौर से लगाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के परागण में पारिजात का पौधा लगाया है। इस पौधे के बारे में कहा जाता है कि पारिजात पौधे को देवराज इंद्र ने स्वर्ग में लगाया था। पारिजात का दूसरा नान हरसिंगार है। पारिजात के फूल बेहद सुगन्धित, छोटे पखुड़ियों वाले और सफेद रंग के होते हैं। फूल के बीच में चमकीला नारंगी रंग होता है। 

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, परिजात के पौधे के फूलों से भगवान हरि का श्रृंगार भी होता है। कहा जाता है कि द्वापर युग में स्वर्ग से देवी सत्यभामा के लिए भगवान श्रीकृष्ण इस पौधे को धरती पर लाए थे। यह देव वृक्ष है जो समुद्र मंथन से उत्पन्न हुआ था। 14 रत्नों में यह एक विशिष्ट रत्न रहा है।

आइए जाने है इस पौधे से जुड़ी कुछ खास बातों को।  

मां लक्ष्मी को करते हैं अर्पित

पुराणों की मानें, तो देवी लक्ष्मी को पारिजात के फूल काफी पसंद है। यही कारण है कि पूजा के वक्त मां लक्ष्मी को पारिजात के फूल चढ़ाए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इसके चढ़ावे से मां प्रसन्न होती हैं। हालांकि पूजा पाठ के लिए पारिजात के फूलों को तोड़कर नहीं चढ़ाने चाहिए, खुद ब खुद पेड़ों से गिरे फूलों को उठाकर ईष्ट को चढ़ाया जाना चाहिए।

अलग अलग नामों से प्रसिद्ध

पारिजात के पेड़ को हरसिंगार का पेड़ भी कहा जाता है। इस पेड़ की खासियत ये है कि इसमें बहुत ही सुंदर और सुगंधित फूल उगते हैं। समस्त भारतवर्ष में पैदा होने वाले इस पौधे को हर प्रांत में अलग अलग नाम से जाना जाता है। इसे संस्कृत में पारिजात, शेफालिका। हिन्दी में हरसिंगार, परजा, पारिजात। मराठी में पारिजातक। गुजराती में हरशणगार। बंगाली में शेफालिका, शिउली। तेलुगू में पारिजातमु, पगडमल्लै। तमिल में पवलमल्लिकै, मज्जपु। मलयालम में पारिजातकोय, पविझमल्लि। कन्नड़ में पारिजात। उर्दू में गुलजाफरी। इंग्लिश में नाइट जेस्मिन। लैटिन में निक्टेन्थिस आर्बोर्टि्रस्टिस कहते हैं। उत्तर प्रदेश में दुर्लभ प्रजाति के पारिजात के चार वृक्षों में से हजारों साल पुराने दो वृक्ष वन विभाग इटावा के परिसर में हैं जो पर्यटकों को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन की गाथा अपनी जु़बानी ब्यां करते हैं। 

समुद्र मंथन से हुई उत्पति

पौराणिक कथाओं के हिसाब से पारिजात वृक्ष की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी जिसे भगवान इंद्र ने अपनी वाटिका में रोप दिया था। पारिजात के फूलों को पूजा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। खासतौर पर लक्ष्मी पूजन के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन केवल उन्हीं फूलों को इस्तेमाल किया जाता है, जो अपने आप पेड़ से टूटकर नीचे गिर जाते हैं।

स्वर्ग से लाया गया था पारिजात वृक्ष 

पौराणिक मान्यता के अनुसार पारिजात के वृक्ष को स्वर्ग से लाकर धरती पर लगाया गया था। एक कथा के अनुसार नरकासुर के वध के पश्चात एक बार श्रीकृष्ण स्वर्ग गए और वहां इन्द्र ने उन्हें पारिजात का पुष्प भेंट किया। वह पुष्प श्रीकृष्ण ने देवी रुक्मिणी को दे दिया। देवी सत्यभामा को देवलोक से देवमाता अदिति ने चिरयौवन का आशीर्वाद दिया था। तभी नारदजी आए और सत्यभामा को पारिजात पुष्प के बारे में बताया कि उस पुष्प के प्रभाव से देवी रुक्मिणी भी चिरयौवन हो गई हैं। यह जान सत्यभामा क्रोधित हो गईं और श्रीकृष्ण से पारिजात वृक्ष लेने की जिद्द करने लगी। कहा जाता है तब कान्हा स्वर्ग से उनके लिए पारिजात का वृक्ष लेकर आए थे। एक और पौराणिक कथा के अनुसार

कुंती ने अपने पुत्र अर्जुन से शिवपूजन के दौरान शिवजी पर पारिजात के पुष्प अर्पित करने की इच्छा जाहिर की। इस पर अर्जुन द्वारका से पूरा का पूरा पारिजात वृक्ष ही उठा लाए और उसे किंतूर गांव में स्थापित कर दिया।

औषधीय गुण 

पारिजात में कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। इसके फूलों का रस पीने से हृदय (दिल) के रोगों से बचा जा सकता है। इसका बीज भी हार्ट के लिए काफी अच्छा माना जाता है। इसकी पत्तियों को पीसकर शहद के साथ मिलाकर खाने से सूखी खांसी भी ठीक होती है। पत्तियां त्वचा संबंधी रोगों को दूर करने में भी सहायक  है।

पारिजात के बीज का पेस्ट बनाकर सिर की त्वचा पर लगाने से रूसी संबंधी समस्या दूर होती  है।

– इसकी जड़ को चबाने से गले संबंधी समस्याओं से निजात पाया जा सकता है, खांसी के लिए भी इसे औषधि के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

– जिन्हें नाक से खून बहने की समस्या होती है, उन्हें इसकी जड़ को चबाने से निजात मिल सकता है।

– आयुर्वेद के अनुसार, इसके पत्तों के रस में थोड़ी मात्रा में चीनी मिलाकर पीने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते है, आपके स्वस्थ आंतों के लिए यह रामबाण इलाज है।

– डायबिटीज रोगी अगर इसके काढ़े का नियमित रूप से सेवन करें तो उनका ब्लड शुगर लेवल काफी हद तक नियंत्रित हो सकता है।

वृक्ष की ऊंचाई

पारिजात का वृक्ष ऊंचाई में दस से पच्चीस फीट तक का होता है. इसके इस वृक्ष की एक खास बात ये भी है कि इसमें बहुत बड़ी मात्रा में फूल लगते हैं। एक दिन में इसके कितने भी फूल तोड़े जाएं, अगले दिन इस फिर बड़ी मात्रा में फूल खिल जाते हैं. यह वृक्ष खासतौर से मध्य भारत और हिमालय की नीची तराइयों में अधिक उगता है। 

इसकी छांया से थकान दूर हो जाती है

ये फूल रात में ही खिलता है और सुबह होते ही इसके सारे फूल झड़ जाते हैं. इसलिए इसे रात की रानी भी कहा जाता है. हरसिंगार का फूल पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प भी है। दुनिया भर में इसकी सिर्फ पांच प्रजातियां पाई जाती हैं। हरिवंश पुराण में पारिजात को कल्पवृक्ष भी कहा गया है। मान्यता है कि स्वर्गलोक में इसको स्पर्श करने का अधिकार सिर्फ उर्वशी नाम की अप्सरा को था। इस वृक्ष के स्पर्श मात्र से ही उर्वशी की सारी थकान मिट जाती थी। आज भी लोग मानते हैं कि इसकी छाया में बैठने से सारी थकावट दूर हो जाती है।

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