धुनी शब्द से शायद कोई भी इंसान अंजान नहीं होगा क्योंकि धुनी के माध्यम से प्रायः हर धर्म का इंसान अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक बनाता है| प्राचीन काल से लोग इसका प्रयोग करते आये है और आज तक कर रहे है| सिंधु घाटी और मोहन जोदड़ो की खुदाई में भी धुनी के सुबूत मिले है जो बताते है की धुनी कितनी ज्यादा पुरानी चीज है| सभी धर्मो में धुनी के द्वारा अपने चारों तरफ के माहौल को नकारात्मक शक्तियों से बचाने की सलाह दी जाती है सबसे ज्यादा हिन्दू धर्म धुनी को अपनाता हैं सही मायनों में कहे तो धुनी भारत की जड़ में बसी है| भारतीय ऋषि मुनियों के गहन शोध और तप की सफलता का जीता जागता रूप है धुनी जो की विज्ञान की कसौटी पर भी खरा उतरता हैं| नासा ने भी इस बात को माना है की सही जड़ी बूटियों से बनायी गयी धूप यानि धुनी देने से घर व वातावरण में व्याप्त हानिकारक किटाणु खत्म हो जाते है शुद्ध वातावरण में मन को ताजगी और शांति मिलती है जिससे मन खुश तो होता ही है साथ ही मानसिक तनाव भी दूर होता है| यदपि धुनी देने के लाभ ही लाभ होते है परन्तु फिर भी कुछ बातें ऐसी होती जिनको ध्यान में रखकर अगर आप धुनी देगे तो आपको बहुत ज्यादा और जल्दी लाभ मिलेगा|

धुनी देने के नियम

  • धुनी एक प्राचीन परंपरा है इसको पूरी शुद्ता और विश्वास के साथ करे तब ही इसका फायदा होगा|
  • धुनी आप दिन में भी दे सकते है और शाम को भी पर अगर आप एक बार ही धुनी देते है तो उसको हमेशा शाम को ही दे क्योंकि शाम को धुनी देने से नकारात्मक ऊर्जा आपके घर से दूर होगी वर्ना नहीं सुबह के वक़्त तो वैसे भी वातावरण शुद्ध होता है रात को ही नकारात्मक शक्ति प्रभावी होती है इस लिए रात को जरुर करे धुनी|
  • धुनी को देने के लिए एक साफ़ बर्तन ले ये मिट्टी का हो या पीतल का तो ज्यादा सही होगा इसको बिल्कुल साफ़ रखे यानि धुनी देने के बाद इसको अच्छे से साबुन से साफ़ करके रखे तभी अगले दिन इसको प्रयोग करे क्योंकि धुनी जिन चीजों को मिलकर बनती है वो सभी बहुत पवित्र और पूजा पाठ के काम में आने वाली चीजें होती है इन सभी चीजों की एक अपनी ताकत होती हैं जो तुरंत ही अपना असर भी दिखाती है और एक रक्षक का काम करती है पर इनका असर तब ही होता है जबकि उनको एक साफ़ और शुद्ध तरह से पूरे आदर और विश्वास के साथ प्रयोग किया जाता हैं अगर आप इनको गंदे बर्तन में अशुद्ध तरह से प्रयोग करेगे तो ये आपको फायदे की जगह नुकसान करेगी इस बात को आप हमेशा याद रखे अगर इस नियम का पालन कर सकते है तो तब ही इसका प्रयोग करे वर्ना नहीं|
  • धुनी देने के बाद जली हुई धुनी को साफ़ जगह पर घर के बाहर दाल दे याद रखे इस पर आपका पैर न पड़े अगर रोज बाहर नहीं डाल सकते तो इसको घर में ही छत पर किसी डब्बे में डालकर किसी कोने में रख दे जहां कोई छुए ना फिर एक सप्ताह में इसको बाहर ले जाकर साफ़ जगह या जंगल आदि में डाल दे|
  • अगर आप रोज धुनी नहीं दे सकते है तो अमावस्या और ग्रहण वाले दिन जरुर दे चाहे वो सूर्य ग्रहण हो या चन्द्र ग्रहण इन दिनों में भी अगर आप अपने घर में धुनी देते है तो भी घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है|
  • धुनी देने से धुँआ हो जाता है वातावरण में तो अगर आपके घर में कोई भी सदस्य बीमार है या अस्थमा के रोग से परेशान है तो धुनी घर में देने से पहले डाक्टर से सलाह ले अगर डाक्टर हाँ कहे तब ही धुनी दे अन्यथा नहीं सामान्य रूप में भी अगर घर में सब ही सदस्य पूरी तरह से स्वस्थ है तो भी ये सावधानी जरुर अपनाये धुनी को पूरे घर में दिखाने के बाद घर की छत पर खुली जगह पर रख दे ताकि उसके धुएं से किसी को हानि ना हो|
  • धुनी आजकल बहुत ही आसानी से मिल जाती है बाजारों में जो की अपनी शुद्ता का दावा ये कहकर करती है की इनको बहुमूल्य जड़ी बूटियों को मिलाकर बनाया गया है कई बार ये दावे सही होते है तो कई बार गलत तो हो सके तो धुनी घर खुद बनाये अन्यथा किसी जानकार की दुकान या अच्छी ब्रांड की धुनी ही प्रयोग करे|   
  • धुनी एक तत्काल प्रभावी चीज है इसको अपनाये और खुद को सुरक्षित करे|