सूर्य देव का परिवार-

मत्सय पुराण के अनुसार सूर्य देव की चार पत्नियां- संज्ञा, राज्ञी, प्रभा, छाया हैं। चौथी पत्नी छाया संज्ञा के शरीर से उत्पन्न हुई थीं संज्ञा केवैवस्वत मनु, यम पुत्रवयमी पुत्री उत्पन्न हुए, राज्ञी के रैवत व प्रभा के प्रभात नाम पुत्र हुए, छाया के दो पुत्र सावर्णि, शनि व कन्या तपती, विविट उत्पन्न हुए इस तरह सूर्य देव की नौ संतानें हुईं जिसमें छ: पुत्र व तीन कन्याएं हैं कर्ण भी सूर्य पुत्र हैं।

छाया पुत्र शनि ने तप करके ग्रहों की समता प्राप्त कर ली सावर्णि ने अमरत्व प्राप्त किया और सुमेरु पर्वत पर बस गये यम शिव उपासना से लोकपाल व पित्तरों के आधिपत्य बने यमुना व तपती दोनों नदी रूप में धरती पर बहती हैं विष्टिï भद्राकाल केरूप में बदल गयी। शनि को कुरूप होने के कारण सूर्य ने कभी अपना पुत्र नहीं माना यद्यपि सूर्य की पूजा से शनि प्रसन्न होते हैं परंतु सूर्य शनि की पूजा से कभी प्रसन्न नहीं होते। पिता-पुत्र का इनमें कोई रिश्ता नहीं है।

सूर्य से जुड़ी रोचक बातें- 

  • सूर्य मंडल का 99.24 प्रतिशत वजन सूर्य है।
  • अगर सूर्य का आकार फुटबाल जितना और बृहस्पति का गोल्फ बॉल जितना कर दिया जाये तो धरती का आकार एक मटर से भी कम होगा।
  • प्रकाश सूरज से धरती पर आने के लिए 8 मिनट 17 सेकेंड लेता है।
  • संस्कृत भाषा में सूर्य के 108 नाम हैं।
  • सूर्य 74 प्रतिशत हाइड्रोजन और 24 प्रतिशत हीलियम से बना है और बाकी का हिस्सा कई भारी तत्त्वों जैसे ऑक्सीजन, कार्बन, लोहे, नीयोन से बना है।
  • सूर्य का बाहरी सतह का तापमान 5500 डिग्री सेल्सियस जबकि अंदरूनी भाग का तापमान 1 करोड़ 31 लाख डिग्री सेल्सियस है।
  • सूर्य ग्रहण तब होता है जब चांद धरती और सूर्य के मध्य आ जाये यह स्थिति ज्यादा से ज्यादा 20 मिनट तक रहती है।
  • सूर्य का गुरुत्वाकर्षण धरती से 28 गुना बड़ा है अगर धरती पर आपका वजन 60 किलो है तो सूर्य पर ये 1680 किलो होगा।
  • सूर्य धरती की तरह ठोस नहीं है ये सारा का सारा गैसों से बना है।
  • अगर कोई भी वस्तु सूर्य के 20 लाख 22 हजार किलो मीटर के दायरे में भी आती है तो भी सूर्य उसे अपनी तरफ खींच लेता है।
  • जब से सूर्य बना है तब से इसने 20 बार आकाश गंगा का चक्कर काटा है।
  • अगर सूर्य की चमक एक दिन धरती पर न आये तो धरती घंटों में बर्फ की तरह जम जायेगी।
  • नार्वे एक अकेला ऐसा क्षेत्र है जहां सूर्य लगातार तीन माह तक चमकता रहता है।
  • जब ब्रह्मजी का अण्ड का भेदन का करके उत्पन्न हुए उस वक्त उनके मुंह से ऊं महाशब्द उच्चारित हुआ यह ओंकार परब्रह्मï है और यही भगवान सूर्यदेव का शरीर है।
  • सूर्य देव को सविता इसलिए कहते हैं क्योंकि सविता का अर्थ है सृष्टिï करने वाला परमात्मा।
  • भगवान सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं इनकी महादशा छ: वर्ष की होती है।
  • कुण्डली 12 भावों में सूर्य का प्रभाव अलग-अलग तरह से होता है।
  • लग्न में सूर्य होने पर जातक, पित्त, कफ रोगी, चंचल, स्वाभिमानी सम्पत्ति हीन होता है।
  • कुंडली में दूसरे भाव का सूर्य जातक को सम्पत्तिवान भाग्यशाली, झगड़ालू व नेत्र मुख दंत रोगी बनाता है स्त्री के लिए कुटुंब से झगड़ा कर लेता है ऐसा जातक।
  • तीसरे भाव में सूर्य जातक को पराक्रमी प्रतापशाली बंधुहीन बनाता है।
  • चौथे भाव में सूर्य जातक को चिंताग्रस्त परमसुंदर पितघन नाशक, भाइयों का बैरी, वाहन सुख प्रदाता बनाता है। 
  • पांचवें भाव का जातक अत्प सम्पत्तिवान, सदाचारी बुद्धिमान, क्रोधी होता है।
  • छठे भाव में सूर्य जातक को शत्रुनाशक, तेजस्वी मातृकदर कारक, न्यायवान बनाता है।
  • सातवें भाव का सूर्य जातक को स्त्री से कलेश कारक स्वाभिमानी, आत्मरत, चिंतायुक्त बनाता है।
  • आठवें भाव का सूर्य जातक को पित्तरोगी, क्रोधी धनी, धैर्यवान बनाता है।
  • नवें भाव का सूर्य जातक को प्रतापी, व्यवयास में कुशल, राजनेता, उदार हृदय, ऐश्वर्य सम्पन्न बनाता है।
  • दसवें भाव में सूर्य जातक को स्वाभिमानी, विद्वान धनवान, सुखी बनाता है।
  • ग्यारवें भाव का सूर्य जातक को धनी, बलवान, सुखी मित भाषी व अत्प संतान वाला बनाता है।
  • बारवें भाग का स्वामी सूर्य जातक को उदासीन, मस्तिष्क रोगी, नेत्र रोगी, आलसी, मित्रवान बनाता है।

सूर्य की महादशा में अन्तरदशा

सूर्य की महादशा किसी भी जातक के जीवन में छ: साल के लिये आती है। यदि सूर्य उच्च राशि का हो तो अच्छे फल मिलते हैं और यदि सूर्य खराब राशि या गलत भाव में बैठा हो तो सूर्य जातक महादशा में खराब परिणाम देता है।

सूर्य में सूर्य- सूर्य अगर उच्च हो तो राज्य सम्मान में वृद्धि होती है, धन धान्य बढ़ता है पदोन्नति होती है, राजस्तरीय सम्मान मिलता है, सभी कार्य अनायास ही मिल जाते हैं, मान सम्मान बढ़ता है। सूर्य अगर खराब हो तो जातक के शरीर में अचानक गर्मी बढ़ जाती है, चकते, खाज जैसी त्वचा रोग बढ़ जाते हैं, मन अशान्त रहता है, आय से ज्यादा व्यय रहता है अत: आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। स्थानान्तरण व अधिकारियों से मतभेद के कारण खिन्नता बन सकती है।

सूर्य में चन्द्रमा- यदि चन्द्रमा उच्च व स्वराशि का हो तो चन्द्र को सूर्य के मित्र का लाभ मिलता है। इससे धन धान्य में वृद्धि होती है व रोजगार में भी लाभ मिलता है, स्त्री व बच्चों का सुख प्राप्त होता है, मित्रों से लाभ मिलता है, कल्पना शीलता बढ़ती है, इसके विपरीत यदि चन्द्रमा क्षीण हो तो मन दुखी रहता है, चरित्र खराब हो सकता है माता-पिता दोनों को कष्टï होता है। जलोदर, नजला, जुकाम जैसे रोग परेशान करते हैं, धन हानि व प्रेम प्रसंगों में असफलता से मन दुखी होता है।

सूर्य में मंगल- अगर मंगल उच्च राशि का हो तो जातक को कृषि व भूमि से लाभ मिलता है, नवीन घर की प्राप्ति भी होती है तथा वाहन, मकान, धन व उच्च पद प्राप्त होता है। उन्नति के मार्ग निकलते हैं परंतु यदि मंगल अशुभ हो तो सेना, लुटेरों से जातक को हानि होती है, परिवार व दोस्तों से झगड़े होते हैं, धन व भूमि की हानि होती है, रक्त दोष, नेत्र पीड़ा होती है, जातक का मन भय ग्रस्त हो जाता है, हर वक्त घबराहट होती है।

सूर्य में राहू- राहू सूर्य का दुश्मन है अत: राहु अच्छा हो तो भी अच्छे फल जातक को नहीं मिलते हैं इसमें जातक को अच्छे बुरे दोनों मिश्रित फल प्राप्त होते हैं। जातक निरोगी होता है व पुत्र प्राप्ति का योग बनता है। परंतु अगर राहु अशुभ हो तो जातक को राजदण्ड का योग बनता है, कारावास आत्मीय जनों से पीड़ा मिलती है, अकाल मुत्यु का भय बनता है। सर्पदंश का योग बना रहता है इस वक्त जातक पूरी तरह से परेशान ही रहता है।

सूर्य में बृहस्पति- बृहस्पति यदि शुभ हो तो जातक का जीवन सुखों से भर जाता है, जातक अगर अविवाहित हो तो उसेअति उत्तम जीवनसाथी मिलता है। उच्च शिक्षा में सफलता मिलती है, सम्मान की प्राप्ति होती है, सत्कर्मों की प्रवृत्ति बनी रहती है, शत्रु शान्त रहते हैं, आत्मीय जनों से लाभ मिलता है, यदि बृहस्पति नीच का हो तो जातक को स्त्री व संतान से पीड़ा मिलती है, जातक पापकर्मों में लगकर अपना सर्वनाश कर लेता है, पीलिया, अस्थि पीड़ा क्षय रोग से शरीर ग्रस्त रहता है।

सूर्य में शनि- राहु की तरह शनि के आने पर भी जातक को अशुभ फल ही मिलते हैं परंतु अगर शनि उच्च का हो तो जातक को धन लाभ मिलता है, शत्रु शान्त होते हैं, न्यायालय में विजय होती है परंतु अशुभ शनि में पिता पुत्र में बैर रहता है, शत्रुओं की अधिकता होती है, बुद्धि मंद होने से आत्महानि या आत्म हत्या की कोशिश करता है, जातक जन्मस्थान छोड़ना पड़ता है, घर व व्यवसाय की क्षति होती है।

वायुरोग, स्नायुरोग, दांत पीड़ा, दाद से ग्रसित रहता है।

सूर्य में बुद्ध- अगर बुद्ध उच्च का हो तो जातक को बौद्धिक मजबूती देता है। स्त्री सुख, वाहन, घर की प्राप्ति होती है। भाग्य वृद्धि व धन लाभ का योग बना रहता है, सर्वसुखों की प्राप्ति होती है, अशुभ बुध मन में अनेक भय उत्पन्न करता है। विदेश प्रवास करना पड़ता है, धन हानि व स्वास्थ्य हानि बनी रहती है, कार्य बंद हो जाते हैं, घर परिवार मित्रों से धोखा मिलता है। चर्म रोग, दाद, खुजली, दंत रोग घेरे रहते हंै एक बड़ा भाग धन का दवा में चला जाता है।

सूर्य में केतु- केतु अशुभ हो या शुभ जातक को सुख चैन नहीं मिलता। देह पीड़ा मिलती है। संबंधियों से विद्रोह मिलता है, कार्यों व धन कमाने के लिये ऐसी जगह जाना पड़ता है जहां का माहौल कपटपरद ही होता है, सुख कम व दुख ज्यादा प्राप्त होते हैं, परिजनों से लड़ाई होती है, हड्ïडी टूटने का भय होता है, रोजगार में सफलता तो मिलती है परंतु मान सम्मान गवांकर ही मिलती है।

सूर्य में शुक्र- अगर शुक्र शुभ हो तो बहुत अच्छे फल मिलते हैं। जातक को पुत्र की प्राप्ति होती है, घर में शुभ कार्यों का माहौल बना रहता है, शाही वैभव मिलता है, जेवर, कपड़ा, पशुधन, भोजन, अलंकार की प्राप्ति होती है। 

नौकर-चाकर, वाहन का पूरा सुख मिलता है। मान-सम्मान, शान्ति बढ़ती है। परंतु यदि शुक्र अशुभ हो तो मानसिक अशान्ति, स्त्री व संतान से कष्टï मिलता है शिरोवेदना, ज्वर से कष्टï मिलता है। जीवन बोझ लगने लगता है।

(सूर्य मंत्र)

सूर्य पूजा में सूर्य मंत्र का बहुत महत्त्व है। सूर्य मंत्र का जाप पूर्ण शुद्धता के साथ करने से जातक को यश, आयु, सम्मान की प्राप्ति होती है। प्रमुख सूर्य मंत्र निम्न हैं-

सूर्य गायत्री मंत्र ‘ऊं आदित्याय विदमहे भास्कराय धीमहि तन्नो भानु प्रचोदयात्’

ऊं घृणि सूर्याय नम:

ऊं सूं सूर्याय नम:

ऊं हां ही हौं स: सूर्याय नम: (सूर्य बीज मंत्र)

ऊं कार्याय नम:

ये सभी मंत्र सूर्य को मजबूती प्रदान करते हैं। अत: इनकी एक माला अनिवार्य है।

सूर्य का दान- जप के साथ दान का भी बहुत महत्त्व बताया गया है सूर्य के दान में लाल रंग की चीजों का महत्त्व है- जैसे लाल कपड़ा, लाल गुड़, लाल मसूर दाल, लाल चना, लाल चंदन, माणिक्य, शहद, लाल फल, और लाल मिठाई आदि का दान आप रविवार को प्रात: सूर्योदय से 12 बजे दोपहर तक कर सकते हंै।

अगर सूर्य खराब हो तो 

सूर्य वह विशालकाय तारा है जिसके चारों तरफ आठ ग्रह लगातार घूमते रहते हैं सूर्य के कारण ही जीवन है अन्यथा अंधकार ही है। धरती की हर वस्तु में सूर्य ही समाहित है। जिस तरह घर के मुखिया के कमजोर होने पर घर की स्थिति कमजोर रहती है उसी तरह कुंडली में सूर्य के कमजोर होने पर अन्य ग्रह भी अच्छे प्रभाव देना कम कर देते हैं।

कैसे खराब होता है सूर्य

अगर घर की पूर्व दिशा दूषित हो।

जो भगवान विष्णु की पूजा न करे।

पिता को जो सम्मान न दे।

देर से सोकर उठना।

शुक्र, राहु, शनि खराब हो तो।

सूर्य के दुष्परिणाम- 

  • व्यक्ति विवेक शून्य बन जाता है ।
  • दिमाग व शरीर का दायां भाग सूर्य से प्रभावित होता है।
  • शरीर में हर वक्त अकड़न रहती है।
  • मुंह में हर वक्त पानी आता रहता है।
  • दांत व हृदय संबंधी रोगों की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • दिल की धड़कन तेज रहने से हर वक्त घबराहट रहती है।
  • सिर दर्द बना रहता है, कभी-कभी बेहोशी भी आ जाती है।
  • इसके साथ ही गुरु, देवता, पिता साथ नहीं देते हैं। जेल जाने का भय बना रहता है, नौकरी नहीं रहती है, सोना चोरी हो जाता है या खरीदने के लिए पैसे नहीं होते। घर में लाल भूरी गाय हो तो वो भी मर जाती है।
  • यदि सूर्य व शनि एक साथ हो तो घर की स्त्री को कष्टï होता है।
  • यदि सूर्य व मंगल चंद्र व केतु साथ हों तो पुत्र, मामा, पिता को कष्टï होता है।

सूर्य को अच्छा बनाने के उपाय-

  • घर की पूर्व दिशा का वास्तु शास्त्र सही रखें।
  • घर में भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • बंदर, पहाड़ी गाय, कपिला गाय को भोजन कराएं।
  • सूर्य को जल दें गुड़ डालकर भगवान शिव की पूजा करें।
  • जब भी घर से निकलें मुंह में मीठा डालकर फिर पानी पीकर ही निकलें।
  • पिता का सम्मान करें।
  • आदित्य हृदय स्त्रोत व गायत्री मंत्र का जाप करें।
  • ‘ऊं घृणी सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप 108 बार करें।
  • ज्योतिष से सलाह लेकर अनामिका में माणिक्य धारण करें।
  • माणिक्य, गुड़ कमल फूल, लाल वस्त्र, चंदन, तांबा, स्वर्ण दक्षिणा का दान रविवार सुबह 12 बजे तक करें।

सूर्य का रत्न माणिक्य

माणिक्य सब रत्नों का राजा माना जाता है। ये रत्न कमजोर सूर्य को मजबूत करता है ये एक मूल्यवान रत्न है। अनार के दाने की तरह दिखने वाला रत्न कीमती होता है। इसकी कीमत वजन के हिसाब से होती है। माणिक्य को मोती, पुखराज, पन्ने के साथ भी पहन सकते हैं ये जातक के प्रभाव में वृद्धि करता है। पन्ना व माणिक्य एक साथ पहनने से बुधादित्य योग बनता है जो कि जातक के दिमाग को मजबूत करता है। माणिक्य के साथ नीलम व गोमेद नहीं पहनते हैं मेष, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन लग्न वाले लोग सूर्य की शुभ स्थिति में माणिक्य पहन सकते हैं। शुक्ल पक्ष के किसी भी रविवार को माणिक्य पहना जा सकता है। 

यह भी पढ़ें –हड्डियों और जोड़ों के दर्द में सहायक आसन